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डायबिटीज के डर से नहीं खाते हो आम? तो जान लो इसे खाने का सही टाईम और तरीका

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 29 May, 2026 01:34 PM
डायबिटीज के डर से नहीं खाते हो आम? तो जान लो इसे खाने का सही टाईम और तरीका

नारी डेस्क:भारत में आम के बिना गर्मी अधूरी मानी जाती है। बड़े हो या बुजुर्ग हर कोई इस फलों के राजा का दिवाना है। इ स फल की हर बाइट में पुरानी यादें, सुकून और जश्न का एहसास होता है। लेकिन डायबिटीज से जूझ रहे कई लोगों के लिए, आम का मौसम अपने साथ अपराध-बोध और उलझन भी लेकर आता है। लाखाें लोगों यही सवाल करते हैं कि क्यों आम की हर बाइट ब्लड शुगर लेवल को और बढ़ा देती है? चलिए आज जानते हैं इसका जवाब

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 आम में होती है नैचुरल शुगर 

कई एंडोक्राइनोलॉजिस्ट मानते हैं कि आम में नैचुरल शुगर होती है, लेकिन डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए यह "ज़हर" नहीं है। क्योंकि मौसमी फलों पर पूरी तरह से रोक लगाने से हेल्दी खाना भी एक बोझ जैसा और मानसिक रूप से थकाने वाला लग सकता है। ज़्यादा जरूरी यह समझना है कि आम कितनी मात्रा में, किस समय और किन चीजों के साथ खाया जाए। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट कहते हैं कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को आम से पूरी तरह दूर रहने की कोई ज़रूरत नहीं है। डायबिटीज़ के बारे में सबसे बड़े मिथकों में से एक यह है कि मीठा खाने से अपने आप नुकसान होता है। लेकिन पोषण स्वाद से कहीं ज़्यादा पेचीदा होता है।


आम में होते हैं ये गुण

एक पके आम में नैचुरल फ्रूट शुगर के साथ-साथ फ़ाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, विटामिन C और पॉलीफ़ेनॉल नाम के प्लांट कंपाउंड भी होते हैं। फ़ाइबर पाचन को धीमा कर देता है, जिसका मतलब है कि ब्लड शुगर उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ता, जितना कि मीठे डेजर्ट या पैकेट वाले ड्रिंक्स पीने के बाद बढ़ सकता है। NIH द्वारा सपोर्ट की गई रिसर्च बताती है कि कार्बोहाइड्रेट, खाने के सोर्स, फ़ाइबर की मात्रा और खाने की बनावट के आधार पर ब्लड ग्लूकोज़ पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं। इसका मतलब है कि ताज़े आम की एक छोटी सर्विंग, चीनी और आइसक्रीम से भरे आम के शेक का एक बड़ा गिलास पीने के बराबर नहीं है।

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आम को खाने का ये है सही तरीका

यह फर्क ज़्यादातर लोगों की सोच से कहीं ज़्यादा मायने रखता है। संतुलित लंच के बाद आम के टुकड़ों का एक कटोरा खाने पर शरीर के अंदर इसका असर, खाली पेट आम का जूस पीने के मुकाबले बिल्कुल अलग होता है। जब पेट में कोई खाना न हो, तब आम खाने से जैसे कि जूस, शेक और डेज़र्ट के रूप में ब्लड शुगर लेवल में तेज़ी से बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए, डायबिटीज़ के मरीज़ों को सलाह दी जाती है कि वे आम के टुकड़ों को किसी प्रोटीन वाले स्रोत या हेल्दी फैट के साथ खाएं, जैसे कि नट्स, बीज, ग्रीक योगर्ट या पनीर। इस तरह के खाद्य पदार्थ पाचन की गति को धीमा करने और ब्लड शुगर लेवल को ज़्यादा स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। 


खाने-पीने की आधुनिक आदतें समस्या खड़ी करती हैं

डॉक्टर कहते हैं कि आम खाने का सही समय दिन का होता है, जब शरीर ज़्यादा एक्टिव होता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी अपने सबसे ऊंचे स्तर पर होती है। देर शाम को ज़्यादा मात्रा में आम खाने से ब्लड ग्लूकोज लेवल में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सूरज डूबने के बाद आम “ज़हरीले” हो जाते हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि जब शारीरिक गतिविधि और मेटाबॉलिज्म स्वाभाविक रूप से ज़्यादा होते हैं, तो शरीर शुगर को बेहतर तरीके से संभाल पाता है। अधिकांश मधुमेह रोगी अपने रक्त शर्करा नियंत्रण, दवा, गतिविधि स्तर और समग्र आहार के आधार पर, कभी-कभी आधा से एक कप आम के टुकड़े सुरक्षित रूप से खा सकते हैं। हर व्यक्ति की सहनशीलता अलग-अलग होती है, इसलिए रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करना सहायक हो सकता है।

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