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सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है ई-सिगरेट, फेफड़े हो सकते हैं फेल, और भी है कई नुकसान

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 08 Sep, 2019 01:20 PM
सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है ई-सिगरेट, फेफड़े हो सकते हैं फेल, और भी है कई नुकसान

आजकल लोग आम सिगरेट की जगह ई-सिगरेट (e-cigarette) पीने लगे हैं। उनका मानना है कि धुंआ देने वाली सिगरेट की जगह यह इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट ज्‍यादा बेहतर है। पर यह सिर्फ आपका भ्रम है क्योंकि ई-सिगरेट भी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। बता दें कि इसमें भी वही विषाक्त रासायनिक पदार्थ होते हैं जो तम्बाकू के धुएं में पाए जाते हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

 

ई-सिगरेट पीने से 3 लोगों की मौत

हाल ही में अमेरिका में ई-सिगरेट पीने से होने वाली फेफड़े की बीमारियों से कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सैकड़ों अन्य फेफड़े की बीमारी से जूझ रहे हैं और कई किशोर कोमा जैसी हालत में हैं। ई-सिगरेट से धूम्रपान करने के कारण 450 से अधिक लोगों में फेफड़े की बीमारी का पता चला है, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले दोगुनी है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि जांच के दौरान 34 लोगों की ओर से इस्तेमाल की गई ई सिगरेट में विटामिन ई ऑयल की मात्रा बहुत अधिक पाई गई, जिससे वे बीमार पड़े।

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आखिर ई-सिगरेट है क्या?

ई-सिगरेट या इलेक्ट्रानिक सिगरेट को पर्सनल वेपोराइजर भी कहते हैं। ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर होता है जो उसमें मौजूद लिक्विड को भाप में बदल देता है। इसे पीने से सिगरेट पीने का अहसास होता है। ई-सिगरेट कार्ट्रीज, ऐटमाइजर, बैट्री, लिक्विड से बनती है।

क्यों हानिकारक है ई-सिगरेट

दरअसल, इसमें ऐसे कैमिकल्स होते हैं, जो ई-तरल पदार्थों के संपर्क में आने वाली एंडोथेलियल कोशिकाएं, डीएनए के नुकसान व कोशिकाओं की मृत्यु में शामिल अणुओं के स्तर में वृद्धि करते हैं। वहीं इलेक्ट्रोनिक सिगरेट (ई-सिगरेट) में प्रयोग किए जाने वाले फ्लेवर खासकर दालचीनी और मेंथॉल को एक साथ पीने से दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही इससे फेफड़ों भी खराब हो सकते हैं।

सिगरेट और ई-सिगरेट से होने वाला नुकसान एक जैसा

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और पारंपरिक सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान एक जैसे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ई-सिगरेट का धुआं साफ नहीं दिखाई देता। ज्यादातर ई-सिगरेट में जो केमिकल भरा जाता है वो लिक्विड होता है।

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दिल की बीमारियों का कारण

निकोटिन नशीला पदार्थ है, इसलिए पीने वाले को लत लग जाती है। थोड़े दिन बाद अगर इसे पीना बंद करें तो बेचैनी होने लगती है। निकोटिन दिल और सांस के मरीजों के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। इसी तरह हुक्का बार में फ्लेवर ई-लिक्विड होता है, जो एंटी बैक्टीरियल सिस्टम को क्षतिग्रस्त कर देता है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप निकोटन का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।

फेफड़ों को पहुंचाता है नुकसान

इसमें निकोटीन के अलावा जो खुशबूदार केमिकल भरा होता है वह गर्म होने पर सांस के साथ फेफड़ों में जाता है। इससे ना सिर्फ फेफड़ें खराब होते हैं बल्कि यह फेफड़ों के कैंसर की आशंका भी बढ़ाता है।

गर्भवती के लिए नुकसानदायक

गर्भवती महिलाओं के लिए वेपिंग बहुत खतरनाक है इससे उनके गर्भस्‍थ शिशु पर बुरा असर पड़ता है। छाटे बच्‍चों के आसपास इसे पीना ठीक नहीं क्‍योंकि हानिकारक भाप उनके दिमागी विकास पर असर डालती है।

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