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Women Health: इस बीमारी का इशारा गिरते बाल व बढ़ता वजन, लापरवाही पड़ेगी भारी

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 19 Oct, 2019 12:54 PM
Women Health: इस बीमारी का इशारा गिरते बाल व बढ़ता वजन, लापरवाही पड़ेगी भारी

महिलाओं में कंसीव न कर पाने की एक खास वजह पोलिसिस्टिक ओविरियन सिंड्रोम यानी PCOS होता है। इसकी वजह से बनने वाले सिस्ट का समय रहते इलाज न किया जाए तो यह कैंसर का रूप ले सकता है। यह विकार तब होता है जब शरीर में हार्मोंन्स का असंतुलन पैदा होता है। इस कंडीशन में महिला की ओवरी बड़ी हो जाती है।

चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पीसीओडी क्या और इससे आपको क्या-क्या परेशानियां झेलनी पड़ सकती है।

क्या है पीसीओडी?

यह एक ऐसी हार्मोनल डिसऑर्डर है, जिसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन एण्ड्रोजन( Androgen) का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते हैं। यह मादा हार्मोन एंडोर्फिन के काम में बाधा डालता है, जिसे अंडाशय चक्र असामान्य हो जाता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर शोभा गुप्ता बताती हैं कि करीब 10 फीसदी महिलाएं यंग ऐज में ही PCOS से प्रभावित हो जाती हैं। आमतौर पर यह समस्या महिलाओं को प्रजनन की उम्र से लेकर मेनोपॉज तक प्रभावित करती है। डॉ गुप्ता कहती हैं, महिलाओं और पुरूषों दोनों के शरीर में प्रजनन संबंधी हॉर्मोन बनते हैं। एंड्रोजेंस हॉर्मोन पुरूषों के शरीर में भी बनते हैं, लेकिन पीसीओएस की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के अंडाशय में यह हॉर्मोन सामान्य से अधिक बनने लगते हैं। इसकी वजह से अंडाणु सिस्ट या गांठ में तब्दील हो जाता है और कई बार कैंसर का रूप भी ले लेता है। 

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पीरियड्स ज्यादा आते हों या बिलकुल नहीं

गाइनैकॉलजिस्ट और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर श्वेता गोस्वामी कहती हैं, ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होती हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी बढ़ता जाता है। यह स्थिति पालिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम कहलाती है। इसकी वजह से महिलाएं कंसीव नहीं कर पातीं हैं। यह समस्या उन महिलाओं में होने की संभावना अधिक होती है, जिन्हें पीरियड्स बहुत ज्यादा आता हो या बिल्कुल न आता हो। 

पीसीओएस के लक्षण

अगर किसी फीमेल के फेस, ब्रेस्ट, बैक साइड, फिंगर्स में बाल आने लगे या सिर के बाल तेजी से गिरने लगें तो ये पीसीओएस के लक्षण हैं। अगर पीसीओएस का शुरू में पता न चल पाए और इलाज न हो, तो इन्फर्टिलिटी की समस्या के साथ-साथ महिला को टाइप 2 डायबीटीज और अत्यधिक कलेस्ट्रॉल की शिकायत भी हो जाती है। सिस्ट अगर लंबे समय तक अंडाशय में रहे, तो कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। पीसीओएस के इलाज के लिए कई दवाएं है और ऑपरेशन से भी सिस्ट निकाल कर बाहर कर सकते हैं।

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मोटापा है तो हो जाएं सावधान

व्यायाम की कमी व जंक फूड से तेजी से वजन बढ़ता है, जिससे ऐस्ट्रोजन हॉर्मोन की क्वांटिटी में इजाफा होता है। डॉक्टर कहते हैं कि ओवरी में सिस्ट बनाने में ये चीजें जिम्मेदार होती हैं। वजन घटाने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। लाइफस्टाइल को सही प्रकार से मैनेज कर व मोटापे को कंट्रोल में लाकर इस समस्या से बचा जा सकता है। बीमारी के लक्षण नजर आते ही डॉक्टर से सलाह व ट्रीटमेंट करवाकर आप इस समस्या से उबर सकती हैं।

लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

-इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है तनाव इसलिए जितना हो सके स्ट्रेस लेने से बचें।
-बढ़ते वजन के साथ आपकी परेशानी भी बढ़ सकती है इसलिए इसे कंट्रोल में रखें।
-रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लें। इससे ना सिर्फ तनाव दूर होगा बल्कि पीसीओडी की समस्या भी दूर रहेगी।
-कुछ महिलाओं को शराब पीने की आदत होती है लेकिन इससे शरीर में हार्मोन अंसतुलित हो जाते हैं, जो इस बीमारी को बढ़ाते हैं। ऐसे में इससे दूरी बनाएं।
-रोजाना कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज या 15-20 योगासन जरूर करें। कपालभाती, हलासन, धनुरासन, मार्जरासन और भुजंगासन पीसीओडी में फायदेमंद होते हैं।

घरेलू नुस्खे भी हैं मददगार

मेथी की बीज को रातभर के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह इसे पीसकर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं। दिन में 2 बार नियमित रूप से इसका सेवन करने से आपको इस समस्या में सुधार दिखने लगेगा।

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