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देश की हर चौथी महिला PCOS का शिकार, 50 प्रतिशत औरतें लक्षण से अनजान - Nari

  • Edited By Priya verma,
  • Updated: 19 Sep, 2018 01:51 PM
देश की हर चौथी महिला PCOS का शिकार, 50 प्रतिशत औरतें लक्षण से अनजान - Nari

महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कई तरह के जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इनके जरिए औरतों को इस बात की जानकारी दी जाती है किस तरीके से वे अपनी सेहत का ख्याल रख सकती हैं। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि AIIMS में द्वारा यह कहा गया है कि देश में हर 4 में से 1 महिला  'पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम' से जूझ रही है। 

 

है क्या PCOS?
महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा जाकरूक रहने की जरूरत होती है। गुप्त रोगों की जानकारी का अभाव उन्हें मुश्किल में डाल सकता है। इसी में से एक है PCOD और PCOS, इस परेशानी में ओवरी बड़ी हो जाती है और फॉलिकल cysts बहुत छोटा हो जाता है। इस अवस्था में हार्मोनल इमबैलेंस के आसार दिखते हैं। जिससे ओवलुशन की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। पहले PCOD और भी अनदेखी करने पर समस्या बढ़ने पर यह परेशानी PCOS में बदल जाती है। 

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50 प्रतिशत औरतें हैं अंजान
औरतों में वैसे तो यह बेहद आम बीमारी है लेकिन अनदेखी और जागरूकता की कमी के कारण इसका खतरा ज्यादा बढ़ रहा है। इस गुप्त बीमारी से 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं अंजान रहती हैं। 

 

लक्षण पहचानना जरूरी
इसके लक्षणों के बारे में हर महिला को जानकारी होना बहुत जरूरी है। समय रहते इस तरफ ध्यान देने से बचाव संभव है। लगातार अनियमित और दर्दनाक पीरियड्स, चेहरे पर बालों का बढ़ना, बालों का झड़ना, तेजी से वजन बढ़ना, थकावट, प्राइवेट पार्ट में खुलली, बदबूदार पानी निकलने जैसी परेशानियां आ रही हैं तो जांच जरूर करवाएं।  

 

बढ़ सकता है बांझपन का खतरा
पीसीओएस के लक्षणों का अनदेखी करने पर बांझपन, मधुमेह, दिल के रोग और एंडोमेट्रियल कैंसर जैसी खतरनाक स्वास्थ्य समस्याओं की सामना करना पड़ सकता है। 

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होम्योपैथी सुरक्षित इलाज 
पीसीओएस जागरूकता माह पर औरतों की सेहत को लेकर डा. बत्रा समूह के संस्थापक और अध्यक्ष एमेरिटस और पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा ने कहा, " महिलाएं समाज के स्वास्थ्य के रीढ़ की हड्डी है...देश के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि उसकी महिलाए स्वस्थ हों।"  डॉ. मुकेश बत्रा का ने कहा, " मैंने पीसीओएस के लक्षणों के साथ अधिक से अधिक महिलाओं को देखा है।" इसके इलाज के बारे में उनका मानना है कि होम्योपैथी द्वारा इसका इलाज सुरक्षित, कम खर्च के साथ असरदायक है। 

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