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3 बार दी कैंसर को मात, पदमा प्रेम 81 साल की उम्र में भी दूसरों के लिए है प्रेरणा

  • Edited By shipra rana,
  • Updated: 07 Oct, 2019 04:42 PM
3 बार दी कैंसर को मात, पदमा प्रेम 81 साल की उम्र में भी दूसरों के लिए है प्रेरणा

'आपको अपनी मुश्किलों का सामना करना ही होगा' ऐसा किसी और का नहीं बल्कि 3 बार कैंसर को मात देने वाली 81 साल की पदमा प्रेम का कहना है। साधारण सी दिखने वाली इस औरत का जज्बा पूरा हिंदुस्तान एक वीडियो में सुन चुका है। पदमा अपने कैंसर की कहानी दुनिया से बताना चाहती थी इसलिए उन्होंने यूट्यूब का प्लेटफॉर्म चुना। चलिए आपको भी उनकी कैंसर को हराने वाली दास्तां को विस्तार में बताते है।  

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साल 1980 में आया पहला लम्प 
पदमा ने बताया कि उनके एक ब्रैस्ट में 1980 में पहला लम्प उन्हें महसूस हुआ था। इस बात की जांच वो अपने फैमिली डॉक्टर से करवाने गई। मगर रिपोर्ट्स में कुछ न आने की वजह से उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वो कहती है कि उस वक्त यह चलन था कि 'नो पैन, नो कैंसर' यानी अगर दर्द नहीं हो रहा है तो कैंसर का कोई खतरा नहीं है। 

20 साल तक जाती रही हॉस्पिटल 
टेस्ट करवाने के बाद भी 20 साल तक पदमा हॉस्पिटल अपना चेकअप करवाने जाती रही। फिर भी उन्हें कैंसर का कोई सुराग नहीं मिला। 

साल 2000 में हुआ पहला ब्रैस्ट कैंसर 
साल 2000 में उनकी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि उन्हें ब्रैस्ट कैंसर है। इस बात को सुन उनके परिवार वाले और डॉक्टर भी अचंभा रह गए। मगर उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना इलाज करवाया और इस बीमारी से निजात पाया। 

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2011 में हुआ दूसरा ब्रैस्ट कैंसर 
पदमा 11 साल तक ठीक रही। मगर उन्हें दोबारा ब्रैस्ट कैंसर का सामना करना पड़ा। इस बार हालत गंभीर थी। उन्हें कीमोथेरपी करवानी होगी। यह शब्द सुनते ही उनके मन में अपने बाल को लेकर चिंता जागृत हुई। वो कहती है कि वो किसी 'डम्ब औरत' की तरह वो रोने लगी। उन्हें अपनी लंबी चोटी पर बहुत नाज था। जिसके जाने का अब उन्हें पूरा अंदाजा हो गया था। 

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पूरी तरह मुढ़वा लिए थे बाल,स्कार्फ को फिर भी कहा न 
वो अपने आपको टकलू कह कर संबोधित कर रही थी। कहती है कि पूरे बाल जाने के बाद भी वो स्कार्फ नहीं पहनना चाहती थी। उनका मानना था कि वो अभी भी उतनी ही खूबसूरत है जितनी पहले थी। अपने बच्चों को यह बात कह कर स्कार्फ को हटाने की बात की। 

2017 में हुआ तीसरा कैंसर 
इस बार उन्हें ब्रैस्ट कैंसर नहीं लंग कैंसर हुआ। जिससे वो थोड़ी निराश हो गई। मगर उन्होंने 'आपको अपनी मुश्किलों का सामना करना ही होगा' यह बात कह कर अपने निराशा को गायब किया और फिर से कैंसर को मात देने के लिए खड़ी हो गई। मेमोग्राफी करवाई और हर 2 महीने में हॉर्मोन इंजेक्शन ले बोन ट्रीटमेंट करवाया। इस बार भी उन्होंने कैंसर को मात दी। 

बच्चों की है शुक्रगुजार 
वो इस लड़ाई में सबसे ज्यादा अपने बच्चों की शुक्रगुजार है। वो कहती है कि उनके बच्चें भी उनके साथ इस कैंसर से लड़ रहे थे। दर्द में वो थी और उनके बच्चें रो रहे थे। उनके बेटे और बेटी ने हर लड़ाई में उनका साथ दिया। 

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इंटरनेशनल वुमन डे (8 मार्च)को होंगी 82 साल की 
उनका जन्मदिन भी सभी औरतों के लिए खास है। अगले साल वो 82 साल की हो जाएंगी। सच में उनका यह जज्बा दूसरों के लिए एक प्रेरणा से कम नहीं है। 
 

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