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Cervical Cancer: एक छोटी लापरवाही और जान खतरे में, महिलाओं के लिए सतर्कता जरूरी

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 09 Jan, 2022 12:10 PM
Cervical Cancer: एक छोटी लापरवाही और जान खतरे में, महिलाओं के लिए सतर्कता जरूरी

कैंसर एक ऐसी बीमारी जिसका नाम सुनते ही मरीज के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। कुछ कैंसर ऐसे हैं जो ज्यादातर महिलाओं को ही अपना शिकार बनाते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। 

महिला के यूट्रस के सबसे निचले हिस्से को सर्विक्स होता है जो गर्भाश्य और योनि को जोड़ता है और सर्विक्स में होने वाले कैंसर को ही सर्वाइकल कैंसर कहते हैं। साल 2020 के अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 604,000 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की शिकार हुई थी जिसमें 342,000 की बीमारी से मृत्यु हो गई और साल 2018 में लगभग 90 प्रतिशत मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हुई और उन्हीं देशों में सर्वाइकल कैंसर का खतरा सबसे अधिक है क्योंकि यहां स्वास्थ सेवाएं काफी सीमित हैं। इस कैंसर से जुड़े इलाज व स्क्रीनिंग उपचार भी पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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जबकि डब्ल्यूएचओ WHO के अन्तगर्त आती सरकारी एजेंसी, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के अनुसार, सही समय पर वेक्सीनेशन और स्क्रीनिंग के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है। 

भारत में इस कैंसर के बढ़ने का कारण महिलाओं में जागरुकता की कमी और लापरवाही है। कैंसर के शुरूआती संकेतों को ध्यान में रखकर सहीं समय पर इस बीमारी को रोका जा सकता है। टीकाकरण और स्क्रीनिंग,  सर्वाइकल कैंसर को सही समय में पकड़ने का सबसे सक्षम उपाय है।  

-15 वर्ष के बाद लड़कियों को एचपीवी का टीका लगाकर 
-35 वर्ष की, फिर 45 वर्ष की आयु तक स्क्रीनिंग टेस्ट से जांच करके

अब आपको बताते हैं कि इस बीमारी के शुरूआती लक्षण कौन से हैं और कैंसर होने के कारण क्या हैं?

जब 35 -40 की उम्र के बाद महिलाओं के पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। कम या ज्यादा ब्लीडिंग होने लगती हैं तो अक्सर महिलाएं ऐसी प्रॉब्लम को नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन ये सर्वाइकल कैंसर के शुरूआती संकेत भी हो सकते हैं। अगर ये कैंसर समय पर ना पकड़ा जाए तो कैंसर लिवर, ब्लैडर, योनि, फेफड़ों और किडनी तक पहुंच सकता है हालांकि ये  कैंसर बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन कुछ शुरूआती लक्षणों से इसे पहचाना जा सकता है। जैसे-

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. पीरियड्स समय पर ना आना
. ज्यादा आना या कम आना
. इंटरकोर्स के दौरान खून निकलना
. पेट के निचले हिस्से में दर्द और सूजन रहना
. बार-बार यूरिन आना
. बहुत थकान होना
. हल्का बुखार और सुस्ती रहना
. भूख कम होना

क्यों होता है सर्वाइकल कैंसर?

-98% मामलों में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वायरस के फैलने से सर्विक्स कैंसर होता है। आनुवांशिकता भी इसकी प्रमुख वजह है। फैमिली हिस्ट्री वाली महिलाओं में इस कैंसर का खतरा ज्यादा बना रहता है। 
-सिगरेट पीने वाली महिलाओं, कुपोषण और पर्सनल हाइजीन की कमी से यह बीमारी हो सकती है। 
-यह एसटीडी यानी सेक्सुअली ट्रांस्मिटेड डिज़ीज़ है, इसलिए कम उम्र में या असुरक्षित सेक्स और एक से ज्यादा पार्टनर्स के साथ संबंध बनाने से इस कैंसर का खतरा रहता है।

आसान है सर्वाइकल कैंसर की जांच

ज्यादातर मामलों में इस कैंसर के बारे में एडवांस स्टेज में ही इसका पता लगाया जा सकता है। 
पैप स्मीयर टेस्ट से इसके बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है लेकिन जागरूकता के अभाव में ज़्यादातर स्त्रियां यह जांच नहीं करवातीं और जबतक उन्हें इस बारे में पता चलता है तब तक बहुत देर हो जाती है। 

बचाव के लिए सबसे जरूरी है-

. एचपीवी टीकाकरण करवाएं।
. नियमित रूप में पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए।
. अनियमित यौन संबंधों से बचें।
. धूम्रपान ना करें।
. हैल्दी और पौष्टिक खाएं।
. अपना लाइफस्टाइल हैल्दी रखें।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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याद रखिए कैंसर से बचने का पहला उपाय सतर्कता ही हैं। समय पर देखे गए संकेत आपको मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं।

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