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शिशु को चूमने से निमोनिया का खतरा, नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 07 Apr, 2019 01:00 PM
शिशु को चूमने से निमोनिया का खतरा, नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी

छोटे बच्चे सभी को प्यारे लगते हैं और हर कोई उन्हें बाहों में भर कर प्यार करना चाहता है, चूमना चाहता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवजात बच्चें को चूमकर आप उसे नुकसान पहुंचा रहे हैं। असल में, जब आप किसी बच्चे को चूमते हैं तो आपके किटाणु उनके शरीर में चले जाते हैं जिससे वह वायरल इंफेक्शन का शिकार हो सकते हैं। कई बार पेरेंट्स इसे साधारण बात समझ कर गंभीरता से नहीं लेते जिससे बच्चों के लीवर, किडनी और दिमागी स्वास्थ पर भी असर पड़ता है। आइए जानते हैं कि नवजात बच्चे को चूमने से उन्हें कौन सी बीमारियां हो सकती है-

 

नवजात बच्चे के लिए हानिकारक

एक्सपर्टस मानते हैं कि एचएसवी नामक इंफेक्शन ज्यादातर व्यस्क लोगों में पाया जाता है लेकिन बड़े लोगों की इम्युनिटी स्ट्रोंग होती है इसलिए इस तरह के वायरस उन पर ज्यादा असर नहीं डालते लेकिन नवजात बच्चें का शरीर अभी विकास कर रहा होता है जिससे यह इंफेक्शन बच्चे के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

 

जानलेवा इंफेक्शन

एक महिला को अपने 3 महीने के नवजात बच्चे को मुंह के घावों से पीड़ित होने के कारण अस्पताल में भरती करवाना पड़ा। महिला का कहना है कि हर कोई उनके बच्चे को चूमता था जिससे कुछ दिनों के बाद ही उनके बच्चे की हालत बिगड़ने लगी थी। ये इन्फेक्शन इतना तेज़ था कि अगर बच्चे को हॉस्पिटल न ले जाया जाता तो इसके कारण बच्चे के लीवर और दिमाग पर बुरा असर हो सकता था। डॉक्टर्स का मानना है कि ऐसी हालत मे बच्चे को जान का खतरा भी हो सकता है।

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निमोनिया का खतरा

मौसम के बदलाव के कारण वायरल इंफेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा होता है जैसे फ्लू, सर्दी और खांसी आदि। ऐसे में आप बच्चों को चूमकर RSV पास कर सकते हैं। आरएसवी नवजात में ब्रोंकियोलाइटिस का प्रमुख कारण है जिससे निमोनिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। नवजात बच्चों के लिए निमोनिया एक बहुत बड़ा रोग है।

 

दाद सिंप्लेक्स इंफेक्शन का डर

इस वायरस की वजह से इंफेक्शन घाव में बदल जाता है, जो ज्यादातर मुंह के आसपास या जननांगो पर होता है। जब आप इंफेक्शन आपसे शिश के मुंह में जाता है तो इसे ओरल हर्पीज कहा जाता है। एचएसवी नवजात बच्चे को सिर्फ चुंबन से ही फैलता है। घाव के खुले होने पर ये और तेजी से फैल सकता है। 

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ऐसा इंफेक्शन होने पर बच्चे में इस तरह के लक्षण दिखने शुरु हो जाते है जैसे-

दूध पीने से मना करना
बुखार आना
ऊंची आवाज़ में रोना
सांस लेने में तकलीफ
तेजी से सांस लेना
नीली जीभ और स्किन

ऐसे इंफेक्शन में ज्यादातर नवजात बच्चे की आंखो, मुंह या स्किन पर ही इफेक्ट पड़ता है लेकिन अगर यह दूसरे अंगो तक फैलता हो, प्रॉब्लम बहुत बढ़ सकती है। एक शोध के मुताबिक, इस तरह के इंफेक्सन की वजह से लगभग एक तिहाई शिशुओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में यह बात जाहिर है कि जितना हो सके बच्चें को कम चुमना चाहिए और अगर कोई बाहर का आकर ऐसा करता है तो उसे भी रोकना चाहिए।


 

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