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राकेश रोशन को हुआ गले का कैंसर, जानिए किन लोगों को है अधिक खतरा?

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 08 Jan, 2019 03:56 PM
राकेश रोशन को हुआ गले का कैंसर, जानिए किन लोगों को है अधिक खतरा?

हाल ही में ऋतिक रोशन ने अपने पिता राकेश रोशन के साथ एक फोटो शेयर करते हुए बताया कि उन्हें गले का कैंसर हो गया है। डायरेक्टर राकेश रोशन का कैंसर अभी शुरुआती स्टेज में है, जिसके लिए आज उनकी सर्जरी भी होने वाली है। गले का कैंसर की समस्या भी आजकल आम होती जा रहा हैं। चलिए आज हम आपको इस बीमारी के लक्षण, कारण और उपचार के बारे में बताते हैं।

 

क्या है गले का कैंसर?

इस कैंसर में असामान्य कोशिकाएं शरीर में दुगनी गति से फैलने लगती हैं, जिनपर नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है। थ्रोट कैंसर वॉयस बॉक्स, वोकल कॉर्ड और मुंह के अन्य हिस्सों जैसे टॉन्सिल्स में भी हो सकता है।

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किन लोगों को होता है अधिक खतरा?

पिछले कुछ सालों से गले के कैंसर के मामले बहुत बढ़ गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर वर्ष कैंसर के 1.4 करोड़ नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत में लगभग 7 लाख मौतें कैंसर से हो रही हैं, जिसमें 50% मामले लोगों को इसकी जानकारी ना होने, खराब जीवनशैली, तंबाकू और ओबेसिटी के होते हैं। गलत लाइफस्टाइल व खान-पान के चलते 20-25 वर्ष की आयु वाले लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

 

क्या हैं लक्षण?

गले के कैंसर के लक्षण आसानी से पकड़ में नहीं आते। ऐसे में इस बीमारी का कोई भी लक्षण पर तुरंत चेकअप करवाना चाहिए।

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आवाज में अचानक बदलाव आना
मूसड़ों में सूजन या दांतों में दर्द होना
गले में गांठें महसूस होना
मुंह में लगातार दर्द या खून निकलना
गले में जकडऩ या सांस लेने में तकलीफ
खाना खाने में परेशानी होना
लगातार थकान और नींद कम आना
मुंह के अंदर लाल, सफेद या गहरे रंग के पैचेज बनना
कान में तेज दर्द होना
कफ या कई बार रक्त के धब्बे दिखना
लगातार वजन कम होना

 

कैंसर के कारण

शराब व धूम्रपान का एक-साथ सेवन करने से इस कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। अल्‍कोहल और निकोटिन साथ में लेने से मैलिग्‍नेंट कोशिकाएं बढ़ जाती हैं, जो आगे चलकर इस कैंसर का कारण बनती हैं।

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धूम्रपान करने वाले लोगों में मुंह व गले का कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। बीड़ी इस मामले में सिगरेट के मुकाबले कहीं ज्यादा नुकसानदेह है।

तम्‍बाकू के अधिक सेवन से भी इस कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। दरसअल, इससे श्‍वास नली की कार्य प्रणाली पर उल्टा असर पड़ता है, जिससे लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं।

गुटखा, पान मसाला और खैनी आदि के सेवन से भी यह कैंसर हो सकता है। ऐसे में इसका सेवन करने से बचें।

गलत लाइफस्टाइल व खान-पान की आदतें भी इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देती है। ऐसे में इस कैंसर से बचने के लिए स्वस्थ जीनवशैली अपनाएं और रोजाना एक्सरसाइज करें।

प्रदूषित हवा, डस्‍ट, वुड डस्‍ट, कैमिकल डस्‍ट और रोड डस्‍ट के कण भी इस कैंसर का कारण बन सकते हैं। वातावरण में मौजूद सल्‍फर डाई ऑक्‍साइड, क्रोनियम और आर्सेनिक भी कैंसर की आशंका को बढ़ाते हैं।

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उपचार

इसका इलाज रोगी की कैंसर अवस्था पर निर्भर करता है। अगर कैंसर फर्स्ट स्टेज पर है तो इसे सर्जरी द्वारा ठीक किया जा सकता है लेकिन अगर कैंसर दूसरी या तीसरी स्टेज पर हो तो रोगी को कीमोथेरपी चिकित्सा सर्जरी दी जाती है। हांलाकि कीमोथेरपी से कैंसर ठीक हो सकता है या नहीं इसकी संभावना नहीं होती है।

 

बचाव के तरीके

तंबाकू और शराब से दूरी

इस कैंसर से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि धूम्रपान, तंबाकू, शराब व सिगरेट से दूर बनाएं। इसके अलावा पान-मसाला और कच्ची सुपारी का सेवन भी बंद कर दें क्योंकि नशीली पदार्थ के सेवन से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

 

फाइबर व विटामिन युक्‍त आहार

गले के कैंसर से बचने के लिए खान-पान की आदतों में सुधार लाएं। डाइट में भोजन में फाइबर, विटामिन सी और बी से भरपूर चीजें जैसे- गाजर, आंवला, अमरूद, नींबू व हरी सब्जियों को शामिल करें। एक शोध के अनुसार विटामिन सी व बी युक्त चीजों का सेवन इस कैंसर के खते को काफी हद तक कम कर देता है।

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मोटापे पर करें कंट्रोल

मोटे लोगों को इस कैंसर के होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में इस कैंसर से बचने के लिए वजन को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए ज्यादा तले, भुने, मिर्च-मसाले युक्त आहार और चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें। इसके अलावा नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।

 

40 साल की उम्र के बाद करवाएं जांच

40 साल की उम्र के बाद हर 2 महीने बाद इस कैंसर की जांच करवाएं। इसके अलावा अगर आपको इस कैंसर का कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चेकअप करवाएं क्योंकि समय पर इस बीमारी का पता चलने पर रोगी की जान बचाई जा सकती है।

 

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