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मां-बाप संभालना सिर्फ बेटे की ही जिम्मेदारी नहीं, बेटी का भी बनता है कर्तव्य

मां-बाप संभालना सिर्फ बेटे की ही जिम्मेदारी नहीं, बेटी का भी बनता है कर्तव्य
Views:- Thursday, July 12, 2018-5:23 PM

लड़का हो या फिर लड़की, मां-बाप के लिए उसकी सभी संताने एक जैसी होती हैं। दोनों की परवरिश में वे किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ते। वहीं, जब बूढ़े मां-बाप की देखभाल करने की बात आती है तो बच्चे इससे बचने के लिए कोई न कोई बहाना बनाते हैं। कुछ लोग इस बात को कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं कि बेटी की शादी हो गई है, वह मां-बाप का ख्याल कैसे रख सकती है?  दूसरी तरफ देखा जाए तो माता-पिता अपने हर बच्चे की ख्वाहिश पूरी करने में अपनी पूरी उम्र बिता देते हैं, फिर बेटा-बेटी में मां-बाप की जिम्मेदारियों को लेकर यह फर्क कैसे हो सकता है। 

 


साल 2016 में पेरेट्स की मेंटेनस को लेकर मुंबई हाईकोर्ट द्वारा एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था। जिसमें विवाहित बेटी द्वारा मां-बाप की देखरेख को लेकर जिम्मेदार ठहराया गया था। इसमें कहा गया था कि यहां बात अधिकारों की नहीं बल्कि कर्तव्यों की है। सिर्फ पति और ससुराल परिवार ही नहीं, उसके मां-बाप भी यह उम्मीद रखते कि बेटी भी उनके बुढ़ापे का सहारा बने। 

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वसंत बनाम गोविंदराव उपसराव नाइक के इस केस में मुंबई हाईकोर्ट ने इस पूर्व-अनुमानित धारणा को खारिज कर दिया था कि विवाहित बेटी के पास सिर्फ अपने पति और ससुराल परिवार का दायित्व है, न की अपने माता-पिता का।  मुंबई हाईकोर्ट में यह भी कहा गया कि एक विवाहित बेटी को भी अपने माता-पिता की जिम्मेदारियों को सांझा करना चाहिए। 

 


इस फैसले के साथ समाज को बहुत-सी पुरानी धारणाएं खत्म करने में मदद मिल सकती है। जैसे इस तरह वह लड़कियों को भी शिक्षित करने में ध्यान लगाएंगे। उन्हें इस बात की उम्मीद होगी कि बेटी भी बेटे की तरह उनका ख्याल रखेगी। पराया धन होने के नाते जिम्मेदारियों को निभाएगी।


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इससे समाज की सोच बदलेगी कि शादी के बाद पति के परिवार की तरफ बहू की जितनी जिम्मेदारी बनती है, उतनी ही वह अपने खुद के माता-पिता की देखभाल करने की जिम्मेदार है। चाहे उसकी शादी ही क्यों न हो गई हो। शादी का यह मतलब बिल्कुल भी नही कि ससुराल के मिलने उसे अपने पेरेट्स को छोड़ देना चाहिए। 

 


यह निर्णय महिलाओं को अपने साथ-साथ माता-पिता को भी फाइनेशियल रूप से स्ट्रांग बनाने की सोच के रूप में सामने आएगा। इससे भ्रूण हत्या,दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने में मदद मिलेगी।

 


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