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घंटों तक वीडियो देखना पड़ सकता है भारी, पैरों की नसों में जम सकता है खून का थक्का

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 10 Oct, 2026 10:12 AM
घंटों तक वीडियो देखना पड़ सकता है भारी, पैरों की नसों में जम सकता है खून का थक्का

 नारी डेस्क: आजकल घंटों तक मोबाइल चलाना, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लगातार फिल्में और वेब सीरीज देखना या कंप्यूटर पर गेम खेलना आम बात हो गई है। कई लोग तो एक ही जगह पर बैठे-बैठे कई घंटे बिता देते हैं। देखने में यह आदत भले ही सामान्य लगे, लेकिन लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे पैरों में खून का संचार प्रभावित हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में नसों में खून का थक्का जमने का खतरा भी बढ़ सकता है। पहले लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने और धूम्रपान करने को इस तरह की समस्याओं से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब घंटों स्क्रीन देखने और गेमिंग करने जैसी आदतें भी चिंता बढ़ा रही हैं। खास बात यह है कि इसका असर केवल बुजुर्गों या ज्यादा उम्र के लोगों पर ही नहीं, बल्कि युवाओं और किशोरों पर भी पड़ सकता है। वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बदलती जीवनशैली को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि लगातार बैठे रहने से पैरों में खून का प्रवाह धीमा पड़ सकता है, जिससे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी गंभीर समस्या का खतरा बढ़ सकता है।

क्या है पैरों की नसों में खून का थक्का जमने की बीमारी

पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बनने की स्थिति को डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी DVT कहा जाता है। आमतौर पर पैरों में खून का प्रवाह ठीक बनाए रखने में मांसपेशियों की अहम भूमिका होती है। जब हम चलते हैं या पैरों को हिलाते हैं, तो मांसपेशियां खून को वापस हृदय की ओर पहुंचाने में मदद करती हैं। लेकिन जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही जगह बैठा रहता है, तो पैरों की मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है। इससे खून का प्रवाह धीमा हो सकता है और कुछ लोगों में थक्का बनने का जोखिम बढ़ सकता है। यह समस्या इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि अगर खून का थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म नाम की जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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घंटों तक मोबाइल और टीवी देखने से क्यों बढ़ता है खतरा

आजकल बहुत से लोग काम खत्म करने के बाद आराम करने के लिए मोबाइल या टीवी के सामने बैठ जाते हैं। शुरुआत में कुछ देर वीडियो देखने का इरादा होता है, लेकिन एक के बाद एक एपिसोड देखने या गेम में लगे रहने के कारण कई घंटे बीत जाते हैं। इस दौरान लोग अक्सर अपनी जगह से उठते तक नहीं हैं। पैरों की हलचल कम होने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहना DVT का एक जोखिम कारक माना जाता है। वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया की आयोजन समिति के सचिव डॉ. तापिश साहू ने सम्मेलन में 23 अध्ययनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों में खून का थक्का जमने का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति में वास्तविक जोखिम उसकी सेहत, गतिविधियों और अन्य जोखिम कारकों पर भी निर्भर करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार चार से पांच घंटे तक गेमिंग या ओटीटी वीडियो देखने के दौरान एक ही मुद्रा में बैठे रहना पैरों के रक्त संचार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए बीच-बीच में उठना और शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है।

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धूम्रपान भी बढ़ाता है नसों से जुड़ी समस्याओं का खतरा

लंबे समय तक बैठे रहने के अलावा धूम्रपान भी रक्तवाहिकाओं और हृदय की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। वैस्कुलर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. तरुण ग्रोवर ने धूम्रपान को नसों से जुड़ी बीमारियों का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक बताया। धूम्रपान से रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और खून के थक्के बनने से जुड़ा जोखिम बढ़ सकता है। अगर किसी व्यक्ति की दिनचर्या में धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक बैठे रहना जैसी आदतें एक साथ मौजूद हैं, तो उसे अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

पैरों में खून का थक्का जमने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

DVT के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देता। हालांकि, निम्न संकेत नजर आएं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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एक पैर में सूजन: पैर या पिंडली में अचानक सूजन आ सकती है।

