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मां की एक पहल ने बनाया तीन बेटियों का भविष्य, एक ही राज्य में बनी सचिव

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 03 Jul, 2019 06:11 PM
मां की एक पहल ने बनाया तीन बेटियों का भविष्य, एक ही राज्य में बनी सचिव

ऐसा राज्य यहां पर लड़कियों मारने, लिंग अनुपात, लड़कियों को न पढ़ाने की बात की जाती है। वहीं पर तीन सगी बहने पहले आईएएस बनी फिर मुख्य सचिव। यह न केवल उस राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात हैं। आज तीनों बहनों ने केवल अपनी प्रतिभा को साबित किया है बल्कि साथ ही संदेश दिया है कि लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं हैं। वह लड़कों की तरह ऊंचे पद पर काम कर सकती हैं। 

हरियाणा में 25 साल बाद 1983 बैची की आईएएस केशनी को पिछले हफ्ते राज्य की सचिव नियुक्त किया हैं। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में एमए व एमफिल की पढ़ाई की हैं। यह प्रदेश की 33 वीं मुख्य सचिव बनी है, जो कि सिंतबर 2020 तक अपने पद पर रहेंगी। इससे पहले वह इंटरनेशनल लेवल के बेस्ट स्टेट फॉर कंजर्वेशन एवं प्रिजर्वेशन ऑफ हैरीटेज समेत 9 अवार्ड अपने नाम कर चुकी हैं।

खुद पर था यकीन, बनेगी डिप्टी कमिश्नर 

केशनी आनंद की जिस समय आईएएस की ट्रेनिंग चल रही थी उस दौरान उन्हें डिप्टी कमिश्नर के कार्यों के बारे में बताया जा रहा था। उस समय एक अधिकारी ने उन्हें कहा कि इन पर इतना ध्यान ने दें यह कौन सा डिप्टी कमिश्नर की पोस्ट पर पोस्ट होगीं। तब उन्होंने बोला की मुझे यकीन है कि मैं एक दिन डिप्टी कमिश्नर का पद जरुर मिलेगा। 

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बहनें भी रह चुकी है सचिव 

यह बात उनके लिए ओर भी खास व महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि वह तीसरी बहन है जो कि राज्य की मुख्य सचिव बनी हैं। इससे पहले उनकी बड़ी बहनें मीनाक्षी आनंद जो कि 1969 बैच आईएएस व उर्वशी गुलाटी जो कि 1975 बैच से ही राज्य की सचिव बनी थी। 

अहम पदों पर महिलाओं को नहीं है अपनाते 

केशनी बताती हैं कि ' जब मैं किसी इलाक़े का दौरा करने जाती थी,तो लोगों को लगता था कि डिप्टी कमिश्नर साहब की पत्नी आईं हैं। मुझे याद है लोग गांव के पटवारी से पूछते थे कि क्या डीसी साहब ने अपनी बेटी को काम पर लगा रखा है।' उनका मानना है कि महिलाओं को हमेशा अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता हैं। एक महिला अधिकार को हमेशा पुरुष अधिकारी को याद दिलानी पड़ता है कि वह भी एक अधिकारी है। उन्हें भी उसी तरह समझा जाए न कि महिला या पुरुष की तरह। 

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बेटियों को पढ़ाने के लिए दी प्रथामिकता 

जब उनकी बहन मीनाक्षी 10 वीं कक्षा में पढ़ती थी तो उनके रिश्तेदार हमशा घरवालों पर दबाव डालते थे कि वह लड़की की शादी करवा दें। उनकी मां ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए उन्हें हमें आगे पढ़ने लिखने के प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में पढ़ाई ही हमेशा काम आती हैं। 

पाकिस्तान से आकर भारत में बसा था परिवार 

भारत में रहने से पहले उनका परिवार पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहता था। बंटवारे के समय उनके पिता दिल्ली में आकर एक किराए के मकान में आकर रहने लग गए। तब उनकी बहन मीनाक्षी छोटी थी। उसके बाद पिता प्रोफ़ेसर जेसी आनंद अंबाला में जीएमएन कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर लग गए। उसके बाद केशनी व उर्वशी का जन्म हुआ।

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