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वर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, कमजोर हो सकती है रीढ़ की हड्डी

  • Edited By Monika,
  • Updated: 04 Oct, 2026 12:45 PM
वर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, कमजोर हो सकती है रीढ़ की हड्डी

नारी डेसक : बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा इन दिनों अपनी रीढ़ की चोट को लेकर चर्चा में हैं। बाली में हुए एक हादसे के बाद उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई थी। शुरुआती इलाज के बाद उन्हें बेहतर मेडिकल केयर के लिए मुंबई लाया गया और उनकी टीम ने स्पाइन सर्जरी की जानकारी दी। हालांकि, नुसरत को किस तरह का फ्रैक्चर हुआ है, इसकी पूरी मेडिकल जानकारी सार्वजनिक नहीं है। ऐसे में उनका मामला यह समझने का एक मौका है कि रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर कई तरह के हो सकते हैं और हर स्थिति में सर्जरी जरूरी नहीं होती। इन्हीं में से एक है वर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर (VCF), जिसमें रीढ़ की कशेरुका दबने या सिकुड़ने लगती है।

क्या होता है वर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर?

हमारी रीढ़ कई छोटी-छोटी हड्डियों यानी कशेरुकाओं (Vertebrae) से मिलकर बनी होती है। जब किसी कशेरुका पर इतना दबाव पड़ता है कि वह दबने या सिकुड़ने लगती है, तो इसे वर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर कहा जाता है। यह समस्या कमजोर हड्डियों वाले लोगों में मामूली गिरने या हल्की चोट के बाद भी हो सकती है। वहीं, स्वस्थ और मजबूत हड्डियों में आमतौर पर तेज या गंभीर चोट के कारण ऐसा फ्रैक्चर हो सकता है।

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वर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर के लक्षण

इस तरह के फ्रैक्चर में सबसे आम लक्षण कमर या पीठ में दर्द हो सकता है। कुछ लोगों में दर्द अचानक शुरू हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में यह लगातार बना रहता है।
इसके अलावा ये संकेत भी दिखाई दे सकते हैं
खड़े होने या चलने पर दर्द बढ़ना
पीठ या कमर में जकड़न महसूस होना
रीढ़ की सामान्य शेप में बदलाव
समय के साथ लंबाई कम होना
अगर चोट के बाद पैरों में सुन्नपन, कमजोरी या चलने में परेशानी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

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कब कमजोर होने लगती है रीढ़ की हड्डी?

रीढ़ की हड्डियों की मजबूती उम्र, हड्डियों के स्वास्थ्य और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हो सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और अधिक नाजुक हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र के अलावा कैल्शियम और विटामिन D की कमी, लंबे समय तक कुछ दवाओं का इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधि की कमी भी हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में जोखिम अलग हो सकता है।

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क्या हर स्पाइनल फ्रैक्चर में सर्जरी जरूरी होती है?

नहीं, हर स्पाइनल फ्रैक्चर में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। इलाज का फैसला फ्रैक्चर की गंभीरता, रीढ़ की स्थिरता और नसों या स्पाइनल कॉर्ड पर पड़ रहे दबाव जैसी स्थितियों को देखकर किया जाता है। कुछ स्थिर फ्रैक्चर में डॉक्टर दवाओं, आराम, ब्रेस और नियमित निगरानी जैसे गैर-सर्जिकल तरीकों से इलाज कर सकते हैं। वहीं, अगर फ्रैक्चर गंभीर हो, रीढ़ अस्थिर हो या नसों पर दबाव पड़ रहा हो, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

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