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देश के दफ्तरों में हर 10वीं महिला को करना पड़ता है यौन उत्पीड़न का सामना

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 18 Oct, 2019 06:43 PM
देश के दफ्तरों में हर 10वीं महिला को करना पड़ता है यौन उत्पीड़न का सामना

आज महिलाएं बाहर निकल पुरुषों के समान काम कर रही हैं लेकिन अभी भी देश के दफ्तरों में महिलाओं के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है। हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार देश के दफ्तरों में हर 10वीं महिला को किसी न किसी तरह से यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा रहा हैं। इतना ही नहीं, ऐसी शिकायतें करने वाली ज्यादातर महिलाओं के दफ्तर में शिकायत समिति भी नहीं होती है।

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राष्ट्रीय महिला आयोग और ‘दृष्टि स्त्री अध्ययन प्रबोधन केंद्र' की ओर से पिछले 2 सालों में देश के 64 फीसदी जिलों में 74,095 महिलाओं से बात की गई। इसके साथ हीं सरकारी पहचान पत्र, बैंकिंग सुविधा, शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार से संबंधित महिलाओं के तथ्य को भी इक्ट्ठा किया गया हैं।

87 फीसदी दफ्तरों में नहीं है क्रेच की सुविधा

87 फीसदी दफ्तरों में बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच की सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसके कारण अधिकर महिलाओं को मां बनने के बाद अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर व असंगठित सेक्टर में महिलाओं को वेतन संबंधी कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि 69 फीसदी कार्यक्षेत्रों में शौचालय संबंधी बेसिक सुविधा उपलब्ध हैं। इस समय देश की 82 फीसदी महिलाओं के पास मतदाता पहचान पत्र, 79 फीसदी के पास बैंक खाते और 64 फीसदी महिलाओं के पास पैन कार्ड है।

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महिलाओं में गठिया की समस्या है अधिक

2011 की जनगणना के बाद महिलाओं की साक्षरता में 15 फीसदी बढ़ोतरी भी हुई। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के स्वस्थ्य की बात करें तो उनमें रक्तचाप के बाद गठिया रोग सबसे आम बीमारी है। इन सबके बावजूद भी महिलाएं पुरुषों के मुकाबले आमतौर पर ज्यादा खुश रहती हैं व इस खुशी का इनकम से कोई लेनादेना नहीं है। अध्ययन के मुताबिक आदिवासी इलाकों में लड़कियों के बाल विवाह का चलन अब भी चल रहा है।

 

 

 

 

 

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