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हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर करें सुंदरकांड का पाठ, मिलेगा शुभ फल

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 08 Apr, 2020 04:57 PM
हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर करें सुंदरकांड का पाठ, मिलेगा शुभ फल

संकटमोचन हनुमान जी अपने भक्तों से जल्दी ही खुश हो जाते है। ऐसे में वे जल्दी ही अपनी कृपा लोगों पर बरसाते हैं। मान्यता है कि उन्हें खुश करने के लिए सुंदरकांड का पाठ करना सबसे अच्छा उपाय है। इस पाठ का जाप जिस घर में होता है उस पर हनुमानजी अपनी कृपा बनाए रखते हैं। इसके साथ ही भक्तों की मनोकामना जल्दी ही पूरी कर देते है। सुंदरकांड का पाठ करने से बजरंगबली के साथ प्रभु श्रीराम और माता सीता का भी आशीर्वाद मिलता है। इस पाठ को आज हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर सभी को जरूर पढ़ना चाहिए। मगर क्या आप इस पाठ के पीछे का धार्मिक महत्व जानते हैं? तो चलिए आज हम आपको इसका धार्मिक महत्व बताते हुए इस पाठ को पढ़ने से मिलने वाले शुभ फल के बारे में बताते हैं...

सुंदरकांड नाम कैसे पड़ा?

श्री रामचरितमानस में कुल 7 अध्याय है। इसमें हनुमानजी के अलौकिक और संकटमोचन रूप का वर्णन किया गया है। इस पाठ का पंचम सोपान सुंदरकांड है। इसमें मुख्य रूप से 3 श्लोक, 2 छंद, 58 चौपाई, 60 दोहे और लगभग 6241 शब्द है। इसके पांचवें अध्याय को सुंदरकांड के नाम से जाना जाता है।

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इस पाठ की हर लाइन में लोगों को जिंदगी में कभी भी हार न मानने की सीख दी गई है। इस पाठ का जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ सफलता के रास्ते खोलता है। इसके साथ ही इस पाठ को किसी शुभ अवसर पर पढ़ना काफी फलदाई होता है। सुंदरकांड में हनुमानजी के वीर रूप की गाथा का वर्णन किया गया है। पूरी रामायण में सुंदरकांड के पाठ को विशेष महत्व दिया जाता है। इस पाठ में हनुमान का सीता माता को खोजते हुए लंका जाना, सीता माता को श्रीराम जी का संदेश देना, अपनी पूंछ से लंका को जला कर वहां से श्रीराम जी के पास वापसी तक के घटनाक्रम हैं। यह एक सच्चे भक्त की जीत का कांड है जो अपनी शक्ति और साहस से असंभव को भी संभव कर सकता है।

रामायण में सुंदरकांड के पाठ में सिर्फ प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमानजी की शक्ति और विजय का  वर्णन किया गया है। इस पाठ को पढ़ना काफी फलदाई होता है। तो चलिए जानते हैं सुंदरकांड के पाठ से जुड़ी कुछ खास बातें...

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सुंदरकांड पाठ करने से क्‍या फायदे है?

हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथ रामायण में सुंदरकांड का पाठ करने से पाप दूर होने के साथ विपत्तियां नष्ट होती हैं। मन का डर दूर हो पॉजिटिविटी आती है। व्यक्ति में आत्मविश्वास की भावना बढ़ती है। इसके साथ ही दुश्मनों से छुटकारा मिलता है। घर में खुशहाली भरा माहौल बना रहता है। 

सुंदरकांड पाठ कैसे करना चाहिए?

अक्सर लोग सुंदरकांड का पाठ शुरू कर रोजाना इसका 1-1 अध्याय पढ़ते हैं। मगर ऐसा करने से इस पाठ का पूरा फल नहीं मिल पाता है। इसलिए सुंदरकांड का पाठ एक ही बार में सारा पढ़ना चाहिए। यहां आपको बता दें इस पाठ को पूरा करने में लगभग 40 मिनट का समय लगता है। इसे आज हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर पढ़ना काफी फलदाई रहेगा।

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सुंदरकांड पाठ कब करना चाहिए? 

इस पाठ को सुबह-शाम कभी भी किया जा सकता है। इस पाठ को ब्रह्मुहूर्त में करना काफी लाभदायक होता है। मगर इसे जल्दबाजी में पढ़ने की जगह धैर्य और शांत मन से पढ़ना चाहिए। इसे खुशी और पूरी आस्था के साथ पढ़ने से भगवान जी कृपा मिलती है। आप आज हनुमान जयंती के दिन पर भी इसे पढ़ कर संकटमोचन हनुमानजी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

सुंदरकांड का पाठ मंगलवार या शनिवार कब करना चाहिए?

भगवान की भक्ति तो कभी भी की जा सकती है। ऐसे में इस पवित्र पाठ को रोजाना सुबह और शाम को करना चाहिए। आप चाहें तो सुंदरकांड के पाठ को किसी भी शुभ अवसर पर कर सकते हैं। इसे आज हनुमान जयंती के शुभ मौके पर पढ़ें। इससे घर- परिवार में खुशियां और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसे मंगलवार या शनिवार के दिन शुरू किया जा सकता है।

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