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अगर आपका बच्चा भी करता है ज्यादा गुस्सा तो यूं करें उसे Treat

अगर आपका बच्चा भी करता है ज्यादा गुस्सा तो यूं करें उसे Treat
Views:- Sunday, September 9, 2018-5:12 PM

जब बच्चा बात-बात पर चिड़ने या गुस्सा करने लगता है तो पेरेंट्स चिंता में पड़ जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि उन्हें समझ ही नहीं आता कि आखिर बच्चा ऐसा क्यों कर रहा हैं। बिना बच्चे के चिड़चड़ेपन या गुस्से का कारण जाने बिना पेरेंट्स उन्हें डांटने या मारने लगते हैं। इससे बच्चा और भी जिद्दी हो जाता है और गलत दिशा में पड़ जाता हैं। अगर आप नहीं चाहते कि आपका बच्चा गलत राह पर जाए तो उसकी इन हरकतों के पीछे का कारण जाने न कि उसे डांट या फटकार लगाएं। 

 

चलिए जानते है वह कौन सा कारण है जो आपके हंसते खेलते बच्चों को एकदम से चिड़चिड़ा या गुस्सैल बना देता है। 

 

बच्चे का अकेलापन 
भागदौड़भरी जिदंगी में माता-पिता दोनों वर्किंग होते है जिस वजह से वह अपने बच्चों को टाइम नहीं दे पाते। यहीं वजह है कि बच्चा खुद को अकेला महसूस करने लगता है और उसका व्यवहार चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाते हैं। अक्सर पेरेंट्स इसे बच्चे की नादानी या बदतमीजी समझकर अनदेखा कर देते है जो सबसे बड़ी गलती हैं। माता-पिता को बच्चे की गलत आदतों की अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि उसके कारणों को पहचानने की कोशिश करें। दरअसल, बच्चा खेलकूद न कर पाने या स्कूल में कोई विषय न समझ या माता-पिता की अटेंशन न मिल पाने के कारण व्यवहार चिड़चिड़ा या गुस्सैल बन जाता है। 

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दूसरों के सामने डांटें नहीं, समझाएं
अक्सर पेरेंट्स बच्चे के इस हाइपरएक्टिव स्वभाव को बद्तमीजी मानकर उसे रिश्तेदारों या दोस्तों के सामने डांटते-फटकारते हैं जिसका असर बच्चे की मानसिकता और आत्मविश्वास पर पड़ता है। पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे के आसपास ऐसा माहौल बनाएं जिससे बच्चा अपनी हाइपरएक्टिविटी से बाहर निकल सकें। 

 

- बच्चों को दूसरों के सामने मारने के बजाए प्यार से समझाएं। 


- अपने गुस्से व चिंताओं पर नियंत्रण रखें। 


- खुद को चिंतामुक्त रखने के लिए फैमिली के साथ बाहर घूमने जाएं। 


- बच्चे को कभी अपनी चिंताओं का दोष न दें। 


- घर में सकारात्मक वातावरण बनाने की कोशिश करें। 


- बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा टाइम स्पेंड करें। 


- फैमिली के साथ हर हफ्ते मूवी प्लान करें। 


- स्कूल या फ्रैंड्स से जुड़ी बातें बच्चों से पूछें। 

 

हाइपरएक्टिव बच्चे के साथ ऐसा हो व्यवहार 

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1. हाइपरएक्टिव बच्चों को खेलकूद और बाहरी एक्टिविटीज में व्यस्त रखें। बच्चों को डांस या आर्ट क्लास ज्वाइन करवाएं। बच्चों को आउटडोर गेम्स खेलने के लिए भेजे। इससे बच्चे का मन शांत व खुश रहेगा और उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा। 

 

2. हाइपरएक्टिव बच्चे हर गतिविधि पर नजर रखें। उसके स्कूल टीचर से रोज मिले और उसके व्यवहार से जुड़ी जानकारी लेते रहें। टीचर से रिक्वेस्ट करें कि बच्चे को आगे वाली सीट पर बैठाएं। 

 

3. इस तरह के बच्चों को किसी न किसी खेल या दूसरों बच्चों के साथ मिलकर रहने दें। इससे उनके गुस्से व चिड़चिड़ेपन पर काबू पाया जा सकता है। 


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