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महिलाओं में बढ़ते ओवरी कैंसर के संकेतों को न करें इग्नोर, इस 1 चीज से होगा बचाव

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 13 Jul, 2019 11:34 AM
महिलाओं में बढ़ते ओवरी कैंसर के संकेतों को न करें इग्नोर, इस 1 चीज से होगा बचाव

ओवरी कैंसर बचपन से बुढ़ापे तक किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन 50 साल से ज्यादा उम्र की औरतें ही इसकी अधिक शिकार होती हैं। 60% महिलाओं को इस बीमारी की जानकारी एडवांस स्टेज में होती है, जिसका एक बड़ा कारण जागरूकता की कमी और लापरवाही है। समय रहते इसका इलाज करवाने पर महिलाओं की जान बच सकती हैं इसलिए बेहतर होगा कि इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज ना करें और तुरंत डॉक्टर से चेकअप करवाएं।

 

वैजाइना बैक्टीरिया से कम होगा कैंसर का खतरा

अध्ययन के मुताबिक, शरीर के अंदर रहने वाले बैक्टीरिया और अन्य रोगाणु यानि माइक्रोबायोम भी स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इन्हीं बैक्टीरिया में से एक लैक्टोबैसिलस अन्य बेकार या खराब रोगाणुओं को बढ़ने से रोकता है, जिससे ओवरी कैंसर का खतरा कम होता है। हालांकि, लैक्टोबैसिलस में कमी से डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

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वैजाइना टेस्ट लगाएगा कैंसर का पता

शोधकर्ताओं के अनुसार, महिलाओं में डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावना बहुत कम हो सकती है, अगर स्वैब का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस खोज का इस्तेमाल महिलाओं को कैंसर के उच्च जोखिम की पहचान करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह कोई स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं बल्कि वैजाइना टेस्ट है।

कैंसर के जरूरी तथ्य

-फैमिली हिस्ट्री यानि जनेटिक, बढ़ती उम्र, प्रजनन हिस्ट्री (reproductive history) और मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को इसका अधिक खतरा होता है।
-सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी से ओवरी कैंसर का इलाज किया जा सकता है लेकिन अगर समय रहते इसका पता चल जाए।
-अगर समय रहते इसका उपचार किया जाए तो 94% चांसेस हैं कि कम से कम 5 सालों तक स्वस्थ जीवित व्यतीत करे।

किन महिलाओं को है ज्यादा खतरा?

40 साल की उम्र से पहले स्तन कैंसर होने पर ओवेरियन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, इन्फर्टिलिटी का लंबा ट्रीटमेंट चलने से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा बच्चा न होना, हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी या एंडोमेट्रियोसिस का निदान करने वाली महिलाओं में भी ओवरियरन कैंसर की संभावना ज्यादा होती है।

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ओवेरियन कैंसर के लक्षण

प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण नहीं होते हैं लेकिन इसमें धीरे-धीरे प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम या पीएमएस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या आईबीएस या अस्थायी मूत्राशय की समस्या सामने आती है। इसके अलावा इस बीमारी में अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे -

-पेल्विक या पेट के निचले हिस्से में दर्द
-कमर व तेज पीठ दर्द
-अपच, कब्ज और पेट भरा हुआ महसूस होना
-लगातार और बार-बार पेशाब आना
-संबंध बनाते समय दर्द
-जी मिचलाना
-वजन घटना
-सांस फूलना और थकान
-भूख में कमी

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कैंसर का निदान

-सीए -125 के ऊंचे स्तर की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट
-ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या सीटी स्कैन।
-मलाशय से रक्तस्राव होने पर कोलोनोस्कोपी
-बायोप्सी सर्जरी

कैंसर का उपचार

सर्जरी: कैंसर स्टेज के हिसाब से डॉक्टर्स सल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी, हिस्टेरेक्टॉमी, लिम्फ नोड विच्छेदन, साइटोडेक्टिव या डीबॉकिंग सर्जरी के द्वारा इसका उपचार किया जाता है।
कीमोथेरेपी: कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए मरीज को कीमोथेरेपी के द्वारा कुछ दवाइयां भी दी जाती है।
हार्मोन थेरेपी: एस्ट्रोजन को कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचने से रोकने के लिए डॉक्टर्स हार्मोन थेरेपी का सहारा भी लेते हैं।

बचने के तरीके

-इस से बचने के लिए महिलाओं को रक्त कैल्शियम का टेस्ट कराते रहना चाहिए।
-महिलाओं को ट्यूबल लिगेशन और हिस्टेरेकटॉमी कराने से बचना चाहिए।
-गर्भनिरोधक गोलियों को नहीं खाना चाहिए।
-अपने मोटापे पर कंट्रोल और रोजानां व्यायाम करना चाहिए।

याद रखें ये बातें

ओवरी कैंसर के बारे में तब पता चलता है जब वह काफी आगे बढ़ चुका होता है। लेकिन अगर महिलाएं समय-समय पर चेकअप करवाती रहें तो समय रहते इस गंभीर बीमारी का इलाज शुरू किया जा सकता है।

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