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अंदरुनी सूजन ही नहीं, टाइप-2 डायबिटीज में भी फायदेमंद हैं ऑलिव ऑयल

  • Edited By Harpreet,
  • Updated: 18 Aug, 2019 05:45 PM
अंदरुनी सूजन ही नहीं, टाइप-2 डायबिटीज में भी फायदेमंद हैं ऑलिव ऑयल

ऑलिव ऑयल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दुनियाभर में हेल्थ कॉन्शियस लोग ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। अन्य कुकिंग ऑयल की तुलना में इस तेल के इस्तेमाल से लोग दिल से संबंधित परेशानियों, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल और डायबिटीज जैसी समस्याओं के कम शिकार होते हैं।ऑलिव ऑयल की डिमांड को देखते हुए बहुत सी कंपनियों ने इसे बनाना शुरु कर दिया है। मगर इसे बनाने में सही तकनीक का इस्तेमाल होना बहुत जरुरी है। ताकि ऑलिवस में मौजूद सभी पोषक तत्व इनका ऑयल निकालने के बाद भी मौजूद रह सकें। 

एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर

ऑलिव ऑयल में जबरदस्त एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर के हानिकारक तत्‍वों को रोकने का काम करते है। यदि हानिकारक तत्‍वों की रोक थाम न की जाए तो वे हमारे लिए घातक बीमारीयों का रूप ले सकते है।  फिट एंड फाइन बॉडी के लिए एंटी-ऑक्सीडेंट्स अपना बेस्ट रोल प्ले करते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ ऑलिव ऑयल में आपको विटामिन- E और D भरपूर मात्रा में मिलेंगे। जिस वजह से इस तेल का सेवन आपको दिल से जुड़ी समस्त परेशानियों से दूर रखेगा।

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अंदरूनी सूजन में फायदेमंद

शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ने की वजह से कई बार अंदरुनी भागों में सूजन यानि इन्फ्लेमेशन हो जाती है। इस सूजन की वजह से अर्थराइटिस, कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और अल्जाइमर जैसी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। ऑलिव ऑयल शरीर में टॉक्सिन्स को खत्म करने का काम करता है।

विटामिन्स की कमी करे पूरी

जैतून के तेल में विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है साथ ही यह मानसिक विकार दूर कर आपको जवां बनाए रखने में भी मदद करता है।

हड्डियां बनाएं स्ट्रांग 

जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। लंबे समय तक हड्डियों को स्ट्रांग बनाने के लिए ऑलिव ऑयल का सेवन बहुत जरुरी है। 

क्यों मंहगा होता है ऑलिव ऑयल ?

ऑलिव एक पेड़ होता है, जिसके फलों से ऑलिव ऑयल बनाया जाता है। ऑलिव के फल से बहुत कम मात्रा में तेल निकलता है। 40 से 45 किलो ऑलिवस में से केवल 3 लीटर ऑयल ही निकाला जा सकता है। खास सीजन में पैदा होने वाले इस फल की प्रोडक्शन भी काफी कम होती है। लोग न केवल ऑलिव ऑयल बल्कि इससे बने आचार का भी इस्तेमाल करते हैं। कई लोग इन्हें पिज्जा टॉपिंग्स के रुप में भी खाना पसंद करते हैं। दुनिया भर में अलग-अलग तरीके से खाने में पसंद की जाने वाली ऑलिवस का कम दाम में मिल पाना मुश्किल काम है। डिमांड अधिक और प्रोडक्शन कम होने की वजह से ऑलिव ऑयल महंगे दाम में पाया जाता है।

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खरीदते वक्त ध्यान में रखें ये बातें

-यह तेल ऑक्सीजन, लाइट और गर्मी के संपर्क में आने से अपनी गुणवत्ता बहुत जल्द खो देता है। ऐसे में इसे खरीदते वक्त हमेशा गहरे रंग की कांच की बोतल या स्टील के डब्बे में भरा ऑलिव ऑयल ही खरीदें। 

-बाजार में कई सस्ते ऑलिव ऑयल भी उपलब्ध होते हैं, जिन्हें कैनोला ऑयल को मिलाकर बनाया जाता है। ये उतने फायदेमंद नहीं होते हैं, जितने एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल होता है।

- ऑलिव ऑयल की हमेशा छोटी बोतल ही खरीदें।ऑलिव ऑयल को लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी गुणवत्ता घट जाती है। खरीदते वक्त एक्सपायरी डेट पर ध्यान देना मत भूलें। पैकिंग के 15 महीने के भीतर ऑलिव ऑयल का प्रयोग सेहतमंद होता है।

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