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Success Story: कभी 5 रुपए देहाड़ी पर मजदूरी करती थी ज्योति, आज करोड़ों में हैं कमाई

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 05 Nov, 2019 04:00 PM
Success Story: कभी 5 रुपए देहाड़ी पर मजदूरी करती थी ज्योति, आज करोड़ों में हैं कमाई

जीवन में सुख और दुख दोनों का बहुत ही बड़ा रोल होता है। सुख इंसान को खुशियां देता है तो दुख मुश्किल समय का सामना कर खड़े रहने और अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है। जो व्यक्ति इन मुश्किलों का डट कर सामना करता है वहीं व्यक्ति एक दिन जीवन में सफल हो पाता है। जीवन में आने वाली इन्हीं मुश्किलों का सामना करते हुए भारत में पली-बढ़ी ज्योति आज अमेरिका में एक सफल उद्यमी हैं। 

चलिए बताते है आपको इस सफल उद्यमी के संघर्ष भरे जीवन के बारे में...

 

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9 साल की उम्र में पिता ने अनाथालय छोड़ा

ज्योति जब 9 साल की थी तब उसके पिता झूठ बोल कर उसे अनाथालय छोड़ आए थे क्योंकि उनके पिता बहुत ही छोटे किसान थे। उनके पास कोई खास जमीन नहीं थी, ऐसे में वह अपने 5 बच्चों को पालना नहीं कर पा रहे थे। उस समय ज्योति को यह बातें समझ नहीं आ रही थी लेकिन वह इन सब से बहुत परेशान थी। इस बारे में वह किसी से बात तो नहीं कर सकती थी इसलिए उसने अपना सारा गुस्सा और नाराजगी को अपने अंदर ही दबाए रखीं। जब ज्योति स्कूल जाती तो वह दूसरे बच्चों के देखकर सोचती की वह भी अपने लिए ऐसा समान खरीदेगी क्योंकि बाकी बच्चों की तरह उनके पास अच्छे बैग, जूते और कपड़े नहीं थे। वह एक हमेशा एक कामयाब इंसान बनने के सपने देखा करती थी।

 

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16 साल की उम्र में पिता ने करवा दी शादी

ज्योति को सबसे झटका उस समय लगा जब उनके पिता ने उनके सपनों को तोड़ते हुए 16 साल की उम्र में उनकी शादी उनसे 10 साल बड़े व्यक्ति से करवा दी। उनके पति भी आर्थिक रुप से बहुत कमजोर थे। ज्योति दो सालों में 2 बच्चों की मां बन चुकी थी, अपने बच्चों का पेट भरने के लिए वह खेतों में काम करती थी, जिसके लिए उसे 5 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। इतना ही नहीं, 9 महीनें की गर्भावस्था के दौरान भी उन्होंने काम किया। दूध खरीदने के लिए उन्होंने अपने बहनोई की शराब की बोतलें तक बेचीं थी। 


आत्महत्या हत्या की थी कोशिश 

कुछ सालों बाद ज्योंति ने आत्महत्या करने के बारे में सोचा लेकिन अपने बच्चों को देखकर लगा कि अगर वह मर गई तो उनके बच्चों को अनाथों की तरह बड़े होना पड़ेगा। इसलिए उन्होंने काम कनरे के बारे में सोचा। उन्होंने दूसरे शहर में नौकरी करने की शुरु की और अपने बच्चों के साथ वहीं पर रहने लग गई। इसी दौरान एक ओपन यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। 

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विदेश में जाकर भी कम नहीं हुई मुश्किलें 

इसी दौरान अमेरिका में रहने वाले ज्योति के एक रिश्तेदार ने ज्योति को वहां पर बुला लिया लेकिन वहां पहुंचने का सफर भी आसान नहीं रहा क्योंकि ज्योति को पासपोर्ट और वीजा हासिल करने में एक साल लग गया  था। वहां पहुंच कर भी उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुरु-शुरु में वह एक गुजराती परिवार में पेइंग गेस्ट रही उसके बाद उन्होंने वहां पर  गैस स्टेशनों से लेकर बेबी सीट जैसे सभी काम किया। इसके बाद उन्होंने एक सफल उद्यमी बनने के बारे में सोचा और यहीं से उनके व्यवसायी सफर की शुरुआत हुई। 

अपनी बचत से शुरु की कंसल्टिंग कंपनी 

ज्योति जब एक बार मेक्सिको गई थी तो उन्हें एहसास हुआ था कि पेपर वर्क कैसे होता है इसलिए उन्होंने अपनी बचत से 2001 एक कंसल्टिंग कंपनी खोली। धीरे-धीरे उनका खुद का ऑफिस शुरु हो गया। उसके बाद उनकी बेटियां अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए अमेरिका चली गई। उसके बाद से ज्योति ने कभी भी अपने जीवन में पीछे मुड़ कर नहीं देखा। अब अपनी कंसल्टिंग कंपनी के साथ ज्योति ने KEY सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन नामक सॉफ्टवेयर कंपनी स्थापित की। आज ये कंपनी अमेरिक की कई बड़ी कंपनियों को आईटी स्पोर्ट दे रही हैं। 

 

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