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घर के सूनेपन से पेरेंट्स हो सकते हैं अकेलेपन के शिकार, यूं करें बचाव

घर के सूनेपन से पेरेंट्स हो सकते हैं अकेलेपन के शिकार, यूं करें बचाव
Views:- Wednesday, January 2, 2019-12:56 PM

एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम यानि अकेलापन। जब बच्चे बड़े होते हैं तो उन्हें अपनी आगे की पढ़ाई को पूरा करने के लिए या नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर या फिर विदेश जाना पड़ता है। घर सूना हो जाता है। पेरेंट्स से बच्चों की दूरी सहन नहीं होती जिस कारण वह गंभीर मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके कारण और इससे बचने के तरीके।

 

क्या है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम?

बच्चों को किसी वजह से घर छोड कर जाना पढ़ता है जिससे उनके माता-पिता की मनोदशा काफी खराब हो जाती है। इसे मनोविज्ञान भाषा में एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम कहा जाता है। जीवन में अचानक आने वाले इस खालीपन की वजह से कई बार पेरेंट्स डिप्रेशन की शिकार हो जाते हैं। स्थिति इतनी खराब हो जाती है जिससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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घर का सूनापन

मां-बाप बचपन से लेकर बड़े होने तक बच्चों का हर वक्त ख्याल रखते हैं और घर पर हमेशा रोनक लगी रहती है। बच्चे बड़े होेते ही पेरेंट् को अकेला छोड़ देते हैं। जिससे घर सूना हो जाता है। यह सूनापन उन्हें रास नहीं आता जिससे वह अकेलापन के शिकार हो जाते हैं।

 

एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम से बचाव

एंप्टी नेस्ट सिंड्रोम बच्चों व माता-पिता के रिश्ते पर निर्भर करता है। अकेले पिता और मां के लिए यह जुदाई सहना बहुत दुखदायी होती है लेकिन यदि आप थोड़ी कोशिश करें तो इस से बाहर निकल सकते हैं।

 

सच्चाई को स्वीकार करें

कई बार लोग अकेलेपन से जूझते रहते हैं और इस समस्या हल करना उनके बस में नहीं होता। ऐसे में आप को यह स्वीकार करना होगा कि अब आपके बच्चे अपने दम पर अपनी ज़िंदगी जीने जा रहे हैं।

 

जरूरी है मानसिक तैयारी

बच्चों से दूरी के कारण कई बार माता-पिता डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं। ऐसे में खुद को मानसिक रूप से तैयार करना बहुत जरूरी होता है। हालांकि महिलाएं समय के साथ इस बदलाव के लिए पहले से ही खुद को मानसिक रूप से तैयार रखती हैं। ऐसा करने से आप एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम का शिकार होने से बच जाएंगे।

 

खुद के लिए निकालें समय

घर का काम व बच्चों की परवरिश के चलते महिलाएं अपने लिए थोड़ा सा भी समय नहीं निकाल पातीं। खाली समय में आप अपनी हॉबीज को पूरा कर सकती हैं। इसके अलावा सुकून भरे इस दौर को जी भर कर एंजॉय कर सकती हैं।

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पति-पत्नी दें एक दूसरे को क्वॉलिटी टाइम

कई बार आपका सारा ध्यान बच्चों पर रहता है और पाटर्नर को नज़र अंदाज कर देते होंगे। अब समय है कि आप दोनों फिर एक-दूसरे को समय दें और वैवाहिक जीवन का आनंद लें।

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घर पर अकेले न रहें

आप चाहे अकेले हों या फिर दाम्पत्य हमेशा ज्यादा समय मेल-जोल बढ़ाने में बिताएं। अपने दोस्तों से मिलें, सैर करने जाएं या नई चीजों को रोटीन में शामिल करें ताकि आपको अकेलापन कम महसूस हो और आप खुश रहें।


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