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प्रेग्नेंसी की कई परेशानियों से राहत दिलाता है 'प्रीनेटल योग'

प्रेग्नेंसी की कई परेशानियों से राहत दिलाता है 'प्रीनेटल योग'
Views:- Wednesday, December 5, 2018-5:42 PM

प्रेग्नेंसी के दौरान योग करने से जच्‍चा और बच्‍चा दोनों स्‍वस्‍थ रहते हैं। इस अवस्था में मन की शांति बनाए रखना बहुत जरूरी है, कोई मानसिक परेशानी नहीं होगी तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होगा। इस समय कमर दर्द, कब्ज, उल्टी, जी मिचलाना आदि जैसी परेशानियां होना आम बात है, ऐसे में प्री नेटल योग करने से शरीर क्रियाशील रहता है। आइए प्रेग्नेंसी में प्री-नेटल योग करने के फायदे।  

क्या है प्रीनेटल योग?

गर्भावस्था में हार्मोंस में बहुत तेजी से बदलाव आना शुरू हो जाता है। जिस कारण थकान के साथ-साथ सेहत संबंधी कई परेशानियां आनी शुरू हो जाती हैं। प्री-नेटल योग में आसन की आसान विधि और मुद्राएं कराई जाती हैं। जिससे मां और उसके होने वाले बच्चे को बहुत फायदा मिलता है। शरीर में रक्त संचार बेहतर तरीके से चलने के साथ-साथ,सिर दर्द, मॉर्निंग सिकनेस से भी बहुत राहत मिलती है। 

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किस महीने से करें प्रीनेटल योग की शुरुआत

प्रेग्नेंसी के शुरूआती तीन महीनों में एक्सरसाइज या योग नहीं करना चाहिए। चौथे महीने में योग करना प्रेग्नेंसी में सही माना जाता है। इसमें इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि मुद्राएं सिर्फ वही करें जिसमें प्रक्रियाओं को बार-बार दोहराना न पड़े और पेट पर भार न पड़े। वैसे, आप किसी भी योग को करने से पहले अपनी डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।

ये योगासन है बेस्ट 

गर्भावस्था में योग करने के प्रसव के बाद जल्दी ठीक होने में भी मदद मिलती है। आप स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से 1 या 2 ऐसे आसन चुन सकती हैं, जो आप करने में सावधानी महसूस करें। ताड़ासन, सुखासन, कोनासन, वज्रासन, त्रिकोणासन, तितली आसन, वीरभद्रासन, विपरीतकर्णी, पश्चिमोत्तानासन और शवासन बेस्ट हैं। आप सावधानिपूर्वक इनसे फायदा ले सकती हैं। 

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न करें ये योग

हर तरह का योगासन प्रेग्नेंसी में फायदेमंद नहीं है। कुछ योग मुद्राएं सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं जैसे नौकासन, विपरीत शलभासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, चक्रासन, भुजंगासन, हलासन आदि। इन आसनों से आपकी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है।

प्रेग्नेंसी में योग करते समय इन बातों का रखें खास ख्याल 

इस समय शरीर में पानी की कमी न होने दें, दिन में कम से कम 10 से 12 गिलास पानी जरूर पीएं। 
प्रेग्नेंसी में योग करते समय कभी भी पेट के बल लेटने की गलती न करें। 
योग के वे मुद्राएं न करें जिसमें बार-बार सांस रोककर रखना पड़े। 
सिर के बल खड़े होकर की कई मुद्राएं नुकसानदायक हैं। 
किसी आसन को करने समय कठिनाई हो रही हो तो उसी समय योग करना बंद कर दें। 

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योग से होने वाले फायदे

तनाव से राहत

योग मुद्राएं करने से मानसिक परेशानी से राहत मिलती है। जो मां और बच्चे की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हेल्दी प्रेग्नेंसी चाहते हैं तो योग जरूर करें। 

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बॉडी का शेप मेंटेन

योग करने से पोस्ट प्रेग्नेंसी के बाद बॉडी का शेप जल्दी मेंटेन करने में भी मदद मिलती है। इससे फ्लेक्सिबिलिटी भी बनी रहती है। 

नॉर्मल डिलीवरी के बढ़ते हैं चांस

योग करने से सीजेरियन डिलीवरी का खतरा काफी हद तक टल जाता है और नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ने लगते हैं। अगर डॉक्टर योग करने से मना करे तो इसे न करें। 

पीठ दर्द और सूजन से आाराम

प्रेग्नेंसी में जिन महिलाओं की पीठ में हमेशा दर्द, पैरों में सूजन या क्रैंप्स पड़ते हैं उन्हें योग करने से बहुत फायदा मिलता है।

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भ्रूण के विकास में फायदेमंद

बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास अगर सही तरीके से होगा तो बाद में भी उसकी सेहत अच्छी रहेगी। योग से जरिए बच्चे का विकास बढ़िया तरीके से होता है। 
 


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