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'वेंटिलेटर' पर जिंदा थे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, जानें कब और क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 24 Aug, 2019 02:11 PM
'वेंटिलेटर' पर जिंदा थे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, जानें कब और क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को दिल्ली एम्स में निधन हो गया। उन्होंने दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली। किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके जेटली को कैंसर हो गया था, जिसके चलते उन्हें दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' यानि 'वेंटिलेटर' पर रखा गया है। आमतौर पर मरीज को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर तब रखा जाता है जब दिल, फेफड़े ठीक से काम नहीं करते हैं और वेंटिलेटर का भी फायदा नहीं होता है। ECMO के जरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है।

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चलिए आपको बताते हैं कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम क्या है और इससे मरीज के बचने के चांसेस कितने होते हैं।

क्या है लाइफ सपोर्ट सिस्टम?

लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life Support System) मेडिकल साइंस का एक बड़ा चमत्कार है, जो इंसान को बचाने में मदद करता है। कई बार मरीज की हालत बहुत ज्यादा नाजुक होने पर शरीर के कुछ अंग जैसे दिल, दिमाग, किडनी और लिवर आदि काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में मरीज को लाइफ सपोर्ट सिस्टम के जरिए जिंदा रखा जाता है और उसे कृत्रिम तरीके से सांस दी जाती है। इससे डॉक्टरों को इलाज के लिए और हालत स्थिर होने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है।

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कब पड़ती है जरूरत?

आमतौर पर जब शरीर के कुछ अंग ठीक से काम नहीं करते तभी इसकी जरूरत होती है। मगर कई बार निमोनिया, ड्रग ओवरडोज, ब्लड क्लॉट, सीओपीडी या सिस्टिक फाइब्रोसिस, फेफड़ों में इंजरी या अन्य बीमारियों के कारण फेफड़े निम्नतम साथ देते हैं। ऐसे में मरीज को इस सिस्टम की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा कर्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या सिर पर चोट लगने पर भी ये सिस्टम मददगार होता है। 

क्यों रखा जाता है लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर?

आमतौर पर जब व्यक्ति का इलाज संभव हो लेकिन गंभीर हालत के कारण उसके शरीर के अंग काम ना करे तो उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा जाता है।

-जब मरीज के फेफड़ें काम करना बंद कर दे और वो सांस ना ले पा रहा हो।
-दिल की धड़कन बहुत तेज चले और उसे हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो।
-अगर मरीज की किडनियां काम करना बंद कर दें।
-दिमाग में खून की आपूर्ति कम हो जाए या उसे स्ट्रोक हो।

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कैसे करता है काम?

सपोर्ट सिस्टम में एक पंप के द्वारा आर्टिफिशियल फेफड़े से बंलड पंप किया जाता है, ताकि दिल तक पर्याप्त मात्रा में खून पहुंच सके। इस सिस्टम में एक पतले पाइप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे कैथेटर (Catheter) कहते हैं। इसके साथ एक लंबा बैलून जुड़ा होता है। ये दोनों ही सपोर्ट सिस्टम व्यक्ति के पूरे शरीर में खून ऑक्सीजनयुक्त खून को पहुंचाने के लिए दिए जाते हैं, ताकि मरीज के अंग काम करते रहें और उसकी मौत न हो।

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