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लॉकडाउन के दौरान लड़कियां हुई ज्यादा डिप्रेशन की शिकार, जानें क्या कहता है सर्वे?

  • Edited By neetu,
  • Updated: 07 Aug, 2020 04:22 PM
लॉकडाउन के दौरान लड़कियां हुई ज्यादा डिप्रेशन की शिकार, जानें क्या कहता है सर्वे?

दुनिया भर में फैले कोरोना ने जहां कई संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया वहीं लॉकडाउन के कारण बहुत लोगों के काम बंद होने और अकेले रहने के कारण वे डिप्रेशन का शिकार हुए और अभी भी हो रहें हैं। एक  शोध के अनुसार, इस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं में देखने को मिला। उनमें पुरूषों की तुलना में ज्यादा मात्रा में तनाव, चिंता, घबराहट, अकेलापन देखने को मिला। तो चलिए जानते हैं इस शोध के बारे में विस्तार से...

लड़कियां हुई ज्यादा डिप्रेशन की शिकार

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा करीब 18,000 लोगों पर एक सर्वे किया गया था। यह सर्वे लोगों पर मई के महीने में हुआ था। उस सर्वे के मुताबिक, युवतियों में डिप्रेशन होने के लक्षण ज्यादा पाएं गए। उनके अनुसार, इस लॉकडाउन के कारण म्नसिक रूप से परेशान होने का सबसे ज्यादा असर 19 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों में पाया गया। बात अगर लड़के और लड़कियों के डिप्रेशन में आने की तुलना की करें तो लड़के करीब 25 प्रतिशत डिप्रेशन का शिकार हुए। मगर लड़कों के मुकाबले में लड़कियों में डिप्रेशन में आने के लक्षण 12 प्रतिशत ज्यादा यानि 37 प्रतिशत पाएं गए। इसके अलावा जिन महिलाओं की उम्र 30 है। उन्हें मानसिक रूप से ज्यादा परेशानी होने के लक्षण देखे गए। शोध के मुताबिक पिछले पांच साल की तुलना में 30 साल की उम्र की महिलाएं इस साल दोगुनी तेजी से डिप्रेशन से पीड़ित पाई गई। ऐसे में इस उम्र की 5 में से 1 महिला डिप्रेशन की शिकार हो रही है। 

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चार पीढ़ियों में पर किया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने इस महामारी के असर का देखने के लिए चार पीढ़ियों में अध्ययन किया। उनकी इस लिस्ट में चारों पीढ़ियों के लोग शामिल थे। उन्होंने 62 साल, 50 साल, 30 साल और 19 साल के लोगों पर अध्ययन किया। इन सबपर 4 अलग सर्वे भी किए गए। इसतरह उनपर बचपन से ही नजर रखी गई थी। 

अकेलेपन के कारण महिलाएं ज्यादा हुई डिप्रेशन का शिकार

इस रिसर्च के मुताबिक, कोरोना कहर के कारण हुए लॉकडाउन के चलते पुरूषों के मुकाबले महिलाओं को मानसिक तनाव से पीड़ित पाया गया। बात अगर 19 साल की उम्र की लड़के और लड़कियों की करें तो उनके मानसिक तनाव से पीड़ित होने का मुख्य कारण घर पर अकेले रहना पाया गया। इसके साथ ही 30 साल की श्रेणी में आने वाले पुरूष और महिलाओं में 37 प्रतिशत महिलाएं और 25 प्रतिशत पुरूषों में अकेलेपन के कारण डिप्रेशन की समस्या होने का कारण पाया गया। मगर बात हम 62 साल के लोगों की करें तो उनमें केवल 7 प्रतिशत लोग ही तनाव या डिप्रेशन के शिकार पाएं गए। 

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प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर इमला फिट्ज सिमोन का कहना है कि जो लोग 25 से 30 साल की उम्र में डिप्रेशन का शिकार हुए उसके पीछे का मुख्य कारण प्राकृतिक में होने वाला बदलाव था। मगर कोरोना महामारी का उनपर कोई असर नहीं पर इस बात को भी गलत नहीं कह सकते हैं। ऐसे में लॉकडाउन के कारण लोग सबसे ज्यादा तनाव की चपेट में आए। साथ ही लड़कों के मुकाबले लड़कियों में मानसिक रूप से स्वास्थ्य परेशानियां ज्यादा मात्रा में देखने को मिली। 

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