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रूढ़िवादी सोच को बदल मिताली ने बनाए कई रिकॉर्ड, जल्द ही बनेगी बायोपिक

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 04 Dec, 2019 10:54 AM
रूढ़िवादी सोच को बदल मिताली ने बनाए कई रिकॉर्ड, जल्द ही बनेगी बायोपिक

क्रिकेट यानि की पुरुष टीम। सभी को लगता है कि पुरुष बेहतर तरीके से क्रिकेट खेलते है लेकिन लोगो की इस सोच को बदला भारतीय महिला क्रिकेट की टीम ने। वहीं जब बात महिला क्रिकेटरों की आती है तो सबसे मिताली राज का ही नाम लिया जाता है। मिताली ने 20 साल का क्रिकेट करियर अनेक उपलब्धियों से भरा हुआ है। एक दिवसीय मैचों में 6 हजार से अधिक रन बनाने वाली विश्व की पहली महिला क्रिकेटर से लेकर लगातार 7 हाफ सैंचुरी लगाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। दाएं हाथ से बल्लेबाजी करने वाली मिताली राज को महिला क्रिकेट का सचिन तेंदुलकर कहा जाता है। वहीं अब उनके जीवन पर बायोपिक ' शाबाश मिथु' बन रही है। जिसमें मुख्य किरदार तापसी पन्नू निभा रही है। 


6 साल में शुरु किया था क्रिकेट

पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी मिताली की सफलता के पीछे उनके सालों की मेहनत और संघर्ष छिपा हुआ है। मिताली का जन्म 3 दिसंबर 1982 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। वह 6 साल की थीं जब अपने भाई मिथुन के साथ खेल के मैदान में जाती थीं। मिथुन क्रिकेट सीखते थे। तब अक्सर कोच ज्योति प्रसाद खाली समय में नन्ही मिताली के साथ क्रिकेट खेला करते थे। उन्होंने ही मिताली में क्रिकेट खेलने की प्रतिभा को पहचाना और माता- पिता को उन्हें क्रिकेट सिखाने की सलाह दी थी। वह उनकी देखरेख में 6 साल तक ट्रेनिंग लेती रहीं। 

 

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क्रिकेट के खिलाफ था परिवार 

करीब 10 साल की उम्र में उन्हें राज्य के सब जूनियर टूर्नानेंट में चुना गया परंतु उनके परिवार के कई सदस्यों को उनका क्रिकेट खेलना पसंद नहीं था। उन्हें एक्सर इसे लेकर बातें सुननी पड़ती थीं। उनके दादा-दादी उसके खेलने के पसंद नहीं कर रहे थे। तब उनके पेरेंट्स ने उनका साथ दिया। 


17 साल में भारतीय टीम में हुई शामिल 

17 साल की उम्र में वह भारतीय टीम के लिए चुनी गई। तब देश में महिला क्रिकेट को अधिक महत्व नहीं दिया जा रहा था और उन्हें एक खिलाड़ी को मिलने वाली आधारभूत सुविधाएं भी नहीं मिलती थी। 

 

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शुरुआती दिनों ने मानसिक तौर पर किया मजबूत 

वह मानती हैं कि करियर के शुरुआती दिनों के संघर्ष ने उन्हें मानसिक तौर पर काफी मजबूत बनाया। इन सीखों से आगे के जीवन में मिली कठिनाइयों का सामना करना आसान हो गया। कई बार जीत मिली तो कई बार हार परंतु मिताली ने खुद को कमजोर नहीं होने दिया। वह मानती है ऐसे संघर्षों ने उन्हें कठिन समय का सामना करने के लायक बनाया है। 

डांस की थी दीवानी 

अपनी गेंदबाजी से दुनियाभर के गेंदबाजों की लय खराब करने वाली मिताली बचपन में डांस की दीवानी थी। मिताली ने महिला टीम में रहते हुए वह कमाल किए है जो पुरुष खिलाड़ी भी नहीं कर पाए है। 

 

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वर्ल्ड कप पर है फोकस 

हाल ही में मिताली ने 20-20 क्रिकेट से सन्यास ले लिया है क्योंकि अब उनका फोकस 2021 में होने वाले महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप पर है। उनका कहना है कि, मैंने 2006 से भारत का टी 20 में प्रतिनिधित्व किया है और अब मैं सन्यास लेना चाहती हूं ताकि 2021 के वर्ल्ड कप पर फोकस कर सकूं। देश के लिए वनडे का वर्ल्ड कप जीत सकें। मिताली खुश हैं कि आज महिला क्रिकेटरों के लिए सुविधाओं की पहले की तरह कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार आज जो भी लड़की महिला क्रिकेट में डेब्यू करती है उसमें आत्मविश्वास नजर आता है क्योंकि उसकी पहुंच अत्याधिक सुविधाओं तक हैं। अब वे घरेलू क्रिकेट में भी पर्याप्त अनुभव हासिल करके आती हैं। यह अच्छी बात है कि घरेलू स्तर पर आज अनेक मैच हो रहे हैं और नियमित रुप से अभ्यास शिविरों का आयोजन भी होता है। 

ये हैं मिताली के रिकॉर्ड 

मिताली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर हैं जिन्होंने 20 साल से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेले हैं। इसके इलावा वह सबसे पहले 300 वनडे इंटरनेशनल मैच खेलने वाली इकलौती खिलाड़ी है। टी 20 इंटरनेश्नल क्रिकेट में सबसे पहले 2 हजार रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी मिताली के नाम पर दर्ज है। 

 

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