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Health Update: 30 मिनट की सैर करेंगे तो नहीं आएगी घुटने बदलने की नौबत - Nari

  • Edited By Priya verma,
  • Updated: 17 Sep, 2018 12:35 PM
Health Update: 30 मिनट की सैर करेंगे तो नहीं आएगी घुटने बदलने की नौबत - Nari

साल 2014 में देश में लगभग 70 हजार लोगों ने घुटने और 6 हजार लोगों ने हिप की रिप्लेसमैंट करवाईं। इन अंगों की रिप्लेसमैंट उन लोगों के लिए फैशन बनने लगी है जिन्हें दर्द बिल्कुल सहन नहीं होता और वे दर्द का फौरन इलाज चाहते हैं। ऐसे लोगों को सर्जन रिप्लेसमैंट सर्जरी की सलाह देते हैं जिन्हें वे मान भी लेते हैं। चिंता की बात यह है कि 30-40 वर्ष के युवा घुटने और हिप की रिप्लेसमैंट करवा रहे हैं जबकि वे इस समस्या से जीवनशैली और खानपान में बदलाव कर निजात पा सकते हैं।

 

जितना हो सर्जरी टालें
ऑर्थोपैडिक विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि किसी को आर्थराइटिस की गंभीर समस्या है तो घुटने की रिप्लेसमैंट करवाना सही विकल्प है, लेकिन प्रारंभिक अवस्था में इससे कसरत और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं से आराम पाया जा सकता है। 

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पेन किलर किडनी को पहुंचती है नुकसान 
घुटनों व कूल्हों के दर्द का सबसे पहला उपचार है पेन किलर जो पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि ये घुटने का दर्द कम तो करते हैं लेकिन लिवर व किडनी को भी नुक्सान पहुंचाते हैं। यदि दवाएं लेने व कसरत के दौरान, चलते समय दर्द या पैरों में टेढ़ापन महसूस हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। लाइफ स्टाइल बदलें आमतौर पर 20 वर्ष की आयु के बाद से घुटनों के घिसने व दोबारा बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है लेकिन 40 साल के बाद हड्डी बनने की तुलना में घिसती ज्यादा है।खानपान और जीवनशैली में बदलाव कर हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है। विटामिन ‘डी’ कैल्शियम और प्रोटीन युक्त चीजों को भोजन में शामिल करें। 30-40 साल की उम्र के बाद आलती-पालती मारकर बैठना व सीढिय़ों पर उतरने-चढऩे की बजाय पैदल चलना ज्यादा उचित होता है।

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कुछ नियमों को भी मानें

1. चलते समय हमारी आंख, दिमाग और पैरों का संतुलन नहीं गड़बड़ाना चाहिए।
2. स्थिर कदमों से चलें। अपना सिर ऊंचा रखें। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। 
3. हाथों को 90 डिग्री पर झुकाकर आगे-पीछे हिलाएं।
4. सीढिय़ों पर चढ़ते समय किसी से आगे निकलना हो या क्रॉस करना हो तो दिशा बदल लें।
5. स्मूथ व साफ जगह पर भी दौडऩा हो तो पहले बॉडी वॉर्मअप जरूर करें।
6.  फिसलन व ऊबड़-खाबड़ सड़क पर न दौड़ें। 

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सावधानी से चलें
चलने-फिरने में सावधानी बरतने से पैरों और घुटनों को भी फिट रखा जा सकता है। 30 मिनट रैगुलर वॉक से मोटापे और डायबिटीज का खतरा घटता है। 65 किलो वजन का व्यक्ति 6.5 कि.मी. प्रति घंटे की गति से चले या दौड़े तो एक घंटे में 362 कैलोरी बर्न कर सकता है। वॉक करने से डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस, तनाव में भी लाभ होता है। वॉकिंग नैचुरल कसरत है जो हृदय रोगों से बचाती है और हड्डियों को मजबूत कर मोटापे को घटाती है। इनके लिए जरूरी है कि आराम से व सही पोश्चर में चलें।

 


 

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