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भारत की 10 महिला राजनेत्रियां, जिन्होंने राजनीति में पुरुषों को दी टक्कर

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 21 Sep, 2019 03:41 PM
भारत की 10 महिला राजनेत्रियां, जिन्होंने राजनीति में पुरुषों को दी टक्कर

भारत की महिलाओं ने अपनी हिम्मत व जोश के साथ न केवल से ही पुरुषों के बराबर हो कर काम संभाला है बल्कि उन्हें उन्ही के क्षेत्र में टक्कर देकर जीत भी हासिल की हैं। महिलाओं के सामन व न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व के चलते भारतीय महिलाओं ने राजनीति के क्षेत्र में भी बड़ा लंबा सफर तय किया है व अभी भी कर रही हैं। चलिए आज हम आपको भारत की कुछ ऐसी ही प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों के बारे में बताते हैं। 

सोनिया गांधी

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कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1998 में राजनीति में प्रवेश किया था। 2006 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का गठन किया था। अब तक इनका कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल रह चुका हैं।

मायावती

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विनम्र, खुशमिसाज मायावती का राजनीति से किसी भी तरह का कोई संबंध नही था, लेकिन दलित राजनेता काशीराम ने उन्हें इस क्षेत्र में आने के लिए राजी किया था। इसके बाद उन्होंने 1995 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के तौर पर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। 

प्रतिभा पाटिल

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राष्ट्रपति के पद रह चुकी प्रतिभा पाटिल से हर कोई वाकिफ हैं। 1962 में महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के तौर पर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। उसके बाद 2007 से 2012 तक उन्होंने भारत के 12 वें राष्ट्रपति का पद संभाला। 

शीला दीक्षित 

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शीला दीक्षित न केवल सबसे अधिक समय तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही है बल्कि उन्होंने राजनीति में रहते हुए भारत की महिलाओं की स्वतंत्रता व सम्मान के लिए कई कार्य भी किए हैं। इनके ससुर उमाशंकर दीक्षित केंद्रीय मंत्री होने के साथ नेहरु परिवार के काफी करीब थे। इंदिरा गांधी को इनकी कार्य क्षमता के बारे में उस समय पता लगा वह अपने पिता के साथ राजनीति का काम करवा रही थी।

ममता बनर्जी 

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ममता बनर्जी अपने काम के चलते पश्चिम बंगाल में दीदी के नाम से जानी जाती हैं। 1997 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पार्टी की स्थापना की थी। 2011 में दीदी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 34 साल का शासन खत्म कर पहली बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थी। उन्होंने अपनी पार्टी में 35 प्रतिशत महिलाओं को लिए सीट आरक्षित की जिसमें से 50 प्रतिशत स्थान स्थानीय निकायों के लिए हैं।

वसुंधरा राजे सिंधिया

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वसुंधरा राजे सिंधिया ने 2013 से 2018 तक राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया हैं। इतना ही नही 2018 में उन्हें वर्ष की मुख्यमंत्री की उपाधि देकर सम्मानित किया गया। वसुंधरा के राजनीतिक सफर की शुरउआत बचपन से ही हो चुकी थी क्योंकि उनके माता- पिता भी राजनेता रहे हैं। 

सुषमा स्वराज

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सुषमा स्वराज ने बतौर विदेश मंत्री रह कर देश के लिए बहुत सारे काम किए हैं। इन्होंने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत कॉलेज समय में ही 25 साल की उम्र में कर दी थी। बीजेपी में कैबिनेट मंत्री बनने के साथ यह  इंदिरा गांधी के बाद यह पद संभालने वाली देश की दूसरी महिला थी। 

सुप्रिया मुले

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सुप्रिया मुले राज्यसभा के सदस्य शरद पवार की बेटी है। इन्हें भारत की नई पीढ़ी के राजनेताओं की उभरती हुई आवाज माना जाता है। 2011 में इन्होंने कन्या भ्रूण हत्या के विरोध में एक सफल अभियान चलाया था। इसके बाद राजनीति में युवा महिलाओं को मंच देने के लिए राष्ट्रवादी युवती कांग्रेस के नाम से एक विंग का गठन किया।

अंबिका सोनी 

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कांग्रेस में पर्यटन, संस्कृति, सूचान व प्रसारण का काम संभालने के साथ इन्होंने भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने में काफी सहयोग दिया  है। ‘‘अतुल्य भारत’’ अभियान शुरु करने का श्रेय इन्हें ही जाता है। 

वृंदा करात

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अपनी पार्टी में सबसे शक्तिशाली निर्णय लेने वाली वृंदा करात ने अपनी वायुसेना में नौकरी छोड़ कर राजनीति को ज्वाइंन कियाथा। 2005 में यह सीपीआई ( एम ) की प्रतिनिधि चुनी गई थी।

 

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