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नारी की नई पहचान

नारी की नई पहचान
Views:- Sunday, March 8, 2015-9:50 AM

नई शताब्दी में नारी की एक नई छवि उभर रही है । सदियों से जो महिलाएं बेडिय़ों से जकड़ी थीं वे आज उन्हें तोड़ कर अपनी नई पहचान बनाने में जुटी हैं । आज के युग में नारी अबला नहीं रही, कहीं ज्यादा सक्षम और सबल हो चुकी है । इस संदर्भ में राष्ट्र निर्माता स्वामी विवेकानंद ने वर्षों पहले ही कह दिया था कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सर्वोत्तम थर्मामीटर है वहां की महिलाओं की स्थिति । 

हमें महिलाओं को ऐसी स्थिति में पहुंचा देना चाहिए जहां वे अपनी समस्याओं को अपने ढंग से स्वयं सुलझा सकें । हमें नारी शक्ति के उद्धारक नहीं, वरन् उनके सहायक बनना चाहिए । भारतीय महिलाएं संसार की अन्य किन्हीं भी महिलाओं की भांति अपनी समस्याओं को सुलझाने की क्षमता रखती हैं । आवश्यकता है कि उन्हें उपयुक्त अवसर मिलें इसी आधार पर भारत के उज्ज्वल भविष्य की संभावनाएं समाहित हैं।  

— हेमा शर्मा