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बार-बार हो जाता है Miscarriage तो हो सकते हैं ये 8 कारण

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 27 Aug, 2019 09:31 AM
बार-बार हो जाता है Miscarriage तो हो सकते हैं ये 8 कारण

मिसकैरेज एक ऐसा शब्द है जिसका असली मतलब सिर्फ वहीं औरतें जानती है जो इसे झेल चुकी हैं। कई बार कंसीव करने के बाद भी बार-बार गर्भपात होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ कारण महिला में गर्भपात की स्थिति पैदा करते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि ज्यादातर महिलाएं इनसे अंजान है। 

अगर कंसीव करने के बाद भी बार-बार गर्भपात हो जाता है तो आपको थोड़ी समझदारी दिखाने के जरूरत है और लक्षणों को पहचानकर मिसकैरेज का कारण जानने की। चलिए आज हम आपको कुछ कारण बताते हैं, जो बार-बार मिसकैरेज का खतरा पैदा करते हैं।

सबसे पहले हम आपको बताते हैं मिसकैरेज के लक्षण...

शुरूआती गर्भावस्था में कई महिलाओं को गर्भपात का देर से पता चलता है क्योंकि वो समझती हैं कि उनकी माहवारी देर से आई है।
-गर्भपात का सबसे पहला संकेत है ब्लीडिंग की समस्या, जिसके कारण योनि से खून के थक्के निकलने शुरू हो जाते हैं।
-प्रेगनेंसी के शुरूआती महीनों में पेट के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन हो डॉक्टर से चेकअप करवाएं क्योंकि यह गर्भपात का संकेत हो सकता है।
-ब्रेस्ट का कठोर होना भी गर्भपात का एक संकेत है।

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चलिए अब हम आपको बताते हैं कि बार-बार गर्भपात होने का क्या कारण हैं?

ज्यादा उम्र भी है कारण

कुछ महिलाएं काम या अन्य कारणों से 30 के बाद कंसीव करने की कोशिश करती हैं लेकिन इस एज के बाद प्रेगनेंसी कंसीव करने से गर्भपात का खतरा रहता है। शोध के अनुसार, जो महिलाएं 30 के बाद गर्भधारण करती हैं उनमें कंसीव करने में थोड़ा समय लगता है। जबकि 24 के बाद वह कंसीव जल्दी करती हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं सही समय में ही गर्भवती हो।

पीसीओडी

जब किसी महिला की ओवरी में हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है तो ओवरी सिस्ट बनाने लगती है। इससे ओवरी में हर महीने एग्स ज्यादा मात्रा में बनने लगते हैं, जिसे पीसीओडी कहा जाता है। सही समय पर इलाज न होने के कारण इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जो आपके गर्भधारण की क्षमता पर असर डालता है।

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क्रोमोसोमल असामान्यताएं

क्रोमोसोमल असामान्यताएं के कारण शरीर के गुणसूत्र की संरचना में परिवर्तन आ जाता है, जिसके कारण गर्भधारण के कुछ ही दिनों बाद गर्भपात हो जाता है। अगर किसी भी महिला में इस तरह की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बैक्टीरियल इंफेक्शन

अगर किसी महिला के प्रजनन अंगों में इंफेक्शन हो जाए तो इससे मिसकैरेज का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। माइकोप्लाज्मा होमिनिस और यूरीप्लास्मा यूरीलीटिकम दो ऐसे बैक्टीरिया है जो महिलाओं में मिसकैरेज का कारण बनते हैं। ऐसे में महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान अपना खास ख्याल रखना चाहिए।

गर्भाशय की असामान्यताएं

गर्भाशय की असामान्यताएं और असम्भव गर्भाशय ग्रीवा जैसे कि फाइब्रॉएड, इंफेक्शन, अलग गर्भाशय जैसी संरचनात्मक समस्या या मुड़ा हुआ गर्भाशय के कारण भी बार-बार मिसकैरेज होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। इसके अलावा गर्भाशय की कमजोर दीवारें भी इसके कारण हैं।

कमजोर सर्विक्स

इसके कारण भी महिलाओं में गर्भपात हो जाता है क्योंकि जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है, कमजोर सर्विक्स खुल सकती है। महिलाओं में यह समस्या जन्मजात, किसी चोट या ऑप्ररेशन के कारण हो सकती है। ऐसे में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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कमजोर बच्चेदानी

बहुत सी महिलाएं इस समस्या से अंजान होने के कारण समय पर इलाज नहीं करवा पाती, जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, कमोजरी के कारण यूट्रस अंडों को संभाल नहीं पाता, जिसके कारण गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

तनाव

गर्भवती महिलाओं के लिए तनाव हानिकारक होता है, जो गर्भपात का कारण भी बन सकता है। दरअसल, तनाव लेने पर मस्तिष्क से कॉर्टिकोट्रॉपिन हार्मोन का स्त्राव होता है, जो गर्भपात के लिए जिम्मेदार होता है।

बढ़ा हुआ वजन

बढ़ा हुआ वजन महिला के गर्भपात की भी वजह बनता है। ऐसा कई मामलों में देखा गया है कि अगर मोटी महिलाओं में गर्भ ठहर भी जाए तो  कुछ सप्ताह बाद उनका गर्भपात हो जाता है। इतना ही नहीं, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को डिलीवरी के वक्त भी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि मोटापे के ग्रस्त महिलाओं को ज्यादातर सी-सेक्शन का ही सहारा लेना पड़ता है।

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इसके अलावा खराब लाइफस्टाइल, प्रेगनेंसी के दौरान धूम्रपान या शराब, कैफीन पीने से भी मिसकैरेज हो सकता है। महिलाओं को चाहिए कि प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले ही वो लाइफस्टाइल में सुधार करें और सही डाइट लें। साथ ही अपनी रुटीन में एक्सरसाइज व योग को भी शामिल करें। इससे गर्भपात का खतरा कम होगा।

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