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क्या ब्वॉयफ्रेंड के लिए रख सकते हैं व्रत? जानिए करवा चौथ से जुड़ी दिलचस्प बातें

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 16 Oct, 2019 03:58 PM
क्या ब्वॉयफ्रेंड के लिए रख सकते हैं व्रत? जानिए करवा चौथ से जुड़ी दिलचस्प बातें

सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। हालांकि आजकल कुवांरी लड़कियां भी अपने ब्वॉयफ्रेंड, मंगेतर या फ्यूचर हसबैंड के लिए व्रत रखती हैं लेकिन फिर भी उनके मन में यह सवाल होता है कि शादी से पहले यह व्रत रखना सही है? वहीं करवा चौथ से जुड़े और भी कई ऐसे सवाल है जो महिलाओं के मन चलते रहते हैं, जैसे छलनी से ही चांद क्यों देखा जाता है? आज अपने इस पैकेज में आपको करवा चौथ से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातें बताएंगे। चलिए जानते हैं करवा चौथ से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।

 

क्या ब्वॉयफ्रेंड के लिए रख सकते हैं व्रत?

ज्योतिषों की मानें तो कुवांरी लड़कियां भी यह व्रत रख सकती हैं। अगर आप किसी भी रिश्ते में नहीं हैं तब भी आप इस व्रत को रख सकती हैं। इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता लेकिन पूजा पूरे विधी-विधान से करें।

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नियम होते हैं अलग

करवाचौथ का व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए होता जरूर है लेकिन इसके नियम अलग-अलग होते हैं। अगर आप अपने ब्वॉयफ्रेंड या मंगेतर के लिए व्रत नहीं रख रही हैं तो निर्जला व्रत ना करके निराहार व्रत रखें। यही नहीं व्रत के बाद सिर्फ चांद की पूजा ना करें। शिव और पार्वती की अराधना करने से भी आपके मनचाहे वर की इच्छा भी पूरी होती है। अगर आप किसी रिश्ते में नहीं है तो पार्वती माता से अपने होने वाले जीवनसाथी की लंबी उम्र की कामना जरूर करें।

छलनी से चांद क्यों देखते हैं?

करवा चौथ की कथा के मुताबिक, सात भाइयों की एक बहन वीरावती को उसके भाइयों ने स्नेहवंश भोजन करवाने के लिए छल से चांद की बजाए छलनी की ओट में दीपक दिखाकर भोजन करवा दिया था, जिससे उसका व्रत भंग हो गया। इसके बाद उसने पूरे साल चतुर्थी का व्रत किया। दोबारा करवा चौथ आने पर उसने विधिपूर्वक व्रत किया और उसे सौभाग्य की प्राप्ति हुई। इसके पीछे एक और रहस्य है कि कोई छल से उनका व्रत भंग न कर दें इसलिए छलनी के जरिए बहुत बारीकी से चंद्रमा के देखकर व्रत खोला जाता है। इसी बात को दोहराते हुए महिलाएं छलनी से चांद देखती हैं।

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किसने रखा था सबसे पहले व्रत?

कथाओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत सबसे पहले माता पार्वती जी ने भगवान शिव के लिए रखा था। इसी व्रत से उन्होंने अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। यही कारण है कि इस व्रत के दौरान माता पार्वती जी की पूजा की जाती है। माता पार्वती के बाद महाभारत में पांडवो की विजय के लिए द्रोपद्री ने यह व्रत रखा था।

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देवाताओं की विजय के लिए माताओं ने रखा था व्रत

ऐसा भी माना जाता है कि एक बार देवताओं और दानवों के युद्ध में देवता हारने लगे थे। तभी भगवान ब्रह्मा जी ने उनकी पत्नियों से व्रत रखकर उनकी विजय के लिए प्रार्थना करने को कहा। इसी वजह से सभी देवताओं को जीत प्राप्त भी हुई।

इसलिए करवा के साथ गणेश जी की कथा

ऐसा कहा जाता है कि करवा चौथ की कथा कभी भी अकेले नहीं सुननी चाहिए इसलिए इसके साथ गणेश भगवान की कथा भी सुनाई जाती है। इससे महिलाओं को एक पत्नी और एक मां की शक्ति मिलती है।

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