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Bankruptcy: अमेरिका की कंगाल कंपनी Revlon भारत में कर रही है Growth

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 22 Jun, 2022 12:25 PM
Bankruptcy: अमेरिका की कंगाल कंपनी Revlon भारत में कर रही है Growth

कॉस्मेटिक्स बनाने वाली अमेरिका की मशहूर कंपनी रेवलॉन इंक इन दिनाें मुश्किलों के दौर से गुजर रही है। ये वही रेवलॉन है, जिसकी लिप्स्टिक के लिए लड़कियां दीवानी थी, लेकिन अब इसके हालात खराब हो गए हैं। भले ही ये कंपनी  दिवालिया होने के कगार पर है, लेकिन भारत में यह Growth कर रही है। दावा किया जा रहा है भारत के लोगों को आज भी  रेवलॉन पर भरोसा है। 


कंपनी ने bankruptcy के लिए किया आवेदन

रेवलॉन ने हाल ही मे  बढ़ते कर्जों, कम हो रहे बाजार और प्रतिस्‍पर्द्धा में टिक न पाने की वजह से बैंकरप्सी (bankruptcy) के लिए आवेदन किया है। वहीं इसी बीच  मोदी-रेवलॉन के नाम से मशहूर मोदी-मुंडीफार्मा ब्यूटी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन और प्रेसिडेंट उमेश कुमार मोदी ने ET को दिए इंटरव्यू में बताया कि रेवलॉन भारत में विकास की राह पर है। उमेश मोदी ग्रुप और स्विट्जरलैंड के मुंडीफार्मा ग्रुप और यूएस के रेवलॉन के बीच संयुक्त उद्यम ने 1995 में भारत में रेवलॉन कॉस्मेटिक्स ब्रांड पेश किया था।

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बदलते  Trend के साथ तालमेल नहीं बना पाई कंपनी


मोदी ने दावा किया कि रेवलॉन जिसने पहली बार भारत में मॉल और बाजारों में शॉप-इन-शॉप आउटलेट के साथ अपनी पहचान बनाई थी, वह वृद्धि कर रहा है। हालांकि कंपनी ने नए जमाने और ग्लोबल ब्रैंड्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मॉल्स में एक्सपोजर काफी कम कर दिया है। वहीं  विश्लेषकों का कहना है कि रेवलॉन लाल लिपस्टिक के लिए जाना जाता था, ऐसे में वह बदलते  Trend के साथ तालमेल रखने में विफल रहा। 

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कोरोना काल में हुआ नुकसान

कोरोना काल में कंपनी को ज्यादा नुकसान हुआ, दरअसल उस दौरान  मंदी का दौर शुरू हुआ और लोगों ने सबसे पहले मेकअप और कॉस्मेटिक्स को कम करना शुरू कर दिया। नतीजा ये हुआ कि कंपनी की सेल्स बुरी तरह प्रभावित हुई। इसी साल मार्च में रेवलॉन ने कहा था कि उसे सप्लाई चेन की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वह मांग पूरी नहीं कर पा रही है।

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कंपनी कई श्रेणियों पर दे रही ध्यान 

मोदी ने बताया कि कंपनी ने अब ब्रांड बाल, त्वचा और सुगंध जैसी व्यक्तिगत देखभाल श्रेणियों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। हालांकि उन्होंने  इस बात पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया कि दिवालिया हुई कंपनी को रिलायंस इंडस्ट्रीज खरीदने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी-मुंडीफार्मा और रेवलॉन के बीच साझेदारी अपने 27वें वर्ष में है और यह 'आजीवन' है।

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कर्जदारों से बातचीत कर रही है कंपनी

इस कंपनी की शुरुआत अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में 1 मार्च 1932 को हुई थी। इसे चार्ल्स रेवसन और जोसेफ रेवसन नाम के दो भाइयों ने शुरू किया था। रेवलॉन के 15 से ज्यादा ब्रैंड हैं जिनमें Elizabeth Arden और Elizabeth Taylor शामिल हैं। करीब 150 देशों में इनकी बिक्री होती है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च के दौरान कंपनी को 67 मिलियन डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ था। कंपनी अपने कारोबार को बचाने के लिए कर्जदारों से बातचीत कर रही है। 

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