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हाथरस जैसा दूसरा वाकया: 22 साल की युवती के साथ गैंगरेप कर तोड़े हाथ-पैर, पीड़िता ने तोड़ा दम

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 01 Oct, 2020 10:22 AM
हाथरस जैसा दूसरा वाकया: 22 साल की युवती के साथ गैंगरेप कर तोड़े हाथ-पैर, पीड़िता ने तोड़ा दम

उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की दलित लड़की के साथ गैंगरेप और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। हाथरस की निर्भया का आक्रोश देश अभी कम भी नहीं हुआ कि इसी बीच एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यूपी राज्य के ही बलरामपुर जिले में एक दलित युवती के साथ भी ऐसी ही घिनौनी हरकत की गई।

हाथरस के बाद बलरामपुर में गैंगरेप

हाथरस से करीब 500 कि.मी. दूरी पर स्थित बलरामपुर जिले में 22 साल की एक दलित युवती के साथ दरिंदों ने पहले गैंगरेप किया और फिर बुरी तरह उसकी पिटाई की। इसके बाद उस युवती की मौत हो गई। यह वाकया 29 सितंबर की शाम का है, जहां दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में हर किसी का ध्यान हाथरस की निर्भया पर था। 

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दो आरोपी गिरफ्तार

सूत्रों के मुताबिक, बलरामपुर की युवती को घटना के बाद लखनऊ अस्पताल लाया गया था। पोस्टमार्टम करने पर डॉक्टरों ने युवती के साथ गैंगरेप की पुष्टि की। वहीं पीड़िता के शरीर पर कई चोट के निशान भी थे। पीड़िता के भाई का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में दो आरोपी हबीदुल्ला और हमीमुल्ला को गिरफ्तार किया है, जिसमें से एक नाबालिग है।

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हॉस्पिटल के रास्ते में तोड़ा दम

पीड़िता की मां ने बताया कि वह सुबह घर से निकली थे लेकिन जब उनकी बेटी शाम तक घर नहीं पहुंची तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। वह करीब 7 बजे बेहोशी की हालत में घर लौटी। अपराधियों ने इसे ई-रिक्शा में घर भेज दिया था। इसके बाद परिवार उसे स्थानीय हॉस्पिटल लेकर गए। स्थानीय डॉक्टर ने बताया कि युवती ने अपनी मां से पेट दर्द और जलन की शिकायत की थी। मगर, हालात गंभीर होने की वजह से डॉक्टरों ने उसे लखनऊ ले जाने को कहा लेकिन युवती ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने युवती का शव परिवार वालों को सौंप दिया, जिसके बाद बुधवार को उसका अंतिम संस्कार किया गया।

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बदमाशों ने तोड़े पीड़िता के हाथ-पैर

पीड़िता की मां का कहना है कि बदमाशों ने उसे नशीला पदार्थ देकर उसके साथ बलात्कार किया। उनकी हैवानियत यही नहीं रूकी उन्होंने युवती के पैर और पिछला हिस्सा भी तोड़ दिया। जो रिक्शा वाला उसे घर तक लाया वह दरवाजे पर ही उसे फेंक कर भाग गया। युवती ना ठीक से खड़ी हो पा रही थी और ना ही बोल पा रही थी। वह रोते हुए सिर्फ यही बोल रही थी "मुझे बचा लो मैं मरना नहीं चाहती।"

हालांकि, पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट में यह नहीं पता चला कि युवती के हाथ-पैर टूट गए थे। बलरामपुर पुलिस ने ट्वीट करते हुए कहा, 'पुलिस द्वारा पकड़े गए दोनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। हाथ और पैर टूटे हुए हैं ये विवरण सही नहीं है क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं है।'

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हाथरस के बाद बलरामपुर में हुए यह घटना दिल दहला देने वाली है। आखिर समाज में छिपे भेड़ियों को पुलिस का डर रह भी गया है या नहीं? अब ये मामला सिर्फ सोशल मीडिया पर आक्रोश दिखाने, पोस्टर, बैनर, पैम्पलेट लगाने और मोमबत्तियों जलाने तक ही मामला सीमित नहीं रहना चाहिए। आज देश ही हर बेटियां ना सिर्फ इंसाफ बल्कि अपने लिए एक सुरक्षित देश भी चाहती हैं जहां वो बिना डरे आजादी से धूम सके। देश का कानून में इतना सख्ती होना चाहिए कि कोई ऐसा करने के बारे में सोच भी ना पाए।

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