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मिशन चंद्रयान 2ः भारत की इन दो महिलाओं ने रच दिया इतिहास

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 23 Jul, 2019 12:32 PM
मिशन चंद्रयान 2ः भारत की इन दो महिलाओं ने रच दिया इतिहास

 देश के हर व्यक्ति की नजर सोमवार को लांच हुए चंद्रयान 2 पर टिकी रही । चांद पर पहुंच कर जिस तरह से इस यान ने एक नया इतिहास रच रहा है उसी तरह भारत की महिलाएं भी लगातार नए इतिहास रच रही है। चंद्रयान 2 के माध्यम से भारत अपनी कामयाबी का नया इतिहास रच रहा है, वहीं इस मिशन की सारी कमान दो महिलाओं ने हाथ में रही है। इन महिलाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया की भारत की नारी शक्ति किसी से भी कम नही है। इससे पहले भी साइंस क्षेत्र से जुड़ी कई महिलाओं ने विभिन्न अभियानों या मिशन से जुड़ कर नारी शक्ति के उदाहरण को पेश किया था। 

इसरो में 20 से 30, नासा में 15 फीसदी महिलाएं अभियान से जुड़ी

रिपोर्ट के अनुसार नासा एजेंसी में कुल 17 219 लोग काम करते है जिसमें से 5 हजार महिलाएं है, यानि की 30 फीसदी महिलाएं वहां पर काम करती हैं। इतना ही नही इसमें से 15 फीसदी महिलाएं नासा के विभिन्न ग्रहीय अभियानों के साथ जुड़ी हुई हैं। वहीं इसरो की बात करें तो इसरो में 17 हजार लोग काम करते है जिसमें से 20 फीसदी महिलाएं है यानि की 3500 के करीब महिलाएं। इसमें से 20 से 30 फीसदी महिलाओं ने ग्रहीय अभियानों में अपनी भूमिका निभाई हैं। 

चंद्रयान 2  मिशन से जुड़ी महिलाएं 

रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया: रितु करिधल 

लखनऊ की रहने वाली रितु ने इंडियन इंस्टिट्यूट से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स की हैं। रितु रॉकेट वुमेन ऑफ इंडिया के नाम भी जानी जाती हैं। इस मिशन में उनका काम चंद्रयान 2 के ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद शुरु हुआ है।जिसमें उनकी टीम यान को सफलतापूर्वक उतारने के लिए जरुरी फैसले लेगी। जिसमें रितु व उनकी टीम का पूरा सहयोग रहेगा। इन्हें 2007 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों से इसरो यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड भी मिल चुका हैं।उनका सबसे महत्वपूर्ण मिशन मार्स ऑर्बिटर रहा हैं। इसमें वह डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर की भूमिका निभा चुकी हैं। 

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बेस्ट वुमन साइंटिस्ट : एम विनीता 

 इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इंजीनियर एम वनीता को इस मिशन में 18 महीने पहले ही प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह एसोसिएट डायरेक्टर के पद पर रह कर काम कर रही थी। सालो से वह सेटेलाइट डिजाइनिंग पर काम करती रही है। इससे पहले वह कई सेटेलाइट प्रोजेक्ट्स को लीड कर चुकी हैं। जिसमें कार्टोसैट 1, ओशनसेट 2, मेघा ट्रोपिक रिमोट, सेंसिंग उपग्रहों के लिए डाटा सिस्टम तैयार करना शामिल  हैं। इस मिशन में एसोसिएट डायरेक्टर के पद के साथ उन्होंने मशीनों व बाकी उपकरणों की असेम्बलिंग का काम देखा हैं।   2006 में उन्हे एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से बेस्ट वुमन साइंटिस्ट का अवॉर्ड मिल चुका हैं। 2019 में इंटरनेशनल साइंस जर्नल की ओर से सबसे प्रॉमिसिंग वैज्ञानिकों की लिस्ट में एम वनीता भी शामिल हैं। 

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