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सेहत खराब करता है रिफाइंड ऑयल, जानें खाना बनाने के लिए कौन-सा तेल है बेस्ट

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 05 Jun, 2019 09:23 AM
सेहत खराब करता है रिफाइंड ऑयल, जानें खाना बनाने के लिए कौन-सा तेल है बेस्ट

भारतीय घरों में खाना पकाने में तेल का इस्तेमाल खूब होता है। तेल के बिना आप खाने में स्वाद नहीं ला सकते। मगर बदलते लाइफस्टाइल में जहां हमें पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए, वहीं इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि जिस तेल में हम खाना पका रहे हैं वो सेहत के लिए अच्छा है भी या नहीं। हालांकि आजकल ज्यादातर लोग खाना बनाने कि लिए रिफाइंड का यूज करते हैं लेकिन इसका सेवन भी कहीं ना कहीं सेहत के लिए हानिकारक है। ऐसे में आज हम आपको खाना बनाने के लिए कौन-सा तेल सही है और उसका इस्तेमाल किस तरह करना चाहिए।

 

एक्स्ट्रा वर्जिन और वर्जिन कोकोनट ऑयल

वर्जिन नारियल तेल में पका हुआ खाना पौष्टिक के साथ अधिक समय तक फ्रैश भी रहता है। नारियल तेल खाने में मौजूद सभी पोषक तत्वों का अवशोषण कर लेता है, जो सीधे शरीर के अंदर पहुंचाने का काम करता है। बताया जाता है कि नारियल तेल में 92 फीसदी सैच्युरेटेड फैट होता है और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा न के बराबर होती है। वहीं जिन लोगों को मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम या हाइपोथायरायडिज्म है उनके लिए इस तेल का इस्तेमाल बेहतर है। इसमें मौजूद लॉरिक एसिड, फैटी एसिड रोगाणुरोधी वायरस जैसे गुण बैक्टीरिया, वारयल और किटाणुओं से शरीर को बचाने का काम करते हैं।

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जैतून का तेल

जैतून का तेल हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, कोरोनरी धमनी रोग, कैंसर और रुमेटीइड गठिया का खतरा कम करता है। यही कारण है डॉक्टर्स भी जैतून का तेल यूज करने की सलाह देते हैं। 1 दिन में जैतून तेल का एक कप शरीर में 17 प्रतिशत फाइबर की पूर्ति करता है। इस तेल में मोनोसैचुरेटेड फैट्स भी होता है, जो शरीर में विटामिन ए, डी, ई, और के की पूर्ति करता है। इसके अलावा जैतून तेल में  फाइटोन्यूट्रिएटंस ओलेकैंथेल और ओलेइक एसिड भी होता है, जो आंखों व बालों के लिए फायदेमंद है।

एवोकाडो ऑयल

एवोकाडो ऑयल में मोनोअनसैचुरेटेड ओमेगा -9, फैटी एसिड, ओलिक एसिड होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम के जोखिम को कम करने में इंफ्लेमेंएटरी प्रतिक्रिया को कम करता है। यह कार्डियोवस्कुलर रिस्क प्रोफाइल मार्करों को भी सकारात्मक रूप से बदल देता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। इसमें ल्यूटिन-7 (कैरोटीनॉइड) भी होता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने, बढ़ती उम्र की समस्या, स्किन प्रॉब्लम्स और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है।

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कैसे करें इस्तेमाल?

-तेल को सही जगह पर स्टोर करना बहुत जरूरी है क्योंकि उन्हें ऑक्सीकरण हो सकता है, जिससे मुक्त कण विकसित हो सकते हैं। ऐसे में इन तोलों को ऐसी जगह स्टोर करें, जो सूखी और ठंडी हो, खासकर अगर आपको इनका इस्तेमाल लंबे समय तक करना हो।
-अगर आप कोई फ्राईड भोजन बनाने लगे है तो उसके लिए जैतून के तेल का इस्तेमाल करें क्योंकि नारियल तेल और एवोकाडो फ्राईड फूड के लिए सही नहीं होता।
-रोस्टिंग, स्टीमिंग, बेकिंग या ठंडे भोजन के लिए एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल तेल का इस्तेमाल करें।
-एवोकाडो तेल अपने सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए भी बहुत अच्छा है।
-यदि आप उच्च तापमान पर भोजन को ग्रिल या रोस्ट कर रहे हैं तो एवोकाडो ऑयल जैतून तेल से बेहतर है क्योंकि इसमें धूम्रपान का स्तर अधिक है।
-नारियल के तेल में भी कम धूम्रपान बिंदु होता है, जो कि कम तापमान वाले सॉस या बेकिंग के लिए उपयोग किया जाता है।

इन तेलों का ना करें इस्तेमाल
ट्रांस फैट ऑयल

जब खाना पकाने के तेल की बात आती है तो आपको इन तेलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिसमें ट्रांस फैट 4 चम्मच से अधिक हो या जो हाइड्रोजनीकृत हो।

सोयाबीन और कैनोला ऑयल

सोयाबीन और कैनोला तेलों जैसे वनस्पति तेलों में ट्रांस फैट्स होते हैं इसलिए इनसे परहेज करें। साथ ही इनमें मौजूद ओमेगा 6 फैटी एसिड शरीर में सूजन भी बढ़ा सकते हैं। इनका सेवन दिल की बीमारी, मोटापे, मधुमेह और कैंसर का कारण बन सकता है।

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फिश ऑयल

वैसे तो फिश ऑयल का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन इसका एक दिन में एक चम्मच से अधिक का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं खाना बनाने के लिए आपको इससे अधिक तेल का जरूरत होती है। ऐसे में इससे परहेज करना ही बेहतर होगा।

अलसी का तेल

जहां अलसी का तेल सेहत के लिए फायदेमंद है वहीं इसके कुछ नुकसान भी है। दरअसल, गर्म होने पर यह तेल ऑक्सीकरण हो जाता है, जो सेहत के लिए हानिकारक है। साथ ही डायबिटीज पेशेंट के लिए भी इस तेल का यूज सही नहीं है।

रिफाइंड ऑयल

खाना बनाने के लिए किसी भी तरह के रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दरअसल, रिफाइंड तेल प्रोसेस किया हुआ तेल होता है। साथ ही इसमें कई प्रकार के ब्लीच और केमिकल डाले जाते है, जिससे तेल में मौजूद न्यूट्रिशन, रंग, स्वाद और खुशबू चली जाती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप खाना बनाने के लिए रिफाइंड तेल का यूज ना करें।

हानिकारक है बचा हुआ तेल

रिसर्च में बताया गया कि बचे हुए तेल में फ्री रेडिकल्स बनने लगते हैं, जो आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। वहीं बार-बार तेल गर्म करने से उसकी गंध खत्म हो जाती है और उसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स भी नहीं बचते, जिसके चलते उसमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व पैदा हो जाते हैं।

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