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मायवती को कहते हैं Iron Lady, घर में ही हुआ था पहला भेदभाव

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 18 Mar, 2019 02:29 PM
मायवती को कहते हैं Iron Lady, घर में ही हुआ था पहला भेदभाव

इंडियन पॉलिटिक्स की जमीन पर बहुत कम ही महिलाएं हैं, जो विश्व भर में फेमस है। उन्‍हीं में से एक है बहुजन समाज पार्टी की लीडर मायावती। जी हां, देश के सबसे ज्‍यादा जिलों वाले राज्‍य उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में मायावाती एक प्रमुख नाम है। राज्‍य में लगभग 5 बार मुख्‍य मंत्री बन चुकी मायावती को देश में 'आयरन लेडी' के नाम से जाना जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मायावती का असली नाम नैना देवी है। ऐसे ही मायावती से जुड़ी कई और बातें हैं जो उन्‍हें महिलाओं के बीच आदर्श बनाती हैं। 

 

घर में ही हुई थी भेदभाव का शिकार

मायावती का जन्म एक गरीब और दलित परिवार में 15 जनवरी 1956 में हुआ। उनके पिता प्रभु दास पोस्ट ऑफिस में क्लर्क और मां रामरती गृहणी थीं। मायावती ने 6 भाइयों और 3 बहनों के परिवार में बचपन से ही भेदभाव का सामना किया था। उनके पिता ने बचपन से ही सभी भाईयों को पब्लिक स्कूलों में डाला और बहनों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने भेजा लेकिन मायावती सभी भाई-बहनों में से पढ़ाई में सबसे आगे थी।

 

टीचर बनकर की एलएलबी की पढ़ाई

इंद्रपुरी इलाके के प्रतिभा विधालय से मायावती ने शुरुआती पढ़ाई की। बचपन से ही माया का सपना था कलेक्टर बनने का इसलिए उन्होंने बीएड करने के तैयारी करने शुरू की थी। वो दिन में बच्चों को पढ़ातीं और रातभर अपनी पढ़ाई करतीं। 1977 का वो दौर था, जब उनके आर्थिक हालातों ने उन्हें एक स्कूल टीचर बना दिया था लेकिन अपनी मेहनत से उन्होंने ना सिर्फ बीएड बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी भी पढ़ाई भी पूरी की।

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1984 पहली बार बनी थीं सांसद

1984 में जब कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी बनाई तो मायावती टीम में कोर मेंबर थीं। 1984 में वह बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गईं।

 

देश की पहली दलित सीएम महिला

1995 में मायावती पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं। इसी के साथ उनके नाम दो रिकॉर्ड दर्ज हुए। एक तो प्रदेश की सबसे युवा सीएम का और दूसरा देश की पहली महिला दलित मुख्यमंत्री का।

 

विरोधों का डटकर किया सामना

जब मायावती को राजनीति में मंत्री के रुप में खड़ा करने की बात हुई थी, उस समय कई दिग्गजों ने हर तरफ से दबाव बनाया लेकिन मायावती पर किसी का असर नहीं हुआ। ऐसे लोग भी मायावती का लोहा मान गए, जो किसी महिला को मंत्री के तौर पर बर्दाश्त नहीं कर सकते थ।

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राजनीति में आया बड़ा बदलाव

उत्‍तर प्रदेश का नाम देश के सबसे बड़े राज्‍यों में शुमार है और इस राज्‍य की राजनीति में हमेशा से पुरुषों का दबदबा रहा है। मगर वर्ष 1977 में जब मायावती काशीराम के संपर्क में आईं तो देश के इस राज्‍य को एक स्‍ट्रॉन्‍ग महिला लीडर मिलने की उम्‍मीद नजर आई और वर्ष 1995 में जब मायावती पहली बाद राज्‍य के मुख्‍यमंत्री पद पर बैठीं तो राज्‍य की राजनीति का हुलिया ही बदल गया। मायावती ने न सिर्फ भ्रष्‍ट अफसरों को सस्‍पेंड किया बल्कि राज्‍य में कई अच्छे बदलाव भी किए। 

 

सिंगल रहकर भी खुश 

भारत में लड़कियों के 20 की उम्र पार करने के बाद से ही उनके परिवार में उनकी शादी की बातें शुरु हो जाती हैं। लोगों की मानसिकता आज भी नहीं बदली है और लड़कियों के बड़े होते ही पेरेंट्स उसकी शादी के बारे में सोचने लगते हैं क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि जीवन में एक समय ऐसा आता है जब अकेले रहना मुश्किल हो जाता है। मगर मायावती ने आजतक शादी नहीं की और इस बात को साबित कर दिया है कि महिलाएं सिंगल रहकर भी कामयाब और खूश रह सकती हैं। 

 

सादगी-पसंद पहरावा

मायावती इतनी बड़ी और फेमस लीडर होने के बावजूद एक साधारण जीवन ही जीती हैं। खासतौर पर उनका पहनावा बहुत ही अलग है। वह कॉटन का बंदगला कुर्ता, पैजामा और दुपट्टा पहनती हैं। भारतीयों में लोगों के पहनावे से उनकी एजुकेशन और रहन सहन का अंदाजा लगया या जाता है जबकि आपको बता दें कि मायाव‍ती ने बीए और एलएलबी के बाद आईएएस की पढ़ाई भी की मगर राजनीति में आने की वजह से वह आईएएस की परीक्षा नहीं दे पाईं। इतना पढ़ने लिखने के बाद भी मायावती बेहद साधारण जीवन बिताती हैं इसलिए पहले अपने काम पर ध्‍यान दें क्‍योंकि काम अच्‍छा होगा तो सब आप पर ध्‍यान देंगे। 

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कड़े फैसलों से नाम कमाया 

सत्‍ता में आते ही मायावती ने दो काम किए पहला भ्रष्‍टाचार फैला रहे अफसरों का तबादला करने की जगह उन्‍हें सस्‍पेंड कर दिया और दूसरा शहरों का सुंदरीकरण करवाया ताकि लोगों के पास शहर में घूमने फिरने के लिए अच्‍छी और साफसुथरी जगह हो। उनका मानना है कि आप भी कुछ ऐसा करें जो दूसरों के लिए मिसाल हो जाए तब ही आपके मेहनत करने का कुछ फायदा है इसलिए जो काम करें दिल से करें और काम इतना अच्‍छा करें कि दूसरे लोग भी उस काम को दोहराएं। 

 

लोगों की कम अपनी ज्‍यादा सुनें

मायावती के लिए सत्‍ता में जमे रहना कभी आसान नहीं था। जब-जब वे सत्‍ता में आईं लोगों ने उन्‍हें गंदे-गंदे शब्‍दों से संबोधित किया, मगर मायावती के कदम कभी नहीं डगमगाए क्‍योंकि वह हमेशा अपने दिल की सुनती थीं और वही करती थीं, जो उन्‍हें सही लगता था। एक बार तो विपक्ष के किसी नेता ने उन्‍हें सार्वजनिक तौर पर एक गलत शब्‍द से संबोंधित किया था तब ही मायावती घबराई नहीं और आगे बढ़ती गईं। जीवन में सफल होना है तो कठिनाईयों का सामना तो करना ही पड़ेगा। इस बात के लिए आपको भी खुद को तैयार करना चाहिए और परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। 

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