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अस्थमा बच्चे को चाहिए स्पैशल केयर, पैरेंट्स याद रखें 7 बातें

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 13 Apr, 2019 07:22 PM
अस्थमा बच्चे को चाहिए स्पैशल केयर, पैरेंट्स याद रखें 7 बातें

बढ़ते प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। वहीं लगातार बढ़ रहा यातायात प्रदूषण लोगों में फेफड़ों, दिल के साथ अस्थमा का कारण भी बन रहा है। सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, यातायात प्रदूषण के कारण भारत में करीब साढ़े 3 लाख बच्चे अस्थमा की चपेट में आ गए हैं। बता दें कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों की संख्या में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है।

 

बच्चों में बढ़ते अस्थमा के मामले

लगातार बढ़ते यातायात प्रदूषण का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों में देखा जा सकता है। शोध के मुताबिक चीन में 7 लाख 60 हजार और भारत में 3,50,000 लाख बच्चे अस्थमा की चपेट में हैं। इतना ही नहीं, हर साल प्रति 1 लाख बच्चों में अस्थमा के 170 नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से बचपन में होने वाले अस्थमा के 13 फीसदी मामले यातायात प्रदूषण से जुड़े होते हैं।

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भारत और चीन में सबसे ज्यादा मरीज

स्टडी में 194 देशों और दुनियाभर के 125 प्रमुख शहरों का विश्लेषण किया गया, जिसमें चीन पहले और भारत को इस बीमारी के मामले में सबसे आगे पाया गया। चीन और भारत में अस्थमा की बीमारी के सबसे ज्यादा मामले यानी साढ़े तीन लाख मामले इसलिए थे क्योंकि यहां बच्चों की आबादी अधिक है। वहीं अमेरिका में अस्थमा से पीड़ित बच्चों की संख्या 2 लाख 40 हजार, इंडोनेशिया में 1 लाख 60 हजार और ब्राजील में 1 लाख 40 हजार तक है।

बच्चों में अस्थमा के लक्षण

लगातार खांसी का आना
सांस लेते समय घरघराहट की आवाज
सांस लेने में तकलीफ
सिने में दर्द रहना
थकान और कमजोरी
पसलियों में दर्द
सहनशक्ति की कमी

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ऐसे करें अस्थमा चाइल्ड केयर
बच्चे की चीजों को रखें हाइजीन

बच्चों की बेड शीट और तकिया कवर रोजाना बदलें। साथ ही उनके कपड़ों को भी गर्म पानी और डिटॉल से धोएं, ताकि उन्हें एनर्जी ना हो।

पालतू जानवरों से रखें दूर

बच्चों को पालतू जानवरों के पास ना जानें दें। साथ ही अस्थमा होने पर बच्चों एलर्जी टेस्ट करवाएं और उन्हें एनर्जी के इंजेक्शन भी लगवाए।

नियमित रूप से दें दवाइयां

अक्सर बच्चे दवाइयां खाने की बजाए फैंक देते हैं। ऐसे में इस बात का खास ख्याल रखें कि वो दवाइयों का नियमित रूप से सेवन करें।

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हरदम साथ रहे इनहेलर

अगर आपका बच्चा छोटा है तो नेब्युलाइजर और बड़ा है तो उसे इनहेलर का इस्तेमाल सिखाएं। साथ ही उन्हें अपनी इनहेलर साथ रखने के लिए कहें।

हल्की फुल्की एक्सरसाइज

बच्चों को रोज हल्की एक्सरसाइज करवाना भी सिखाएं। अगर बच्चा रोजाना दवा ले रहा है तो आप उसे दूसरे बच्चों की तरह खेलने भी दे सकते हैं।

दोस्तो व टीचर से भी शेयर करें प्रॉब्लम

अस्थमा अटैक कभी आ सकता है। इसलिए उनकी इस प्रॉब्लम के बारे में उनके दोस्त, टीचर उनके आस-पास रहने वाले लोगों को भी बताएं, ताकि कोई परेशानी होने पर वह उसकी मदद कर सकें।

डाइट का भी रखें खास ख्याल

अगर बच्चे को अस्थमा है तो डॉक्टर से सलाह लेकर उसकी डाइट में सभी न्यूट्रिशन शामिल करें। साथ ही बच्चों को धूल-मिट्टी, ज्यादा नमक वाले भोजन, वसा युक्त आहार जैसे- जंक फूड, डिब्बाबंद भोजन, मिर्च-मसालेदार या बासी भोजन और मक्खन आदि से दूर रखें।

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