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बच्चे के दिमागी विकास और आंखों के लिए बेस्ट है फिश

बच्चे के दिमागी विकास और आंखों के लिए बेस्ट है फिश
Views:- Wednesday, October 31, 2018-5:11 PM

हेल्दी डाइट में मछली अहम रोल अदा करती है, क्योंकि इसमें बहुत सारे न्यूट्रिशंस शामिल होते हैं जो शरीरिक विकास के लिए जरूरी हैं। इसलिए हेल्दी हार्ट डाइट में भी फिश खाने की सलाह दी जाती है। 

1. बड़े ही नहीं, बच्चों के लिए भी बढ़िया
फिश बच्चों के लिए भी बेस्ट मानी जाती है। 2-3 साल के बच्चे की रोजाना डाइट में 40 से 50 ग्राम मछली जरूर शामिल करनी चाहिए, जबकि व्यस्कों को 80 से 100 ग्राम तक की मात्रा डाइट में लेनी चाहिए। स्टडी और चिकित्सक की सलाह की मानें तो फिश और फिश ऑयल डाइट में लेने वाले बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज का खतरा कम होता है। 

2. किस तरह की फिश बच्चों के लिए बढ़िया?
मछली की ऐसी बहुत सारी प्रजातियां हैं, जिनमें मर्करी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जैसे शार्क, स्वार्ड फिश (sword fish), किंग मैकेरल (king mackerel) और टाइल मछली (tile fish)। 2 से 3 साल के बच्चों को ये मछली खाने के लिए न दें, क्योंकि लगातार इस फिश का सेवन करने से तंत्रिका संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। नवजात को एक साल के बाद ही डाइट में मछली देना शुरू करें। 

3. मछली खाने के फायदे 
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1. बिना फैट के प्रोटीन से भरपूर 
मछली में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, वो भी बिना फैट के। फिश अोमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन डी भी भरपूर होती है। बच्चे और किशोरों के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड और DHA (docasahexemonic acid) जरूरी तत्व हैं, जो आंखों और दिमाग के विकास के लिए बेस्ट हैं। 

2. हेल्दी दिमाग और आंखों के लिए जरूरी
ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर फिश दिमाग के लिए हेल्दी मानी जाती है। इसे खाने से याद्दाश्त भी तेज होती है। स्टडी के अनुसार, जो लोग हफ्ते में एक बार फिश खाते हैं, उनकी स्मरण शक्ति मछली नहीं खाने वाले लोगों से बेहतर होती है। डिप्रेशन और तनाव से लड़ने में भी यह बेस्ट आहार है। इसमें पाए जाने वाले फैटी एसिड हाई ब्लड प्रेशर और दिल संबंधी समस्याओं से बचाव करते हैं। इससे आंखों की रोशनी भी तेज होती है।  
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3. फिश ऑयल से बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज से बचाव 
फिश और इसमें बनने वाले प्रोडक्ट्स ( फिश ऑयल) में विटामिन डी भरपूर होता है। जो लोग फिश नहीं खा सकते, वह कॉड लिवर तेल का एक कैप्सूल या 1 टीस्पून कॉड लिवर ऑयल का सेवन रोजाना कर सकते हैं। इससे बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज और बड़ों के autoimmune डायबिटीज का खतरा कम होता है। सालमन, हेररिंग, मैकेरल, सार्डिन, एंकोवी, रैनबो ट्राउट प्रजाति वाली मछली में ओमेगा 3 फैट्स भरपूर होता है, जो स्किन सेल की मरम्मत करता है और स्किन कैंसर से भी बचाव करता है। 

4. ध्यान में रखें फिश एलर्जी
बहुत सारे लोगों को मछली खाने के बाद स्किन प्रॉबल्म, श्वसन संबंधी समस्या, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। अगर बच्चे को फिश से एलर्जी है तो उसे खाने के लिए ना दें। 
 


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