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बच्चे को कैसे और कब डालें मनी सेविंग की आदत

बच्चे को कैसे और कब डालें मनी सेविंग की आदत
Views:- Tuesday, November 6, 2018-4:54 PM

मां-बाप अपने बच्चे की हर जरूरत को पूरी करते हैं लेकिन कई बार पैसों का तंगी के चलते कुछ पेरेंट्स मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में बच्चे का रूठना सही है क्योंकि छोटी उम्र के बच्चे को पैसों की अहमियत का पता ही नहीं होता। अगर शुरू से ही उन्हें मनी सेविंग के बारे में थोड़ी-थोडी जानकारी मिलती रहे तो भविष्य में मां-बाप और बच्चे दोनों को बहुत मदद मिलेगी। हालांकि यह काम थोड़ा- मुश्किल जरूर है लेकिन कुछ तरीके आपके काम आ सकते हैं। 

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1. क्या है मनी सेविंग?
मनी सेविंग यानि मनी मैनेजमेंट एक कंटीन्यूअस प्रोसेस (Continuous process) है जो बच्चों में छोटी उम्र से ही शुरू कर देनी चाहिए। यह तरीका बच्चे की उम्र के हिसाब से बदलता रहता है लेकिन इससे वे पैसों की सही जरूरत समझना शुरू कर देगा। 


2. मनी सेविंग के लिए इन बातों पर दें ध्यान 
- हर चीज खुद खरीदने की बजाय कभी-कभी बच्चे को भी जरूरत का सामान खरीदन की जिम्मेदारी सौंपे। इससे वे पैसों का महत्व समझने लगेगा और बार-बार एक ही तरह की चीज की डिमांड करना बंद कर देगा। 

- बच्चे को उपहार में मिले पैसे खुद के पास रखने की बजाए उसे संभालने के लिए कहें। इससे उसे पता चलेगा कि सेविंग कैसे करनी है। 

- बच्चे के साथ कुछ मनी गेम्स खेलें जिसमें पैसे इस्तेमाल करने के तरीके और मूल्यों के बारे में जानकारी मिलती हो। लाइफ, पे डे, मोनोपॉली जूनियर इसके बेस्ट ऑप्शन हैं।

- बच्चे को उसके पैसों से कोई सामान खरीदने के कहें, इससे उसे पता चलेगा कि पैसे सिर्फ सही और जरूरत के सामान पर ही खर्च करने हैं। 

- पैसों का इस्तेमाल अगर बच्चा सही तरीके से नहीं कर रहा को उसे मारे या टोके नहीं, इससे पूअर मनी मैनेजमेंट का परिणाम क्या होता है वह नहीं जान पाएंगा। बस आप उस पर नजर रखें और एक बार गलती के बाद वे दोबारा कभी भी उसे नहीं दोहराएगा। 

- इस बात का ध्यान रखें कि फाइनैनशियल एजुकेशन बच्चा अपने घर और पेरेंट्स से ही सीखता है। 

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3. उम्र के हिसाब से हो मनी सेविंग 
बहुत छोटे बच्चे को पैसों के बारे में कोई खास जानकारी नहीं होती। उसे बस अपनी पसंद की चीजों के बारे में पता होता है। इसकी थोड़ी-बहुत जानकारी आप 5 साल के बाद देनी शुरू कर सकते हैं। 

5 से 10 साल के बच्चे
छोटे बच्चों को सिक्के जमा करने का बहुत शौंक होता है। इसी से पैसे जोड़ने की आदत डाली जा सकती है। उसे सिक्के पिगी बैंक में जमा करने के लिए बोलें। बच्चे को अपने साथ खरीरददारी के लिए जरूर ले जाएं, पूरे महाने की चीजें सीमित पैसो में ही खरीदने की जानकारी दें। बच्चे को पॉकेट मनी देते हैं तो उसे बताएं कि किस तरह पैसे जमा करके आप पसंदीदा सामान खरीद सकते हैं।

11 से 15 साल के बच्चे
पैसों की समझ के लिए यह उम्र भी बहुत छोटी होती है लेकिन बच्चे को फिजूल खर्च का नुकसान समझाया जा सकता है। उसे सेविंग से अकाउंट खोलने को कहें ताकि भविष्य में वे अपने जोड़े गए पैसों से कुछ खरीद पाए। 

16 से 20 साल के बच्चे
उस उम्र में बच्चे को पूरी तरह से समझ आनी शुरु हो जाती है। पारिवारिक बजट और खर्च करने में उनकी सलाह ली जा सकती है। उसे अकाउंट और एटीएम कार्ड चेक करना बताएं। उसे बताएं कि वे पार्ट टाइम जॉब से कमाए पैसों से कॉलेज की पढ़ाई का खर्च, बाइक या ज्वैलरी जैसी चीजें खरीद सकता है। 
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