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मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ शुरू किया ऐसा काम, लाखों में है कमाई!

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ शुरू किया ऐसा काम, लाखों में है कमाई!
Views:- Thursday, August 9, 2018-2:04 PM

महिलाएं चाहे जितना भी पढ़ लिख जाए लेकिन अपने जन्म भूमि के साथ हमेशा ही उनका लगाव जुड़ा रहता है। उस क्षेत्र को तरक्की के राह पर आगे बढ़ाने के लिए औरते कई प्रयास भी करती हैं। आज हम जिस महिला की बात कर रहे हैं, उनका नाम है प्राजक्ता अदमाने। जो महाराष्ट्र के एक आदिवासी जिले गड़चिरोली से संबंध रखती है। यह एक नक्सली इलाका है। इसके बावजूद भी प्राजक्ता ने फार्मेसी और एमबीए में अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसे पूणे में अच्छी नौकरी भी मिली लेकिन वह इसने उसे संतुष्टि नहीं दी।  

 

वह अपने गांव को बेहतर तरीके से मशहूर करना चाहती थी। इसी सोच के साथ मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी छोड़ अपने जिले में आ गई और मधुमक्खी पालक (बी-कीपर) के रूप में काम करने लगी। कुदरती प्रक्रिया से शहद बनाना शुरू किया और आज वह 7 लाख रूपय सलाना कमा रही है। 

 

एबीपी माझा के एक इंटरव्यू में प्राजक्ता ने बताया कि यह बिजनेस शुरू करने से पहले जाना कि मधुमक्खी पालन से पहले प्रशिक्षण करना बहुत जरूरी है। इसके लिए पहले मधुमक्खी बोर्ड से प्रशिक्षण लिया, कश्मीर से लेकर आंध्रा प्रदेश तक मधुमक्खी पालकों से जुड़ गई। प्राजक्ता ने इस व्यवसाय से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज को बारीकी से सीखा। 

 

प्राजक्ता ने फूलों की प्रजातियों से प्रेरणा लेकर अलग-अलग फ्लेवर का शहद बनाना शुरू किया। जिसमें नीलगिरी,लिची, तुलसी, सूरजमुखी आदि कई तरह के फूल शामिल हैं। शहद की अलग-अलग किस्में सेहत को अलग-अलग तरह के फायदे भी पहुंचाती हैं। डायबिटीज के लिए बेरी, दिल के लिए शीशम, खांसी और ठंड़ लगने पर नीलगीरी के फूलों से बना शहद बहुत लाभकारी है। 

 

अब वह अपने गांव के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को भी इसका पालन सीखा रही है। जिससे लोग अपने पैरों पर खड़े हो सकें। प्राजक्ता का यह बिजनेस ‘कस्तूरी शहद’ के नाम से मशहूर है और शहद की बोतल की कीमत 60 रूपय से लेकर 380 रूपय तक है। 


 


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