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मुक्केबाजी में सिल्वर जीत मंजू ने रचा इतिहास, आसान नहीं था यहां तक पहुंचने का सफर

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 14 Oct, 2019 12:12 PM
मुक्केबाजी में सिल्वर जीत मंजू ने रचा इतिहास, आसान नहीं था यहां तक पहुंचने का सफर

भारतीय मुक्केबाज मंजू रानी ने रुस में हुए 'महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप' में 48 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल नया इतिहास रच दिया गया है।  पिछले 18 सालों में 19 साल की मंजू ऐसी दूसरी मुक्केबाज है जो अपने पहले ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल में पहुंच गई है। इससे पहले 2001 में मैरी कॉम ने यह उपलब्धि हासिल की थी। 

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हरियाणा की इस बेटी ने 45-48 किलोग्राम वर्ग में शनिवार को थाईलैंड की चुकमत रकसत को 4-1 से हरा कर फाइनल में जगह बनाई थी।

कैंसर से हुई थी पिता की मृत्यु 

मंजू के पिता भीम सेन सीमा सुरक्षा बल में हवलदार थे। 9 साल पहले 2010 में पेट के कैंसर के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी। ऐसे में मां इशवंती देवी ने पति की मुट्ठी भर मिलने वाली पेंशन के पैसों से ही मंजू व उनके 4 भाई-बहनों का लालन पालन किया । पिता की मृत्यु के बाद मंजू ने इस सदमे से बाहर निकलने के लिए बॉक्सिंग ग्लव्स पहन लिए थे। बॉक्सिंग से पहले मंजू कबड्डी खेलती थी। 

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पिता के दोस्त साहब सिंह ने करवाई थी शुरुआत

मंजू के पिता के दोस्त, साहब सिंह ने गांव के बच्चों को दौड़ने के लिए अपने खेत के आसपास की जमीन एथलेटिक ट्रैक के रुप में दे दी थी। उसके बाद उन्होंने मुक्केबाजी की वीडियो देखकर मंजू के साथ गांव की 20 लड़कियों को मुक्केबाजी के लिए आश्वस्त किया। 2012 में मंजू का करियर पूरी तरह से बदल गया जब कोच सूबे सिंह बेनीवाल ने रोहतक में एक बार उन्हें मिट्टी के गड्ढे में प्रशिक्षण करते हुए देखा। उसके बाद उन्होंने खुद मंजू को प्रशिक्षण देना शुरु किया।

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जीत चुकी हैं यह पदक 

इससे पहले मंजू रानी ने स्ट्रांजा मेमोरियल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर, इंडिया ओपन में कांस्य, थाईलैंड ओपन में कांस्य पदक जीत चुकी है।
 

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