दर्द या खिंचाव: खासकर पिंडली में दर्द, भारीपन या खिंचाव महसूस हो सकता है।

त्वचा का गर्म होना: प्रभावित हिस्से की त्वचा सामान्य से ज्यादा गर्म लग सकती है।

त्वचा के रंग में बदलाव: पैर की त्वचा लाल या गहरे रंग की दिखाई दे सकती है।

अगर एक पैर में अचानक सूजन और दर्द हो, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच करवाएं। यदि इसके साथ अचानक सांस फूलने, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। ये फेफड़ों में खून का थक्का पहुंचने के संकेत हो सकते हैं।

खून का थक्का जमने से बचने के लिए क्या करें

अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव करके लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

हर 30 से 45 मिनट में ब्रेक लें

अगर आप ऑफिस में काम करते हैं या मोबाइल और लैपटॉप पर वीडियो देखते हैं, तो हर 30 से 45 मिनट में उठने की आदत डालें। दो से पांच मिनट तक पैदल चलें या हल्की गतिविधि करें। इससे लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने का समय कम होगा।

पैरों को बीच-बीच में हिलाते रहें

अगर किसी वजह से तुरंत उठना संभव नहीं है, तो बैठे-बैठे टखनों को ऊपर-नीचे करें, पंजों को हिलाएं और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय रखें। हालांकि, यह लंबे समय तक बैठे रहने से बचने का विकल्प नहीं है।

रोजाना शारीरिक गतिविधि करें

अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना पैदल चलें और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। लगातार बैठे रहने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी गतिविधि करते रहना भी फायदेमंद है।

धूम्रपान से दूरी बनाएं

नसों और हृदय को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान छोड़ना जरूरी है। तंबाकू का सेवन करने वाले लोग इसे छोड़ने के लिए डॉक्टर की मदद ले सकते हैं।

पर्याप्त पानी पिएं

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी से बचना जरूरी है, खासकर गर्मी या शारीरिक गतिविधि के दौरान। हालांकि, केवल पानी पीने से खून का थक्का जमने का खतरा खत्म नहीं होता।

लगातार कई घंटे गेमिंग या वीडियो देखने से बचें

फिल्म या वेब सीरीज देखते समय हर एपिसोड के बीच छोटा ब्रेक लें। गेमिंग के दौरान भी नियमित अंतराल पर उठें और कुछ देर टहलें। स्क्रीन टाइम को सीमित करना और सक्रिय दिनचर्या अपनाना सेहत के लिए बेहतर है।

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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है

लंबे समय तक बैठे रहने से जुड़ा जोखिम कुछ लोगों में ज्यादा हो सकता है। इनमें पहले खून का थक्का बन चुका होना, हाल में बड़ी सर्जरी होना, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, कैंसर, गर्भावस्था या प्रसव के बाद की अवधि, एस्ट्रोजन युक्त कुछ दवाओं का इस्तेमाल और कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियां शामिल हैं। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सावधानियां बरतनी चाहिए। यदि पहले DVT हो चुका है या कोई अन्य बड़ा जोखिम कारक मौजूद है, तो लंबे समय तक यात्रा करने या लगातार बैठे रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

सेहत के लिए जरूरी है छोटी-छोटी आदतों में बदलाव

मोबाइल पर वीडियो देखना, वेब सीरीज का आनंद लेना या गेम खेलना अपने आप में बीमारी की वजह नहीं है। समस्या तब बढ़ती है, जब इन गतिविधियों के दौरान व्यक्ति घंटों तक एक ही जगह बैठा रहता है और शरीर को हिलाने-डुलाने का मौका नहीं देता। इसलिए अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे ब्रेक शामिल करें, नियमित रूप से चलें-फिरें और धूम्रपान से दूरी बनाएं। याद रखें, पैरों में खून का थक्का बनने की बीमारी हर उस व्यक्ति को नहीं होती जो लंबे समय तक बैठता है, लेकिन लगातार बैठे रहने की आदत जोखिम बढ़ा सकती है। समय रहते अपनी जीवनशैली में बदलाव करना और लक्षणों को पहचानना गंभीर परेशानियों से बचने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए है। पैरों में अचानक सूजन या दर्द होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। 
   
 

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