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बच्चे की हकलाहट को दूर करेंगे ये आसान टिप्स

  • Edited By Sunita Rajput,
  • Updated: 24 Feb, 2019 04:15 PM
बच्चे की हकलाहट को दूर करेंगे ये आसान टिप्स

हालांकि छोटे बच्चों में हकलाने की समस्या बहुत गंभीर बात नहीं है, परन्तु इस कारण जब उनके दोस्त या खुद अभिभावक ही उसका मजाक उड़ाते हैं या फिर उसकी नकल करते हैं तो बच्चों में धीरे-धीरे हीनभावना आने लगती है। वह लोगों से मिलने-जुलने से कतराने तथा उदास व गुमसुम रहने लगता है। हकलाने वाले बच्चे एक ही अक्षर या शब्द को लंबा खींचते हैं, कोई वाक्य बोलते समय अचानक किसी अक्षर या शब्द पर अटक जाते हैं और उसे बार-बार बोलने की कोशिश करते हैं। अलग-अलग बच्चों में इसके लक्षण भी अलग-अलग होते हैं कोई बार-बार किसी शब्द पर अटक जाता हैं। कई बार सामान्य रूप से बातचीत करने वाले बच्चे या बड़े भी भय, शर्म, तनाव, निराश या आत्मविश्वास डगमगाने की स्थिति में हकलाने लगते हैं। ऐसा भी देखा गया है कि सामान्य, बातचीत में हकलाने वाला बच्चा किसी शब्द पर अटकता है परंतु कविता या गाना सुनाते वक्त उसी अक्षर या शब्द को बड़ी सहजता से बोल जाता है। 

 

क्यो होती हैं यह समस्या?

आमतौर पर हकलाहट चीन से पांच साल की उम्र में शुरू होती हैं, पांच से नौ साल के बच्चों में यह दोष धीरे-धीरे कम हो जाता है तथा 12-13 साल के बच्चों में बहुत कम पाया जाता है। इनमें भी 5 प्रतिशत बच्चे बिना किसी मदद या इलाज के अपने आप ठीक बोलने लगते हैं। यूं तो यह एक सामान्य दोष है और शुरूआती दौर में संभवतः बच्चे की भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ न होने के कारण भी हो सकता है या फिर असमंजस की स्थिति में उलझनों के कारण ऐसा हो सकता हैं क्योंकि बच्चा एक साथ अपने स्कूल, घर, मित्र मंडली, मां-बाप व शिक्षशों आदि की बातों में उलझा होता हैं, जिससे कई बार उसके बोलने की क्षमता प्रभावित होती है। 

 

कैसे दूर करें बच्चों की हकलाहट?

इस दोष का इलाज किसी दवा से नहीं किया जाता केवल स्पीच थैरेपिस्ट और मनोवैज्ञानिक ही इस समस्या का निदान कर सकते हैं। इससे सबसे पहले तो हकलाहट का कारण जानने की कोशिश की जाती है।

- बच्चे के मन में किसी प्रकार का भय हो तो उसे दूर करने की कोशिश होती हैं।

- उसके मन में आत्मविश्वास पैदा किया जाता और दिमाग से यह बात दूर करने के प्रयास किए जाते हैं कि उसके अंदर किसी प्रकार का दोष है।

- बच्चे को तनावमुक्त रखना ही मनोवैज्ञानिक और स्पीच थैरेपिस्ट का मुख्य उद्देश्य होता है। 

- स्पीच थैरेपिस्ट उन्हीं शब्दों या अक्षरों को बच्चे से बार-बार बुलवाता हैं, जिन्हें बोलने में उसे परेशानी होती हैं।

- ज्यों-ज्यों निरंतर अभ्यास के कारण बच्चे का उच्चारण सुधरता है, उसके मन में आत्मविश्वास आने लगता है। अधिकांश मामलों में सुधार स्पष्ट नजर आने लगता है। 

 

पेरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स

- पेरेंट्स को सदैव इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा भयभीत या तनावग्रस्त न रहे।

- यदि बच्चा हकलाता है तो उसका न स्वयं मजाक उड़ाएं और न ही किसी को मजाक बनाने दें। 

- बच्चे को ज्यादा बोलने के लिए प्रेरित करें। 

- बच्चे की मौजूदगी में उसके दोष के बारे में चर्चा करने से बचें।

- बच्चों को कहानी, कविता व गीत अदि सुनाने के लिए प्रेरित करें। 

- दूसरे बच्चों से तुलना करके उसे शर्मिंदा करने का प्रयास बिल्कुल न करें। 

- बच्चा कोई वाक्य बोलते वक्त अटकता हो तो धैर्य से उसकी बात सुनें और उसे ही अपना वाक्य पूरा करने दें, आप उस वाक्य को पूरा न करें। 


 

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