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सिर्फ 2 सिलाई मशीनों से अनीता ने शुरू किया था बिजनेस, आज करोड़ों में है कमाई

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 01 Sep, 2019 04:20 PM
सिर्फ 2 सिलाई मशीनों से अनीता ने शुरू किया था बिजनेस, आज करोड़ों में है कमाई

मुंबई में जन्मी फैशन डिजाइनर अनीता डोंगरे का नाम आज दुनियाभर में है। 2 सिलाई मशीनों से शुरू हुआ उनका सफर आज इस मुकाम पर पहुंच चुका है कि वह किसी परिचय की मोहताज नहीं है। अपनी प्रतिभा तथा कौशल के दम पर आज उन्होंने अपना फैशन बिजनैस खड़ा कर लिया है। आज उनके डिजाइन किए परिधान 4 ब्रांड्स 'एंड', 'ग्लोबल देसी', 'अनीता डोंगरे' तथा 'अनीता डोंगरे ग्रासरूट' के तहत दुनियाभर में बिकते हैं। लगभग 30 सालों से फैशन जगत में सक्रिय अनीता ने हाल ही में अपने ब्रांड के 2 दशक भी पूरे कर लिए हैं।

 

आज उनके डिजाइन किए हुए कपड़े बड़ी से बड़ी सैलिब्रिटीज पसंज करती है और फैशन शोज में भी उन्हें पेश करती हैं। इनमें कैटरीना कैफ, करीना कपूर खान, आलिया भट्ट, भूमि पेड़नेकर, श्रद्धा कपूर, शाहिद कपूर तथा उनकी पत्नी मीरा राजपूत कपूर से लेकर प्रियंका चोपड़ा के देवर केविन जोनास तथा उनकी पत्नी डैनियम जोनास तक शामिल रहे हैं।

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पेश है अनीता से हुई एक बातचीत के कुछ अंश...

20 साल पहले शुरू किया था बिजनेस

अनीता का कहना है, 'मैंने अपना ब्रांड करीब 20 साल पहले शुरू किया था लेकिन मैं फैशन बिजनैस में 30 सालों से हूं। मैंने सबसे पहले घर से काम किया था। मेरी शुरूआत बहुत छोटी थी। मैंने मुंबई के एस.एन.डी.टी बुमन्स यूनिवर्सिटी से डिजाइनिंग की पढ़ाई पूरी की। जब मैंने खुद का फैशन बिजनेस शुरू करने का फैसला किया तो मैंने अपने घर की बालकनी में अपनी छोटी-बहन के साथ मिलकर 2 सिलाई मशीनों से काम शुरू किया था।'

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अब 2000 लोगों के साथ करती हैं काम

'मुझे डिजाइनों से प्यार था। लगभग 30 साल पहने मैं एक मास्टर जी और दो टेलरों के साथ बैठकर किसी नए डिजाइन पर सोच-विचार किया करती थी। मेरा काम आज भी लगभग वही है। बस फर्क यह है कि आज मैं लगभग 2000 लोगों के साथ काम कर रही हूं।'

कैसा रहा अब तक फैशन का अनुभव?

उन्होंने कहा, 'तब मैं बहुत छोटी थी, कबीब 13-14 साल की रही होंगी लेकिन एस.एन.डी.टी में पढ़ते वक्त डिजाइनिंग में मेरी असल रुचि पैदा हुई। पहले दिन कॉलेज में कदम रखते ही मुझे एहसास हो गया था कि मैरा जन्म इसलिए हुआ। तभी मैंने मां से कह दिया था कि एक दिन मैं अपना फैशन बिजनैस खड़ा करूंगी। यह मेरा केवल शौक ही नहीं था। मैंने अरमानी, कैल्विन और उस वक्त के मशहीर डिजाइनरों के बारे में अध्ययन किया। 1984 में मैंने अपनी पढ़ाई पूरी। इसके बाद मैंने 2 साल वहां पढ़ाया भी और एक डिजाइन हाऊस में काम भी किया।

एग्जीबिशन के पैसों से खरीदी थी पहली सिलाई मशीनें

कॉलेज में पढ़ते वक्त ही मैं 2 फैशन एग्जीबिशन कर चुकी थी इसलिए मेरे पास कुछ पैसे जमा हो गए थे। बाद में में जब मुझे बड़ा ऑर्डन मिला तो डैडी ने मुझे कुछ पैसे उधार दिए थे। सबसे पहले मैंने 5000 रुपए से एक कलैक्शन बनाया, जिसे मैंने मुंबई के एक बुटीक को भेज दिया जो एक ही हफ्ते में सारा बिक गया। बहुत खुशी होती है जब आपके काम की सराहना होती और उसे पसंद किया जाता है। नई-नई डिजाइन्स के कपड़े तैयार करना और लोगों को आपके कपड़े पहने हुए देखना एक अलग ही अहसास है।

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कब लांच किया अपना पहला फैशन लेबल?

मेरे पहले फैशन लेबल का नाम था 'मास'। इसे मैंने अपनी छोटी बहन के नाम पर रखा था लेकिन उस वक्त कोई भी स्टोर मेरे लेबल के नाम पर कपड़े नहीं बेच रहा था। वास्तव में मेरा पहला ब्रांड 1999 में लांच हुआ था। तब हम पहले ब्रांड थे, जिसने सिंपल ट्राऊजर जैसी ड्रैसेज महिलाओं के लिए तैयार करनी शुरू की। ये परिधान उन महिलाओं के लिए थे जो कामकाजी थी, सफर करती थी। वे ऐसे कपड़े पहनना चाहती थी, जो उन्हें ग्लोबल लुक दें।

8 साल पहले शुरू किया था ब्राइडल वियर का काम

करीब 8 साल पहले हमने ब्राइडल वियर शुरू किया। हम पहली ब्रांड थे जिसने भारी और बेहद महंगे लहंगों के ट्रैंड को तोड़ा। मेरे ख्याल से मैं पहली भारतीय डिजाइनर हूं जिसने लहंगों को आरामदायक बनाया और उनमें पॉकेट्स लगाई।

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आज सबकुछ बदल चुका है। समाज बदल रहा है और महिलाएं भी बदल रही हैं। एक महिला डिजाइनर होने के नाते आज की महिलाओं में आ रहे बदलाब को अपने डिजाइन्स में जाहिर करना मेरी जिम्मेदारी भी है।

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