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भारतीय युवाओं में कम हो रहा है अरेंज मैरिज का चलन, वजह कर देगी हैरान

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 28 Jun, 2020 09:47 AM
भारतीय युवाओं में कम हो रहा है अरेंज मैरिज का चलन, वजह कर देगी हैरान

शादी किसी भी इंसान के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होता है। जहां पहले लड़का-लड़की परिवार की मर्जी से अरेंज मैरिज करते थे वहीं आजकल इसका चलन कम हो गया है। कारण यह है कि आज के लड़के-लड़कियों में सेमी अरेंज मैरिज और लव मैरिज का चलन बढ़ गया है, जोकि काफी हद तक सही भी है। ऐसा हम नहीं बल्कि हाल में सामने आई एक रिपोर्ट में कहा गया है।

 

सेमी अरेंज मैरिज का शुरू हुआ चलन

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की शहरी इलाकों में परिवार की मर्जी से अरेंज मैरिज की जगह लड़का और लड़की की पहल पर परिवार की रजामंदी से होने वाले विवाह (सेमी अरेंज मैरिज) लेते जा रहे हैं। अच्छी बात तो यह है कि इसके कारण घरेलू हिंसा के मामले में काफी कमी आ रही है। इतना ही नहीं, आर्थिक व परिवार नियोजन जैसे मामलों में महिलाओं के विचारों को भी अहमियत दी जा रही है।

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जमीन पर मिलेगा महिलाओं को अधिकार

'प्रोग्रेस ऑफ द वर्ल्ड वीमन 2019-2020: फेमलीज इन अ चेंजिंग वर्ल्ड' की रिप्रोट के मुताबिक परिवार अपनी संपूर्ण विविधता में, 'लैंगिक समानता में अहम निर्धारक, निर्णय लेने वालों को आज के लोगों की जिंदगी की हकीकत को देखते हुए जमीनी स्तर पर नीतियों को पहुंचाने में मदद करते हैं, जिसके मूल में महिला अधिकार हैं।' उन्होंने कहा कि परिवार मतभेदों, असमानताओं और काफी हद तक हिंसा के लिए भी जमीन तैयार करने वाले भी हो सकते हैं।

भारत में नहीं है जीवनसाथी चुनने का अधिकार

फूमजिले ने कहा, 'दुनियाभर में हम इस बात की कोशिश के गवाह बन रहे हैं कि महिला एजेंसी को खारिज किया जाए और उनके अपना फैसला लेने के अधिकार को 'पारिवारिक मूल्यों' के संरक्षण के नाम पर खारिज किया जाए।' दक्षिणी और पूर्वी एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और उत्तरी अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया में विवाह व्यापक वैश्विक और सामाजिक अनिवार्यता है। कई देशों में अपना जीवनसाथी चुनना व्यक्तिगत फैसला नहीं होता बल्कि यह परिवार व सामाजिक नेटवर्क द्वारा लिया जाता है। उदाहरण के लिए भारत में अरेंज मैरिज अब भी समान्य बना हुआ है। माता-पिता द्वारा तय विवाह में महिलाओं की अपना साझेदार चुनने में भूमिका बेहद सीमित होती है और हो सकता है कि वे अपने होने वाले पति से शादी के दिन ही पहली बार मिली हों।'

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बदल रहा है समय

हालांकि समय बीतने के साथ इस प्रथा में काफी बदलाव आया है। अब लड़का-लड़की परिवार की रजामंदी और अपनी पसंद से शादी करते है, खासतौर पर शहरी इलाकों में। इसमें भी परिवार अपनी राय देता है लेकिन फैसला महिला का ही होता है कि उसे शादी करनी है या नहीं।

महिलाएं खुद चुन रहीं है जीवनसाथी

रिपोर्ट में कहा गया कि लड़के-लड़की की पहल पर होने वाले विवाह में पारंपरिक विवाह के मुकाबले महिलाओं के पास खर्चे करने, बच्चे करने (कितने) और गर्भनिरोधकों जैसे अहम फैसलों को लेकर अपनी बात रखने का तीन गुना ज्यादा मौका होता है। ऐसे विवाह में महिलाएं बिना किसी परिवार सदस्य के खुद ही दोस्तों या रिश्तेदारों के यहां जाने का अरेंज मैरिज के मुकाबले 2 गुना ज्यादा मौका रखती हैं।

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