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राम नहीं, भारत के इन शहरों में रावण की होती है पूजा, दशहरे पर नहीं जलते पुतले

  • Edited By Harpreet,
  • Updated: 23 Oct, 2020 03:34 PM
राम नहीं, भारत के इन शहरों में रावण की होती है पूजा, दशहरे पर नहीं जलते पुतले

राम नवमी के बाद अब बाजारों में दशहरे को लेकर धूम मची हुई है। दशहरे पर रावण दहन की तैयारियां काफी दिन पहले से शुरु हो चुकी है। 7 से 8 दिनों तक चलने वाली रामलीला का अंत भगवान राम द्वारा रावण को जलाकर किया जाता है। जिसे आम भाषा में बुराई पर अच्छाई की जीत के जरिए बयान किया जाता है।

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मगर आज हम आपको भारत के उन शहरों के बारे में बताएंगे जहां रावण दहन की जगह उनकी पूजा करने की प्रथा है। जी हां, रावण को बल और बुद्धि दोनों का प्रतीक माना जाता है। जिस वजह से कई शहरों में रावण की पूजा की जाती है। आज हम यहां बात करेंगे उन्हीं खास शहरों के बारे में...

मंदसौर, मध्यप्रदेश

कहा जाता है कि मंदसौर रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था। ऐसे में यहां दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसकी पूजा की जाती है।

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कनार्टक

कनार्टक के ज्यादातर इलाकों में भी रावण की पूजा की जाती है। इसके अलावा कर्नाटक के मंडया जिले के मालवली नामक स्थान पर रावण का मंदिर बना हुआ है, जहां लोग पूरी श्रद्धा भाव के साथ जाकर पूजा करके खुद के लिए बल और बुद्धि की मांग करते हैं।

जोधपुर, राजस्थान

राजस्थान के जोधपुर में रावण का मंदिर है। ऐसा बताया जाता है कि जोधपुर में रावण के वंशज रहते हैं, जिस वजह से वे लोग रावण दहन में यकीन नहीं रखते बल्कि पूरे रीति-रिवाज के साथ रावण की पूजा करते हैं।

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बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में स्थित कांगड़ा कस्बे में भी रावण की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस जगह रावण ने भगवान शिव की भक्ति करके मोक्ष वरदान प्राप्त किया था। यहां के लोगों की ये मान्यता भी है कि अगर इस जगह पर रावण का दहन किया गया तो दहन करने वाले की जल्द मृत्यु हो जाएगी।

बिसरख, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर बना हुआ है और यहां पर रावण का पूजन होता है। इस गांव को रावण का ननिहाल माना जाता है, जिस वजह से यहां के लोग रावण का पुतला नहीं जलाते। बल्कि इस बात का विरोध करते हैं। 

उज्जैन, मध्य प्रदेश 

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के चिखली गांव में भी रावण का दहन नहीं किया जाता इसलिए इस गांव में दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाए पूजा की जाती है। इस गांव में रावण की एक बहुत ही विशाल मूर्ति भी स्थापित है।

 

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