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पीरियड्स में 1 गलती बन सकती है इंफैक्शन का कारण, सोच समझकर खरीदें नैपकिन

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 22 May, 2019 12:15 PM
पीरियड्स में 1 गलती बन सकती है इंफैक्शन का कारण, सोच समझकर खरीदें नैपकिन

महिलाओं को पीरियड्स आना एक नैचुरल प्रॉसेस है, जिसमें शरीर का दूषित खून बाहर निकल जाता है। ब्लड क्लॉटिंग को सोखने के लिए महावारी के दौरान महिलाएं सैनेटरी पैड का यूज करती हैं लेकिन गलत पैड का चुनाव खुजली, सूजन और लाल चकतों जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है। हालांकि ऐसा सैनेटरी पैड की बनावट की वजह से भी हो सकता है।

 

बैक्टीरियल इंफैक्शन का खतरा

मासिक धर्म में सैनेटरी पैड पहनने से बैक्टीरियल इंफैक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। दरअसल, पीरियड्स के दौरान प्राइवेट पार्ट में नमी बनी रहती है। ऐसे में नमी और पसीने के संयोजन के वजह से बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन हो जाता है, जो रैशेज बनकर उभरता है।

कैसे करें सही नैपकिन का चुनाव
स्किन को ध्यान में रखकर खरीदें पैड

सिर्फ पैड ही नहीं बल्कि स्किन के हिसाब से भी सैनेटरी नैपकिन का चुनाव करें। कई बार अच्छी क्वालिटी के कारण भी कई बार पैड सूट नहीं करते और रैशेज पड़ जाते हैं। ऐसे में इस बात पर खास ध्यान दें कि आपकी स्किन के हिसाब से कौन-सा पैड सही रहेगा।

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ब्लीडिंग का भी रखें ख्याल

अगर आपको भी पीरियड्स के शुरूआती दिनों में तेज फ्लो होता है तो लॉन्ग व एक्सट्रा एब्ज़ॉर्पशन वाले नैपकिन का यूज करें। पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून दूषित होता है, जिससे स्किन रैशेज व UTI की समस्या हो सकती हैं। इसके अलावा ब्लीडिंग हल्की है तो सामान्य नैपकिन यूज करें।

नैपकिन की क्वालिटी

सस्‍ते के चक्‍कर में लड़कियां अक्‍सर क्‍वॉलिटी के साथ समझौता कर लेती हैं लेकिन इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचता है। खराब ब्रांड के नैपकिन को यूज करने से रैशेज का खतरा बढ़ जाता है इसल‍िए नैपकीन खरीदने से पहले उसकी क्‍वाल‍िटी चैक करना न भूले।

लंबे नैपकिन का करें इस्तेमाल

नैपकिन चुनते वक्त इस बात पर ध्यान रखें दें कि उसकी लंबाई ज्यादा हो। इससे ना केवल वो ब्लीडिंग को ज्यादा सोखेगा बल्कि स्टेन का खतरा भी कम होगा।

कॉटन वाले पैड का करें इस्‍तेमाल

बाजार में कई तरह के पैड आते हैं, जिसे आप अपनी सुविधा अनुसार चुन सकती हैं। साथ ही आपको खुशबू वाले नहीं बल्कि कॉटन पैड का यूज करना चाहिए। खुशबू वाले पैड में केमिकल्स का यूज किया जाता है, जो रैशेज और इंफैक्शन का सबब बन सकता है।

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एक ही चीज का इस्तेमाल

पीरियड्स के समय महिलाओं को ज्यादा ब्लीडिंग होती है, जिससे कई बार कपड़ों पर दाग-धब्बे लग जाते है। इससे बचने के लिए महिलाएं एक से अधिक पैड्स, सैनेटरी नैपकिन और टैम्पॉन का इस्तेमाल करती है, जोकि सेहत के लिए हानिकारक है। इस दौरान एक समय में एक ही चीज का इस्तेमाल ‌करें।

कपड़े का इस्तेमाल गलत

आज भी कुछ महिलाएं पीरियड्स के दिनों कपड़े का यूज करती हैं, जोकि गलत है। यह महिलाओं की सेहत और हाइजीन दोनों ही तरह से हानिकारक है। इस दौरान पैड्स की बजाए कपड़े का इस्तेमाल वैजाइना इंफैक्शन और रैशेज का कारण बन सकता है। ऐसे में इस दौरान हमेशा पैड्स का इस्तेमाल करें।

हाइजीन का रखें खास ध्यान

वैसे पैड की वजह से होने वाले रैशेज के ल‍िए कई तरह के ट्रीटमेंट मौजूद है लेकिन अगर इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो आपको यह समस्या होगी ही नहीं। साथ ही इससे आप बैक्टीरियल इंफैक्शन के खतरे से भी बचे रहेंगे।

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-सैनेटरी नैपकिन को दिन में 3 घंटे बाद बदलते रहें।
-प्राइवेट पार्ट को अच्छे से साफ करें ताकि किसी भी तरह की स्किन संबंधी समस्या न हो।
-प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें और पीरियड्स के दौरान दिनभर में कम से कम 3-4 बार प्राइवेट पार्ट की सफाई करें।
-पीरियड्स के समय बहुत तंग कपड़े पहनने से बैचेनी व चिड़चिड़ापन हो सकता है इसलिए इस दौरान ढीले कपड़े पहनें।
-गर्मियों में कॉटन अंडरवियर पहनें।
-महामारी के समय तला हुआ या बाहर की चीजों का सेवन न करें। इससे आपका दर्द और भी बढ़ जाएगा।
-ऐसे समय में वर्कआउट या ज्यादा भागदौड़ वाला काम न करें और जितना हो सके शरीर को आराम दें।
-मासिक धर्म की समस्यां होने पर डिहाइड्रेशन की समस्यां हो सकती है इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।

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