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एक खत जिसने बदल दी थी गिरीश कर्नाड की जिंदगी, फिर यूं शुरू हुआ था फिल्मी सफर

  • Edited By Priya dhir,
  • Updated: 10 Jun, 2019 03:34 PM
एक खत जिसने बदल दी थी गिरीश कर्नाड की जिंदगी, फिर यूं शुरू हुआ था फिल्मी सफर

एक्टर, डायरेक्टर और राइटर गिरीश रघुनाथ कर्नाड 81 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए हैं। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी मौत की खबर सुनकर गिरीश के चाहने वाले सदमे में हैं। बॉलीवुड सेलेब्स में सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। 

सलमान के साथ आखिरी बार फिल्म में आए नजर 

फिल्मी करियर की बात करें तो गिरीश ने बॉलीवुड व साऊथ की कई फिल्मों में काम किया। सलमान खान के साथ 'टाइगर जिंदा है' उनकी आखिरी फिल्म थी। एक कोंकणी परिवार में जन्मे गिरीश ने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी और 1978 में रिलीज हुई फिल्म 'भूमिका' के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था। वहीं 1998 में उन्हें साहित्य के प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ अवॉर्ड से नवाजा गया था। गिरीश ने 1970 में कन्नड़ फिल्म 'संस्कार' से अपना एक्टिंग और स्क्रीन राइटिंग डेब्यू किया था। इस फिल्म ने कन्नड़ सिनेमा का पहला प्रेजिडेंट गोल्डन लोटस अवार्ड जीता था।
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1974 में की बॉलीवुड में एंट्री 

उनकी पहली बॉलीवुड फिल्म की बात करें तो उन्होंने 1974 में'जादू का शंख' से एंट्री की थी। उनके बाद गिरीश ने निशांत, शिवाय और चॉक एन डस्टर में भी काम किया था। पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने धारवाड़ स्थित कर्नाटक विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और बाद वे एक रोड्स स्कॉलर के रूप में इंग्लैंड चले गए। वे शिकागो विश्वविद्यालय के फुलब्राइट महाविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं ।

कर्नाड ने एक बार अपने बारे में बताया था, ''जब मैं 17 साल का था, तब मैंने आइरिस लेखक 'सीन ओ कैसी' की स्केच बनाकर उन्हें भेजा, तो उसके बदले उन्होंने मुझे एक पत्र भेजा । पत्र में उन्होंने लिखा था कि मैं यह सब करके अपना वक्त जाया न करूं, बल्कि कुछ ऐसा करूं, जिससे एक दिन लोग मेरा ऑटोग्राफ मांगे ।

गिरीश ने बताया था, ''मैंने पत्र पढ़कर ऐसा करना बंद कर दिया । मेरे माता-पिता दोनों की ही थियेटर में दिलचस्पी थी । मेरे पिता उस समय काम के सिलसिले में घूमते रहते थे । बाल गंधर्व के नाटक हों या मराठी थियेटर, उन दोनों की दिलचस्पी पूरी रहती थी । वे अक्सर थियेटर की बातें घर में किया करते थे । थियेटर कितना शानदार होता था, यह मैंने उन्हीं से सुना । इसके बाद मेरी इसमें रुचि बढ़ती गई ।' हालांकि इससे पहले वह कवि बनना चाहते थे।

महिलाओं को बारीकी से समझते थेः गिरीश

गिरीश का कहना था कि वह महिलाओं को बारीकी से समझते थे क्योंकि गिरीश की परवरिश दो बहनों, एक भांजी और घर के सामने रहने वाले अंकल की चार बेटियों के साथ हुई है। 7 लड़कियों के साथ रहने के कारण वह महिलाओं की सोच को बेहद बारीकी से समझता थे।

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