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World Heart Day: महिलाओं के लिए साइलेंट किलर है हार्ट अटैक - Nari

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 29 Sep, 2018 10:30 AM
World Heart Day: महिलाओं के लिए साइलेंट किलर है हार्ट अटैक - Nari

दिल की बीमारी किसे हो जाए, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। मगर इस बात का पता जरूर लगाया जा सकता है कि किन लोगों में हार्ट अटैक की संभावना अधिक होती है। अधिकतर लोगों को लगता है कि हार्ट अटैक सिर्फ पुरुषों को होता है, महिलाओं को नहीं। यह पूरी तरह गलत है। गलत लाइफस्टाइल के चलते आजकल महिलाएं भी दिल की बीमारियों का शिकार हो रही हैं। उनमें भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि, महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग होते हैं।

 

आज 'वर्ल्ड हार्ट डे' के मौके पर हम आपको बताएंगे कि महिलाओं को किस तरह दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के खतरे से सावधान रहना चाहिए।

 

महिलाओं में हार्ट अटैक के कारण
पूरी नींद न लेना
वजन कंट्रोल न करना
एक्सरसाइज न करना
ब्लड प्रेशर पर नजर न रखना
तनाव में जीना
भावनात्मक कारण
जरूरत से ज्यादा वर्कआउट
सिगरेट या शराब पीना

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पहचानें हार्ट अटैक के लक्षण

हार्ट अटैक से पहले महिलाओं में दिखते हैं ये लक्षण, इन्‍हें नजरअंदाज करना है खतरनाक
शरीर के ऊपरी भाग में तेज दर्द
चक्कर आना
सीने में दर्द
जबड़े में दर्द
जी मिचलाना, उलटी, पेट खराब होना
सांस लेने में परेशानी
पसीना आना
थकान महसूस होना

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हार्ट अटैक से बचने के लिए बरतें सावधानी
1. 20 की उम्र से ही कराएं टेस्‍ट
महिलाओं को 20 की उम्र के बाद ही कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर टेस्ट और डायबिटीज का चेकअप करवाने चाहिए। इससे दिल के रोगों का शुरुआत में ही पता चल जाता है। इसके अलावा, किसी भी तरह की हार्ट डिसीज होने पर रेग्युलर चेकअप करवाएं।

 

2. हेल्‍दी डाइट लें
हार्ट डिसीज से बचने के लिए महिलाओं को बैलेंस्ड और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। साथ ही कैलोरी इनटेक फिजिकल एक्टिविटी और मेटाबॉलिज्म के अनुसार ही लें। इसके अलावा 30 की उम्र के बाद अपनी डाइट पर कंट्रोल रखें और लो फैट डाइट लें।

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3. एक्‍सरसाइज करना
अधिकतर महिलाएं मेनोपॉज के बाद एक्सरसाइज करना बंद कर देती है, जो गलत है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के हार्ट के आसपास फैट का जमाव अधिक होता है, जिससे दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में, महिलाओं को चाहिए कि वे उम्र के इस पड़ाव पर हलकी-फुलकी एक्सरसाइज करें और फिजिकली एक्टिवट रहें।

 

4. मेडिकल सहायता लें
सीने में हलकी-सी भी बेचैनी, पसीना, जबड़े, गर्दन, बाजू और कंधों में दर्द, सांस का टूटना बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करें। इन लक्षणों के नजर आने पर तुंरत मेडिकल सहायता लें।

 

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