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बुलंद हौंसले: बेटी ने दिए तानें तो 80 साल के दंपत्ति बन गए चैंपियन

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 25 Feb, 2020 04:50 PM
बुलंद हौंसले: बेटी ने दिए तानें तो 80 साल के दंपत्ति बन गए चैंपियन

कहते हैं ना कि सफलता, किसी की उम्र देखकर नहीं आती। अगर मन में कुछ दिखाने का जज्बा हो तो सफलता किसी भी उम्र में हासिल की जा सकती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है 80 साल के बुजुर्ग दंपती ने।

 

जीत चुके हैं कई पदक

दरअसल, बुजुर्ग दंपती सुंदर सिंह ढिल्लो व उनकी पत्नी हरप्यारी ने 80 साल की उम्र में वो काम कर दिखाया है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। अधिक से अधिक पदक जीतने का लक्ष्य रखने वाला यह दंपती अब 250 से अधिक नेशनल व स्टेट लेवल खेल प्रतियोगिताओं में पदक हासिल कर चुका है।

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उम्र के इस पड़ाव पर भी नहीं बंद किया दौड़ना

इतना ही नहीं, प्रतियोगिता के लिए भी यह बुजुर्ग दंपत्ति सुबह 4 बजे ही पार्क में पहुंच जाता है। यह कपल्स 10-12 कि.मी तक बिना थके और रुके दौड़ लगाता है। सुदंर सिंह बताते हैं कि 2002 से सैर व दौड़ने का प्रेक्टिस करते आ रहे हैं, जिसे उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी बंद नहीं किया।

बेटी ने बात ने दिया आइडिया

साल 1990 में सेना में सूबेदार पद से रिटायर्ड सुंदर सिंह की बेटी वैशाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी हैं। जब उन्होंने पिता को कई सालों तक घर पर ही बैठा देखा तो उन्होंने एक दिन अनायास यह कह दिया, 'पापा, आप खिलाड़ी बेटी के पिता हैं और सेना से रिटायर्ड सैनिक भी। आपको दिनभर घर में यूं बैठे रहना शोभा नहीं देता।'

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सुदंर सिंह के दिल में बेटी की बातें इस कदर बैठ गई की उन्होंने कुछ करने की ठान ली। अगले ही दिन से उन्होंने पार्क में दौड़ लगाना शुरू किया। साल 2002 में पहली बार भिवानी में आयोजित मास्टर्स एथलेटिक्स मीट में हिस्सा लिया और लॉग जंप, 200 व 100 मीटर रेस में रजत पदक जीते। फिर क्या था इसके बाद उन्होंने अधिक से अधिक पदक जीतने का लक्ष्य बना लिया।

बेटी की शादी के बाद पत्नी मे भी शुरू किया दौड़ना

साल 2003 में हिसार में उन्होंने 5 कि.मी वॉक में गोल्ड जीता। इसके बाद उन्होंने रोजाना सुबह उठने व 10 कि.मी दौड़ने का नियम बनाया। सुदंर सिंह का एक बेटा भी है, जो विदेश में सैटल हो गया। बेटी की शादी और बेटे के जाने के बाद सुंदर सिंह की पत्नी हरप्यारी ने भी पति के साथ मैदान में जाने का फैसला किया।

100 चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं हरप्यारी

साल 2013 में पहली बार अलवर (राजस्थान) में नेशनल मास्टर्स मीट में दोनों ने 100 व 200 मीटर रेस, 3 कि.मी. वॉक, 5 कि.मी ओपन दौड़ में गोल्ड जीता। अब तक सुंदर सिंह मास्टर्स एथलेटिक्स मीट में करीब 160 नेशनल व स्टेट पदक जीत चुके है, वहीं हरप्यारी भी करीब 100 नेशनल व स्टेट चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं। यह दंपति सिर्फ बुजुर्गों ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है।

तानों से बचने के लिए अंधेरे में लगाई दौड़

हरप्यारी कहती हैं कि पार्क में मुझे दौड़ता देख लोग मुझपर हंसते थे और कमेंट करते थे कि बुढ़ापे में दौड़कर क्या ओलंपिक जीतना है। तब शर्म की वजह से उन्होंने सुबह व शाम अंधेरे में दौड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने लोगों की परवाह करना छोड़ खुद के बारे में सोचा। जब वो पदक जीतकर आई तो लोगों ने उन्हें ताने मारने की बजाए सम्मानित किया, जिससे उनका हौंसला और भी बढ़ा।

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बीमारी को हरा बने चैंपियन

2017 में सुंदर सिंह के फेफड़ों में परेशानी हो गई। पति की देखभाल के दौरान हरप्यारी को भी बीमारी ने जकड़ लिया। मगर, दोनों ने हौंसला नहीं छोड़ा और करीब 2 साल बाद आर्मी अस्पताल में इलाज करवाने के बाद दोनों स्वस्थ होकर लौटें और मैदान में उतरें।

इनकी सेहत का राज...

सुबह : सुबह 1 गिलास पानी, नियमित व्यायाम, चलना और दौडना
ब्रेकफास्ट: दूध और गोंद के 2 लड्डू।
दोपहर : 3 रोटी, दाल, सब्जी और दही।
शाम : पेटभर कर ज्यादा दूध वाली खीर।
रात : हल्का-फुल्का भोजन और समय पर सोना।

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