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बढ़ते प्रदूषण में तेजी से फैलता 'लंग्स इन्फेक्शन', 6 टिप्स करेंगे फेफड़ों का बचाव

बढ़ते प्रदूषण में तेजी से फैलता 'लंग्स इन्फेक्शन', 6 टिप्स करेंगे फेफड़ों का बचाव
Views:- Friday, November 16, 2018-6:46 PM

जब हवा में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस या फंगस सांस द्वारा व्यक्ति के फेफड़ों में पहुंच कर विकसित होना शुरू कर देें तो फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है। इस अवस्था को लंग इन्फेक्शन कहा जाता है। फेफड़ों में हवा की छोटी-छोटी थैलियां यानी एयर सैक (Air sacs) में इन्फेक्शन की वजह से द्रव भर जाता है और सांस लेने पर फेफड़ों में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं। इससे टीवी के अलावा और भी कई तरह की गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं। 

 

1. किन लोगों को लंग इन्फेक्शन का ज्यादा खतरा
जो लोग पहले फेफड़ों की इन्फेक्शन का शिकार हो चुके हैं, उन्हें दोबारा भी इस तरह की परेशानी हो सकती हैं। इसके अलावा प्रदूषण भी इसकी बड़ी वजह है। 

- फैक्ट्रियों के नजदीक रहने वाले लोग
फैक्ट्री से निकलने वाला प्रदूषित धुआं सांस के जरिए जब फेफड़ों तक पहुंचता है तो इन्फेक्शन पैदा करता है। जिन लोगों को अस्थमा की परेशानी रहती है, उन्हें वायु प्रदूषण से खुद को बचा कर रखना चाहिए। 

- स्मोकिंग 
धूम्रपान करने वाले लोग बहुत जल्दी फेफड़ों की इन्फेक्शन का शिकार हो जाते हैं। किसी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान करने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आने से भी लंग इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। 

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- गंदे पानी का सेवन
पेय पदार्थों में गंदगी भी इन्फेक्शन का कारण बनती है। पानी के बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंच कर सांस लेने की दिक्कत पैदा करते हैं। 
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- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता
शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी संक्रमण की वजह है। बैलेंस डाइट न लेने के कारण प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इस तरह शरीर जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाता है। 

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- आस-पास की गंदगी
घर या आसपास की गंदगी भी इन्फेक्शन का कारण है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। 

2. लंग इन्फेक्शन के लक्षण

- खांसी 

दो हफ्ते से ज्यादा खांसी रहे तो इसे नजरअंदाज न करें। यह टीबी का लक्षण हो सकता है। कई बार बलगम का रंग भी गाढ़ा हो जाता है और अगर इससे बदबू आने लगे तो सतर्क हो जाएं। 

- सांस फूलना 
हल्का-फुल्का काम करने या थोड़ा-सा चलने पर भी सांस फूलना, थकावट महसूस करना और लगातार कमजोरी का बना रहना लंग इन्फेक्शन का कारण हो सकता है। 

- मांसपेशियों में दर्द 
इस रोगी को मांसपेशियों में दर्द भी महसूस होता है। कई बार दर्द पीठ तक पहुंच जाता है, जिससे बैठने या खड़े होने में भी बहुत ज्यादा तकलीफ होती है। 

- सांसें तेज होना
अस्थमा के रोगी भी इन्फेक्शन का जल्दी शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा बिना काम किए बैठे-बैठे सांस तेज होना और सांस लेने में परेशानी पैदा होना इसके लक्षण हैं। 

- तेज बुखार
अगर कई दिन तेज बुखार बना रहे तो इसे नजरअंदाज न करके डॉक्टरी जांच जरूर करवाएं। 

- सिरदर्द 
फेफड़ों की इन्फेक्शन में सिर दर्द भी होने लगता है। बाकी लक्षणों के साथ सिर में भी दर्द महसूस हो तो सेहत पर ध्यान दें। टीबी के टेस्ट करवाएं। 

- गले में दर्द 
इस तरह की इन्फेक्शन में गले में दर्द भी हो सकता है। खांसी और बलगम के साथ इस तरह की स्थिति दिखाई दे तो सतर्क हो जाएं। 
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- छाती में दर्द होना
बार-बार खांसी होने पर छाती में तेज दर्द होना फेफड़ों में इन्फेक्शन का संकेत है। 

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3. फेफड़ों को स्वस्थ रखने के उपाय
फेफड़ों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सबसे पहले खुद की साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी है। बिना हाथ धोए कुछ भी न खाएं, गंदे हाथों से बैक्टीरिया मुंह में चले जाते हैं, जो इन्फेक्शन बढ़ाने का काम करते हैं। 

- योग और एक्सरसाइज
रोजाना सुबह के समय अनुलोम-विलोम जरूर करें। इसके अलावा डीप ब्रेद योगा करने से फेफड़ों तक स्वच्छ हवा पहुंचती है। इससे श्वसन प्रणाली मजबूत होने लगती है और इन्फेक्शन से बचाव होता है। 
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- पानी पिएं
गर्मी हो या सर्दी, शरीर में पानी की कमी न होने दें, लेकिन स्वच्छ पानी का सेवन करें। पानी से फेफड़े हाइड्रेट होते हैं और गंदगी बाहर निकल जाती है। 

- पौष्टिक खाना खाएं
काले चने, सूप, अंडे, चिकन, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, ब्रोकली, सूखे मेवे आदि अपने आहार में शामिल करें। भूखा न रहें। 

- अखरोट
रोजाना अखरोट खाएं, इसका सेवन फेफड़ों के लिए उपयोगी होता है।
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- ब्रोकली
विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर ब्रोकली खाने से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं, इसलिए इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
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- शहद
रोजाना सुबह लगातार 2 महीने 1 चम्‍मच शहद का सेवन करें। इससे फेफड़े मजबूत बनते हैं। 
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