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शीला दीक्षितः महिलाओं के लिए जेल में काटे थे 23 दिन, जानिए इनकी लाइफस्टोरी

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 31 Mar, 2020 05:20 PM
शीला दीक्षितः महिलाओं के लिए जेल में काटे थे 23 दिन, जानिए इनकी लाइफस्टोरी

राजनीति में एक खास पहचान बनाने वाली वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित दिल्ली की दूसरी महिला मुख्य मंत्री थी। शीला दीक्षित ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान महिलाओं के लिए बहुत काम किया हैं। चलिए आज उनकी बर्थ-एनवर्सरी पर आज हम आपको बताते हैं उनके जीवन व राजनीतिक सफर से जुड़ी कुछ खास बातें...

 

पंजाब के कपूरथला में हुआ था जन्म 

उनका जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। जबकि उनकी पूरी शिक्षा दिल्ली के जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट स्कूल में हुई। उनकी शादी यूपी के आईएएस अधिकारी विनोद दीक्षित के साथ हुई के साथ हुई थी, जो बंगाल के पूर्व राज्यपाल उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे।

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ससुर से सीखें राजनीतिक गुर

शीला ने राजनीति के गुर इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में गृह मंत्री रह चुके यानि अपने ससुर जी से सीखें। वह 15 साल ( 1998 से 2013 ) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रऔर साथ ही कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं।

नेहरु से मिलने पैदल मूर्ति भवन पहुंची थी शीला

15 साल की उम्र में जब शीला ने रेडियों पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु का प्रोग्राम सुना तो उन्होंने उनसे मिलने का मन बना लिया। उस वक्त वो प्रधानमंत्री से मिलने के लिए तीन मूर्ति भवन तक पैदल चलकर गई थी।

दोस्तों का झगड़ा सुलझाते हुए विनोद और शीला आए थे पास

लव स्टोरी की बात करें तो दोनों एक कॉमन दोस्त का झगड़ा सुलझाते समय करीब आ गए थे। उस समय दोनों एक ही बस में सफर किया करते थे। तभी एक दिन अचानक विनोद ने शीला से कहा कि वो अपनी मां को कहने जा रहे है कि उन्हें लड़की मिल गई है। तभी शीला ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने लड़की से इस बारे में बात की। इसपर विनोद ने फिल्मी स्टाइल में कहा कि वो लड़की इस वक्त मेरे साथ है। हालांकि शादी को लेकर विनोद के घर पर काफी विरोध हुआ क्योंकि शीला ब्राह्मण परिवार से नही थी। मगर, फिर दोनों की शादी को मंजूरी मिल गई।

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महिलाओं के लिए 23 दिन की जेल की यात्रा

राजनीति सफर के दौरान शीला ने महिलाओं के लिए काफी सहारनीय कदम उठाएं। यहां तक कि वो महिलाओं के लिए 23 दिन जेल भी रही।

. दूसरे शहरों से दिल्ली में काम करने आई महिलाओं के लिए दो होस्टल बनवाए।
. महिलाओं को समाज में बराबरी का स्तर दिलवाने के लिए बहुत से अभियानों का नेतृत्व भी किया। 
. अगस्त 1990 में उत्तरप्रदेश में अपने 82 साथियों के साथ जेल की यात्रा कर चुकी हैं। क्योंकि वह महिलाओं पर समाज के अत्याचारों के खिलाफ खड़ी हुई थी।
. लोकसभा की समितियों में रहने के साथ साथ संयुक्त राष्ट्रीय में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि भी रह चुकी है।
. वह दीक्षित इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की सचिव के पद पर भी काम कर चुकी हैं।

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रंग-बिरंगे फुटवियर की थी शौकीन

राजनीति में अपनी धाक जमाने वाली शीला फिल्मों का काफी शौकीन थी। उन्हें किताबें पढ़ना भी काफी पसंद थी। इसके अलावा उन्हें रंग-बिरंगी फुटवियर का भी काफी जुनून था। अपनी आत्मकथा में शीला जी ने बताया था कि उनके समय में उन्हें 5 रुपए पॉकेट मनी मिलती थी, जिसे जोड़कर वो अपने लिए सिंपिल डिजाइन वाले रंग-बिरंगे फुटवियर खरीदती थीं।

निधन

अपने साहस और अच्छे कामों के लिए जाने वाली शीला दीक्षित का निधन 20 जुलाई, 2019 में हुआ। दिल का दौरा पड़ने के कारण वो इस दुनिया को अलविदा कह गई। भले ही वो इस दुनिया में ना रही हो लेकिन उनके द्वारा किए गए अतुलय काम हमेशा उन्हें लोगों के दिलों में जिंदा रखेंगे।

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