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यूट्रस कैंसर से पीड़ित महिला ने दिया बच्चे को जन्म

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 21 Feb, 2019 01:29 PM
यूट्रस कैंसर से पीड़ित महिला ने दिया बच्चे को जन्म

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तेजी से अपने पैर पसार रही है। महिलाएं ब्रेस्ट, सर्वाइकल और यूट्रस कैंसर की ज्यादातर शिकार हो रही हैं लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज ना किया जाए तो इस बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सकता है। इसी तरह ही यूट्रस कैंसर भी है अगर समय पर पहचान और सही इलाज हो, तो इससे खुद को बचाया जा सकता है। हाल ही में ऐसा एक मामला चेन्नई में सामने आया जिसमें महिला ने यूट्रस कैंसर के बावजूद बच्चे को जन्म दिया।
 

क्या होता है यूट्रस कैंसर

यूट्रस कैंसर बच्चेदानी में होता है इसलिए इस कैंसर की वजह से महिला मां नहीं बन पाती। शुरुआत में महिलाओं में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं जिसके कारण इसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे कैंसर का इलाज अगर समय पर शुरू हो जाए तो ना सिर्फ जान बच सकती है बल्कि मां बनना भी अब संभव होता है।

 

यूट्रस कैंसर से जुझते हुए दिया बच्चे को जन्म

5 साल पहले सुनैना को पता चला कि उन्हें स्टेज 2 का यूट्रस कैंसर हो गया है और इस वजह से डॉक्टरों को उनकी बच्चेदानी को ऑपरेट करके हटाना पड़ा था। हालांकि सर्जरी के दौरान ऑन्कोसर्जन को लगा कि सुनैना का एक अंडाशय सही है तो उन्होंने उसे नहीं हटाया और उसे सुनैना के पेट में ही रहने दिया और इसी का नतीजा है कि कैंसर की शिकार रह चुकी सुनैना मां बन पायी। 

 

लगातार प्रयास में डॉक्टरों को मिली सफलता 

डॉक्टरों के लगातार प्रयास को आखिरकार सफलता हासिल हो ही गई और सुनैना ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। सुनैना ने कैंसर का सामना किया। डॉक्टरों के कई प्रयास फेल हुए लेकिन सुनैना ने भी हार नहीं मानी। इसी वजह से सुनैना ने एक प्यारी बच्ची को जन्म दिया।

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हेल्दी बच्ची का हुआ जन्म 

कैंसर के इलाज के बाद भी मां बनना और बच्चे को जन्म देना अब मुमकिन हो गया है। सुनैना के केस के बाद हजारों महिलाओं को नई उम्मीद मिली है जो रैडिकल कैंसर थेरपी से गुजरती है और मां बनने की उम्मीद छोड़ चुकी होती है। यूट्रस कैंसर को फैलने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है सर्जरी।

 

महिलाओं में इस बीमारी का क्या कारण है?

गांवों में अधिक बच्चों से होने वाला बार-बार प्रसव और असुरक्षित यौन संबंध बीमारी की प्रमुख वजह है, जबकि शहरी क्षेत्र में बीमारी की जानकारी होने पर भी जागरूकता की कमी देखी गई है।

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साफ-सफाई का रखें खास ख्याल 

यूट्राइन कैंसर बच्चेदानी के मुख यानी सर्विक्स में होने वाला कैंसर है। यह बच्चेदानी के भीतरी व बाहरी किसी भी सतह पर हो सकता है। थोड़ी सी अवेयरनेस और सावधानी सर्वाइकल कैंसर से बचाव कर सकती है। हमेशा साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।

 

शारीरिक संबंध के समय सावधानी     

समय से पहले शारीरिक संबंध न बनाएं। यूट्राइन कैंसर यौन संबंध बनाने से भी होता है, इसलिए सेक्‍स संबंध बनाते वक्‍त कंडोम का प्रयोग कीजिए। यदि आप एक से अधिक पार्टनर से यौन संबंध बना रही हैं तब भी यह वायरस फैलने का खतरा बना रहता है, ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है।

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खानपान पर ध्‍यान दें

यूट्राइन कैंसर के फैलने के लिए खानपान भी बहुत हद तक जिम्‍मेदार होता है। यदि आपकी डायट चार्ट में ताजे फल और हरी सब्जियों की कमी है तो सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अपने आहार में स्‍वस्‍थ और ताजे फलों को शामिल कीजिए। साथ ही आहार में विटामिन युक्त भोजन को प्राथमिकता दें।

 

इन बातों का रखें खास ख्य़ाल

1. शारीरिक संबंध बनाते समय ज्यादा दर्द व ब्लीडिंग होने और पीरियड  के समय ज्यादा खून निकले तो इन बातों को हल्के में न लेकर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
2. पेशाब करने में दर्द, जलन होना, सफेद तरल पदार्थ का अत्यधिक मात्रा में रिसाव होना, कमर, पैरों में दर्द इत्यादि भी सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों में आते है।

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