17 SEPTUESDAY2019 6:44:57 AM
Nari

Women Power: सड़क हादसे में मानसी ने खो दिया था पैर, आज हैं पैरा बेडमिंटन की चैम्पियन

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 10 Sep, 2019 12:01 PM
Women Power: सड़क हादसे में मानसी ने खो दिया था पैर, आज हैं पैरा बेडमिंटन की चैम्पियन

जीवन में कई बार ऐसी घटनाएं होती है जो कि आपके मन पर बहुत ही गहरी छाप छोड़ देती है। यह छाप इतनी गहरी होती है कि कई बार व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है, लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आपको इस घटना से पूरी तरह टूट जाना है या हिम्मत दिखा कर जीवन में आगे बढ़ना हैं। एक सड़क हादसे में अपना पैर खोने के बाद पेरा बैडमिंटन प्लेयर मानसी जोशी ने न केवल अपनी हिम्मत से अपना नाम को रोशन किया बल्कि देश को भी नई पहचान दिलवाई।  हाल ही में उन्होंने बीडब्लयूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता पैरा बैडमिंटन में गोल्ड मैडल हासिल किया। चलिए बताते है उनके इस सफर के बारे में .... 

PunjabKesari,Manasi Joshi Paralympics, Badminton, Nari

पुलेला गोपीचंद की हैं शिष्य

 मानसी जोशी इलेक्ट्रिॉनिक इंजीनियर है। मानसी इससे पहले तीन बार पारुल के साथ कोर्ट में भीड़ चुकी है, लेकिन हर बार उसे हार ही मिलती थी। इस बार पारुल को हार कर मानसी ने गोल्ड हासिल किया है। मानसी भी पुलेला गोपीचंद अकेडमी से ही ट्रेनिंग लेती हैं। यहीं से पीवी सिंधु भी ट्रेनिंग लेती हैं। 6 साल की उम्र से ही वह अपने पिता के साथ बैडमिंटन खेलती थी। इंजीनियरिंग करने के बाद भी उन्होंने बैडमिंटन जारी रखा पर उन्हें यह नही पता था कि यही बैडमिंटन एक दिन उनका करियर बन जाएगा। 

PunjabKesari,Manasi Joshi Paralympics, Badminton, Nari

एक्सिडेंट में खो दिया था पैर

मानसी शुरु से ही काफी स्ट्रांग रही हैं। असली हिम्मत उन्होंने तब दिखाई जब एक्सीडेंट के दौरान अपना पैर खो दिया था। 2011 में ऑफिस जाते समय एक सड़क हादसे में उन्होंने अपना पैर खो दिया था। इतना ही नही उनकी दोनो बाजू क्षतिग्रस्त हो गई थी व पूरे शरीर पर कई जगह चोट लगी थी। इतना ही नही उन्हें अस्पताल पहुंचने में 10 घंटे लगे औप 12 घंटे तक उनका ऑपरेशन चला था। उनकी चोट गैग्रीन न बन जाए इसलिए डॉक्टर्स ने उनका पैर काट दिया था। इसके बाद वह पिछले 5 साल से एक ही सॉकेट का इस्तेमाल कर रही थी। जिस कारण उनका वर्कआउट काफी कम हो गया हैं।  अब वह अपने लिए नए वॉकिंग प्रोसथेसिस सॉकेट का इस्तेमाल कर रही है।

PunjabKesari,Manasi Joshi Paralympics, Badminton, Nari

खेल को समर्पित किया जीवन 

अस्पताल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपना सारा जीवन खेल को ही समर्पित कर दिया। तकरीबन 50 दिन के बाद वह अस्पताल से बाहर आई थी। उसके बाद अपना सारा समय खेल को देकर वह न केवल देश की बल्कि दुनिया की पैरा बैडमिंटन खेल की चैंपियन बन गई। 

PunjabKesari,Manasi Joshi Paralympics, Badminton, Nari

फिटनेस पर किया ध्यान केंद्रित

खुद को गेम्स के अनुसार फिट बनाने के लिए मानसी ने बहुत ही कठिन ट्रेनिंग की हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि, एक दिन वह तीन सेशन ट्रेनिंग के करती थी। वजन को कम करके मांसपेशियों को मजबूत बनाया। जिम में अधिक समय व्यतीत करते हुए 1 हफ्ते में ट्रेनिंग के 6 सेशन किए। इतना ही नही इसके साथ अपने गेम को अच्छा करने के लिए स्ट्रोक्स पर किया। मानसी का मानना है कि कृत्रिम अंग पर लगाए जाने वाला शुल्क, जीएसटी को माफ किया जाना चाहिए। इनकी कीमत 20 से 25 लाख होती है, हर 5 साल में इसे बदलने की जरुरत होती हैं। इतना ही नही इनका किसी भी तरह का बीमा नही होता है, दुनिया में कोई भी ओर चीज लो तो उसका बीमा किया जाता है लेकिन इनका नही होता हैं। 

लाइफस्टाइल से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए डाउनलोड करें NARI APP

Related News